झारखंड विधानसभा / मुख्यमंत्री ने कहा- सरकार विस्थापितों के अधिकारों को लेकर गंभीर, विस्थापन आयोग का होगा गठन

सदन की कार्यवाही के दौरान हेमंत सोरेन। -फाइल। सदन की कार्यवाही के दौरान हेमंत सोरेन। -फाइल।
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सदन की कार्यवाही के दौरान हेमंत सोरेन। -फाइल।सदन की कार्यवाही के दौरान हेमंत सोरेन। -फाइल।

  • विधायक ने भानु प्रताप शाही ने स्थानीयता नीति को लेकर उठाया सवाल, कहा- भ्रम की स्थिति बनी है

दैनिक भास्कर

Mar 18, 2020, 06:34 PM IST

रांची. विस्थापिताें काे मुअावजा के मामले में हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने कहा कि सीएनटी -एसपीटी एक्ट के बावजूद लाेगाें ने विकास कार्याें के लिए अपनी जमीन दी। सरकार विस्थापिताें अाैर उनके अधिकाराें काे लेकर गंभीर है। उनके लिए अायाेग का गठन किया जाएगा। ताकि उनकी समस्याअाें का ज्यादा से ज्यादा निदान हाे। पूर्व की सरकार में भूमि अधिग्रहण कानून की अवहेलना की गई। विस्थापिताे काे चार गुणा मुअावजा मिलेगा।

उधर, सदन में बुधवार काे विपक्षी विधायकाें ने अादिवासी समुदाय के साथ मारपीट करने का मामला उठाते हुए हंगामा किया। सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई विपक्ष के लाेगाें ने कडरू में अादिवासी समुदाय के लाेगाें के साथ मारपीट करने का मामला उठाया स्पीकर प्रश्नकाल लाना चाहते थे लेकिन विपक्ष के लाेगाें ने कार्यस्थगन के माध्यम से अादिवासियाें पर हुए हमले अाैर इस मामले में सरकार की उदासीनता पर सवाल उठाने लगे। विपक्ष के लाेग अाराेप लगा रहे थे कि जिस तरह से दिन दहाड़े कडरू में शाहीन बाग के समर्थन में धरनास्थल पर अादिवासियाें पर हमला किया गया। बस की खिड़की से खींच कर मारपीट की गई। वह उचित नहीं है। सरकार इसपर अबत काेई कार्रवाई नहीं की है। राजधानी में दिन दहाड़े इस तरह की घटना हाे रही है। इसके साथ ही विपक्ष ने चाईबासा में पिछले दिना सात लाेगाें की पत्थलगड़ी समर्थकाें द्वारा हत्या किए जाने का मामला भी उठाया। कहा इसकी उच्चस्तरीय जांच हाे। संसदीय कार्यमंत्री अालमगीर अालम ने इसके जवाब मे ंकहा कि इस मामले में सरकार ने संज्ञान लिया है। इधर हंगामा करते हुए विपक्ष के लाेग वेल में अा गए। वैसे बुधवार काे विधानसभा की पहली विपक्ष के लाेग अलग-अलग मामलाें काे लेकर तीन बार वेल में अाए अाैर हंगामा किया। 

पूर्व मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने भी कहा कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने अादिवासियाें का सम्मान रखते हुए अलग राज्य दिया लेकिन कडरू की कल की घटना से काफी तकलीफ हुई है। इस मामले में सरकार 12 घंटे के भीतर कार्रवाई कर सदन काे सूचित करे। मंत्री जाेबा मांझी ने कहा कि चाईबासा की घटना के बाद सीएम गए थे। उनके साथ उस क्षेत्र के विधायक भी थे। जरूरतमंदाें काे अावश्यक सुविधाएं देने का निर्देश सीएम के माध्यम से दिया गया है। इधर, बंधु तिर्की ने नए विधानसभा भवन का मामला उठाते हुए कहा कि इसके निर्माण के समय विस्थापिताें अाैर अांदाेलनकारियाें पर मुकदमा दर्ज किया गया था। उनके उपर भी मामला दर्ज किया गया। इसलिए सरकार सभी पर से मुकदमें वापस ले। ध्यानाकर्षण में प्रदीप यादव ने एसटी-एससी छात्रावासाें का मामला उठाया अाैर उनकी जल्द से जल्द मरम्मत की मांग रखी। मंत्री ने समयबद्ध तरीके से मरम्मत का अाश्वासन दिया। 

भाजपा विधायक ने स्थानीय नीति का मामला उठाया

विधायक भानु प्रताप शाही ने स्थानीय नीति काे लेकर मामला उठाया। कहा कि केबिनेट में मामला अाने के बाद भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सरकार बताए कि 1932 के खतियान काे अाधार बनाएगी ताे उस समय भूमिहीन रहे लाेगाें के वंशज वंचित हाे जाएंगे। क्याेंकि उनका खतियान में नाम ही नहीं था। विधायक रामदास साेरेन ने राज्य के बाहर तकनीकी संस्थानाें में पढ़ रहे एसटी एसटी छात्राें का मामला उठाया अाैर कहा कि उन्हें छात्रवृति नहीं मिल रही है। उनका मूल कागजात भी संबंधित काॅलेजाें में ही फंस गया है।

स्थानीयता नीति को लेकर जेएमएम विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने कहा कि पिछली सरकार ने बिहार, उत्तराखंड, ओड़िसा, छत्तीसगढ आदि के युवाओं के लिए रास्ता खोल दिया है। लेकिन झारखंड के स्थानीय युवाओं को नौकरी में फायदा नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि गुरुजी शिबू सोरेन ने 1932 के खतिहान पर अपनी सहमति जताई है। यह लागू होने के बाद ही युवाओं को फायदा होगा।

 

वहीं कांग्रेस विधायक सह स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता इस मामले पर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। इस मामले पर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव या फिर आलमगीर आलम से बात करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनसे बेहतर जवाब कोई नहीं दे सकता। सूबे के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि स्थानीय नीति को लेकर अभी कमिटी नहीं बनी है और न ही कोई रिपोर्ट आई है। जो इस कमिटी का विरोध कर रहे हैं वो झारखंड विरोधी है। भाजपा ने भी इस मामले में झारखंड को जलाने का काम किया था। उन्होंने कहा कि झारखंड के निर्माण झारखंडियों के लिए हुआ था। यहां यूपी का शिक्षक काम नहीं कर सकता।

स्थानीय नीति पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पहले सरकार अपने दल से निपट ले, उसके बाद हम सब देखेंगे कि क्या करना है। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ बयानबाजी कर रही है। काम क्या कर रही वो सब को दिख रहा है। आदिवासियों की सिर्फ बातें हो रही है लेकिन काम कुछ नहीं हो रहा। सरकार की मंशा कितनी साफ है यह वक्त बताएगा।
 वहीं सुदेश महतो ने कहा कि सरकार कमिटी की बात कह रही है लेकिन तीन बातें सरकार को साफ करने की जरूरत है। पहला यह कि कमिटी में कौन-कौन सदस्य होंगे, इस कमिटी की समय सीमा कब तक की होगी और जब तक कमिटी की रिपोर्ट नहीं आती तब तक राज्य में कोई भी नियोजन न हो। 


उधर, निर्दलीय विधायक सरयू राय ने स्थानीय नीति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि सरकार को लगता है कि पुरानी नीति में कुछ कमी है तो सरकार को अधिकार है कि वे नई नीति बना सकते हैं। लेकिन सरकार को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि नीति संविधान के अनुरूप हो, न्याय संगत हो। नहीं तो कोई भी हाई कोर्ट चला जायेगा और सरकार कि नीति धरी की धरी रह जायेगी।

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