झारखंड विस चुनाव / 2014 से सबक लेकर कांग्रेस और झामुमो ने किया गठबंधन... लेकिन राजद नाराज



गठबंधन की घोषणा के बाद हेमंत सोरेन व आरपीएन सिंह। गठबंधन की घोषणा के बाद हेमंत सोरेन व आरपीएन सिंह।
X
गठबंधन की घोषणा के बाद हेमंत सोरेन व आरपीएन सिंह।गठबंधन की घोषणा के बाद हेमंत सोरेन व आरपीएन सिंह।

  • पिछले चुनाव में कांग्रेस-झामुमाे 3-4 सीटाें के विवाद में हुए थे अलग
  • राजद ने प्रेसवार्ता से खुद को दूर रखा, वाम दल गठबंधन से बाहर

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2019, 07:54 PM IST

रांची (बिनाेद ओझा/जीतेंद्र कुमार). भाजपा के विरुद्ध झामुमो, कांग्रेस और राजद ने शुक्रवार काे गठबंधन ताे किया, लेकिन मजबूत आगाज करने में सफल नहीं रहा। पहले कांग्रेस, झामुमो, झाविमो, राजद और वामदल महागठबंधन बनाने का दावा करते रहे।

 

बाद में झाविमो ने महागठबंधन से पल्ला झाड़ लिया। झामुमो, कांग्रेस और राजद ने वामदलों को भी किनारे कर गठबंधन बना लिया। हालांकि, इस गठबंधन में भी गांठ बरकरार रह गई। गठबंधन की घोषणा के लिए बुलाई गई प्रेसवार्ता से अलग रहकर राजद ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर कर दी।


2014 में कांग्रेस और झामुमाे के बीच तीन से चार सीटाें पर विवाद के बाद झामुमाे और कांग्रेस ने गठबंधन ताेड़ दिया था। वह भी तब जबकि कांग्रेस और झामुमाे गठबंधन की सरकार हेमंत साेरेन के नेतृत्व में सत्ता पर काबिज थी। हेमंत साेरेन 22 माह तक सीएम रहे। जब चुनाव में जाने की बात आई तब दाेनाें दलाें के बीच सीट बंटवारे काे लेकर मतभेद हाे गया।

 

इसके बाद जिद में आकर दाेनाें दलाें ने पिछले 22 माह के गठबंधन काे ताेड़ दिया और दाेनाें दल अकेले ही विधानसभा चुनाव 2014 में चले गए। हालांकि, कांग्रेस ने राजद के साथ गठबंधन जरूर किया था। कांग्रेस जहां सात पर सिमट गई, वहीं झामुमाे के खाते में 19 सीट गए थे।  इसी इतिहास से सबक लेते हुए इस बार कांग्रेस और झामुमाे ने यह तय किया कि वे दाेनाें मिलकर गठबंधन बनाएंगे और इसमें समान विचारधारा वाले दलाें काे शामिल करते हुए गठबंधन के तहत ही चुनाव लड़ेंगे।

 

घाटशिला, जामताड़ा और पाकुड़ सीट पर था विवाद
2014 चुनाव में जिन तीन सीटाें काे लेकर गठबंधन टूटा था, उनमें घाटशिला, जामताड़ा, पाकुड़ सीटें थीं। घाटशिला में प्रदीप बलमुचू , जामताड़ा में फुरकान या इरफान और पाकुड़ में आलमगीर आलम काे लेकर कांग्रेस और झामुमाे आमने-सामने थे। इन सीटाें काे झामुमाे छाेड़ने के लिए तैयार नहीं था। बात इतनी बढ़ी कि कांग्रेस और झामुमाे के बीच गठबंधन टूट गया। इस बार प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह ने कहा था कि दाेनाें दल त्याग की राजनीति करेंगे ओर गठबंधन के तहत ही चुनाव हाेगा।

 

नेतृत्व के सवाल पर भारी पड़ा झामुमो
इस बार नेतृत्व के सवाल पर झामुमो शुरू से अड़ा रहा। कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह को सार्वजनिक रूप से घोषणा करनी पड़ी कि झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन चुनाव लड़ेगा। इस सवाल पर कि झामुमो का मुख्यमंत्री पांच साल का होगा या ढाई-ढाई साल का फार्मूला तय हुआ है, आरपीएन सिंह ने यह कह कर बात टाल दी कि सरकार बनने पर हेमंत पूरे समय तक नेतृत्व करेंगे। झामुमो की मजबूती इस रूप में भी दिखी कि गठबंधन की घोषणा दिल्ली के बदले रांची में हुई। हेमंत ने कांग्रेस के दिल्ली दरबार का बहुत चक्कर नहीं लगाया।

 

मासस और माले का रुख नरम, सीपीआई-सीपीएम गर्म
मासस के राज्य परिषद सदस्य सुशांताे मुखर्जी ने कहा कि विधायक अरूप चटर्जी और हेमंत साेरेन के बीच बात हाेगी, जिसमें सभी चीजें तय हाे जाएंगी। वहीं भाकपा माले के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद ने कहा कि माले हेमंत साेरेन से बातचीत के बाद अंतिम फैसला लेगा। सीपीआई के राज्य सचिव भुनेश्वर मेहता ने कहा कि झामुमाे-कांग्रेस ने धाेखेबाजी की है तो सीपीएम के राज्य सचिव गाेपीकांत बख्शी ने कहा कि भाजपा विराेधी वाेटाें का बिखराव राेकने में झामुमाे-कांग्रेस असफल रही है।

 

झाविमो की लिस्ट में दूसरे दल को छोड़कर आए तीन प्रत्याशी
झाविमो ने पहले चरण की सीटों पर प्रत्याशी तय कर लिया है। दूसरे दल को छोड़कर आए तीन प्रत्याशियों पर झाविमो ने भरोसा किया है तो पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी उम्मीदवार बनाने की घोषणा की गई है। झाविमो की लिस्ट में एक डॉक्टर भी हैं।

 

  • भवनाथपुर : विजय कुमार केसरी पूर्व मंत्री रामचंद्र केसरी के पुत्र हैं। झारखंड की पहली सरकार के मुखिया रहे बाबूलाल मरांडी के मंत्रिमंडल में रामचंद्र केसरी मंत्री थे। 
  • डाल्टनगंज : डॉ राहुल कुमार अग्रवाल पेशे से डॉक्टर हैं। इनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है। इनके परिवार के कई लोग उनके पेशे में हैं। सामाजिक कार्यों में इनकी दिलचस्पी रही है। 
  • बिश्रामपुर : अंजू सिंह पिछले चुनाव में निर्दलीय खड़ी हुई थीं। इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया था। यह संपन्न परिवार से आती हैं। 
  • छतरपुर : धर्मेंद्र प्रकाश बादल एक संपन्न परिवार से आते हैं। वह जिला परिषद के अध्यक्ष रहे हैं। वे लोजपा के पूर्व महासचिव भी रहे हैं। 
  • चतरा : तिलेश्वर राम झाविमो के जिला अध्यक्ष रहे हैं। ये काफी संपन्न बताए जाते हैं। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। चतरा क्षेत्र में पार्टी का जनाधार बढ़ाने में इनकी अहम भूमिका रही है।
  • पांकी : रुद्र कुमार शुक्ला राजनीतिक बैकग्राउंड से आए हुए हैं। वह 12 साल तक आजसू में रहे। इस क्षेत्र में आजसू को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही। यह संपन्न बताए जाते हैं।
  • हुसैनाबाद : वीरेंद्र कुमार लोक जनशक्ति पार्टी से जुड़े रहे हैं। ये काफी संपन्न बताए जाते हैं। हाल ही में लोक जनशक्ति पार्टी छोड़कर इन्होंने झारखंड विकास मोर्चा का दामन थामा है।
  • गढ़वा : सूरज प्रसाद गुप्ता गढ़वा के झाविमो जिला अध्यक्ष रहे हैं। गढ़वा क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है। ये संपन्न बताए जाते हैं।
  • बिशुनपुर : महात्मा उरांव पार्टी के महत्वपूर्ण कार्यकर्ता रहे हैं। इस क्षेत्र में इनकी अच्छी पकड़ है। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता होने के कारण उन्हें प्रत्याशी बनाया गया है।
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना