पोटका से ग्राउंड रिपोर्ट / असरदार मेनका सरदार का इस बार लिटमस टेस्ट

कुंदरूकोचा में गोल्ड माइनिंग होती थी, पर वह भी पिछले एक साल से बंद पड़ी है। कुंदरूकोचा में गोल्ड माइनिंग होती थी, पर वह भी पिछले एक साल से बंद पड़ी है।
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कुंदरूकोचा में गोल्ड माइनिंग होती थी, पर वह भी पिछले एक साल से बंद पड़ी है।कुंदरूकोचा में गोल्ड माइनिंग होती थी, पर वह भी पिछले एक साल से बंद पड़ी है।

  • सत्ता की धुरी बनीं मेनका को उत्कृष्ट विधायक का तो सम्मान मिला पर लोगों को सुविधाएं नहीं मिलीं

दैनिक भास्कर

Nov 13, 2019, 11:46 AM IST

पोटका (ललित दुबे/ राकेश मिश्रा). लगातार 15 साल से पोटका विस क्षेत्र की विधायक रहीं मेनका सरदार का जनता इस बार लिटमस टेस्ट लेने के मूड में है। 2018 में उत्कृष्ट विधायक का खिताब तो अपने नाम कर लिया लेकिन क्षेत्र का विकास जस का तस है। पोटका विधानसभा क्षेत्र में एक भी कॉलेज नहीं है। 25-30 किमी दूर जमशेदपुर पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है। पिछले 20 वर्षों से भाजपा विधायक मेनका सरदार पोटका में राजनीतिक धुरी बनी हुई हैं। हार-जीत का दांव मेनका सरदार से ही होकर गुजर रहा है। लेकिन क्षेत्र में बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाएं बेहतर नहीं हो पाईं।


2014 में तीसरी बार जीतीं
वर्ष 2000 में पहली बार मेनका सरदार विधायक बनीं। वे पोटका की पहली महिला विधायक बनीं। इसके बाद वर्ष 2005 में झामुमो के प्रत्याशी अमूल्यो सरदार ने जेल में रहते हुए भी मेनका सरदार को 13,759 मत से चुनाव हरा दिया। 2009 में एक बार फिर मेनका सरदार ने चुनाव जीता, इस चुनाव में कांग्रेस के सुबोध सिंह सरदार दूसरे नंबर पर रहे, जबकि झामुमो के अमूल्यो सरदार तीसरे स्थान पर खिसक गए। वहीं, 2014 में मेनका सरदार ने झामुमो के युवा नेता संजीव सरदार को हराकर तीसरी बार पोटका विधानसभा में जीत हासिल की। 

 

सबसे बड़े मुद्दे: माइंस बंद, लोग मजबूर

  • पलायन : पोटका विधानसभा कृषि बहुल इलाका है। कारखाना व माइंस नहीं के बराबर है। कुंदरूकोचा में गोल्ड माइनिंग होती थी, पर वह भी पिछले एक साल से बंद पड़ी है।
  • शिक्षा: पोटका विधानसभा क्षेत्र में एक भी डिग्री काॅलेज नहीं है। यहां के युवाओं को डिग्री की पढ़ाई के लिए 25 से 30 किलोमीटर दूर जमशेदपुर आना पड़ता है। यह समस्या दूर नहीं हो रही है।
  • स्वास्थ्य : पोटका सीएचसी, हल्दीपोखर पीएचसी में इलाज की सरकारी व्यवस्था बहुत बेहतर नहीं है। क्षेत्र में मलेरिया और डायरिया का प्रकोप प्राय: सामने आता रहता है। 

वोटर्स बोले, विकास होता नहीं, सिर्फ बातें होती हैं

  • हमारे क्षेत्र से मेनका सरदार 15 वर्ष से जीत रही हैं। लेकिन समस्या जस की तस है। नेता सिर्फ दावे करते हैं।- नरेश महतो, निवासी
  • गर्मी आते ही क्षेत्र के अधिकतर चापाकल और बोरिंग सूख जाते हैं। अधिकतर गांवों के लोग पानी के लिए परेशान होते हैं।- सुरेन बेसरा, निवासी, हाता
  • विकास की बातें होती हैं, पर विकास नहीं दिखता। हमारे इलाके में बिजली, पानी की समस्या वर्षों पुरानी है।- अजय कुमार शिक्षाविद्

3 चुनावों का सक्सेस रेट

  • 2014 : मेनका सरदार (भाजपा) - 68,191, संजीव सरदार (झामुमो) -61,472, दुखनी माई सरदार(कांग्रेस)- 14,227
  • 2009 : मेनका सरदार (भाजपा) - 44,095, सुबोध सिंह सरदार (कांग्रेस)-28,385, अमूल्यो सरदार (झामुमो)-24,789
  • 2005 : अमूल्यो सरदार (झामुमो)- 53,760, मेनका सरदार (भाजपा)-40,001, सूर्य सिंह बेसरा (जेकेपीपी)-21,162

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