भास्कर इंटरव्यू /झारखंड बोर्ड के 5 टॉपर्स ने बताए कामयाबी के राज- सोशल मीडिया से बनाई दूरी, सेल्फ स्टडी पर रहा जोर



प्रिया राज, अमरेश कुमार, गोपाल सिंह और काजल कुमार। (बाएं से दाएं) प्रिया राज, अमरेश कुमार, गोपाल सिंह और काजल कुमार। (बाएं से दाएं)
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प्रिया राज, अमरेश कुमार, गोपाल सिंह और काजल कुमार। (बाएं से दाएं)प्रिया राज, अमरेश कुमार, गोपाल सिंह और काजल कुमार। (बाएं से दाएं)

  • पांच में से तीन इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल हजारीबाग की छात्रा, दो नेतरहाट के स्टूडेंट
  • परीक्षा में 438256 स्टूडेंट्स हुए थे शामिल, इसमें से 310158 उत्तीर्ण
  • फर्स्ट डिविजन से 167917 छात्र पास, यानि कुल पास का 54 प्रतिशत

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 06:58 PM IST

रांची. झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा गुरुवार को मैट्रिक परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए गए। टॉप टेन में 33 स्टूडेंट्स हैं। इसमें नेतरहाट आवासीय विद्यालय के 18 छात्र और इंदिरा गांधी आवासीय विद्यालय की 12 छात्राएं हैं। इंदिरा गांधी आवासीय विद्यालय की प्रिया राज 496 नंबर लाकर टॉप पर रहीं। फर्स्ट फाइव टॉपर्स में से एक ने आईआईटी, दो यूपीएसपी, एक डॉक्टर और एक सीए बनने का लक्ष्य बनाया है। भास्कर प्लस ऐप ने इन टॉपर्स से बातचीत की।

  • प्रिया राज: सोशल मीडिया अकाउंट नहीं, यूट्यूब पर देखती-सुनती हैं हरिवंश राय बच्चन की कविता

    प्रिया राज: सोशल मीडिया अकाउंट नहीं, यूट्यूब पर देखती-सुनती हैं हरिवंश राय बच्चन की कविता

    रांची में चुटिया मोहल्ले के सिरमटोली की रहने वाली प्रिया राज को 500 में से 496 अंक मिले हैं। प्रिया हजारीबाग स्थित इंदिरा गांधी आवासीय उच्च विद्यालय की स्टूडेंट हैं। प्रिया को अंग्रेजी, गणित और संगीत में 100-100 अंक मिले हैं जबकि विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में उन्हें 97 अंक मिले हैं। पहली कक्षा से लेकर नौंवी तक अच्छे मार्क मिलते रहे हैं। हजारीबाग से पहले प्रिया रांची के ही स्कूल में पढ़ाई करती थी। हजारीबाग में एडमिशन के लिए प्रिया ने तैयारी की थी।कोचिंग करने के बाद उन्होंने इंदिरा गांधी आवासीय उच्च विद्यालय का इंट्रेंस टेस्ट दिया था। छठी और सातवीं में प्रिया सेकंड जबकि आठवी और नौंवी में फर्स्ट आई थी। नौंवी बोर्ड में प्रिया को 95.6 प्रतिशत मार्क्स मिले थे। 

     

    दूसरों से क्या अलग: पढ़ाई के लिए खुद से तुलना करनी पड़ती है। पहले कैसा किया था और अब क्या करना है। चूकि स्कूल आवासीय था, इसलिए स्कूल के बाद तीन से साढ़े चार तक स्टडी करती थी। इसके बाद ट्यूशन की जगह साढ़े चार से साढ़े सात तक इवनिंग क्लास लगती थी। फिर साढ़े नौ के बाद हम 10:30 तक सेल्फ स्टडी करते थे। औसतन क्लास को हटाकर हमने छह घंटे तक पढ़ाई की। इसके अलावा खेल और ऐक्सट्रा एक्टिविटी को भी नहीं छोड़ा। प्रिया के मुताबिक, हमने कितनी देरी तक पढ़ाई की, ये जरुरी नहीं है, जरुरी ये है कि हमने कितनी पढ़ाई की। कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है। ये चीजें कुछ दिन बाद के लिए है। यूट्यूब पर हरिवंश राय बच्चन की कविता देखती और सुनती हूं। 

     

    लक्ष्य : आईआईटी करना चाहती हूं। 

     

    परिवार : पिता बसंतजी तिवारी व्यवसाय करते हैं जबकि मां बबीता तिवारी हाउसवाइफ हैं। मेरे दो छोटे भाई हैं। सबसे छोटा भाई नौंवी का स्टूडेंट है जबकि दूसरे नंबर के भाई ने इस साल मेरे साथ सीबीएसई 10वीं का एग्जाम दिया था। उनका रिजल्ट 96 प्रतिशत रहा था।  

  • अमरेश कुमार: टीचर्स का बड़ा रोल, ग्रुप डिस्कशन से मिला फायदा

    अमरेश कुमार: टीचर्स का बड़ा रोल, ग्रुप डिस्कशन से मिला फायदा

    चतरा जिले के भूसिया में रहने वाले अमरेश को 500 में से 495 अंक मिले हैं। अमरेश लातेहार स्थित नेतरहाट आवासीय विद्यालय के छात्र हैं। अमरेश को संस्कृत में 100, गणित में 99, विज्ञान में 98, सामाजिक विज्ञान में 99 और अंग्रेजी में 92 अंक मिले हैं। अमरेश को पहली कक्षा से लेकर नौंवी तक हमेशा अच्छे मार्क्स मिलते रहे हैं। हमेशा वे क्लास में फर्स्ट और सेकंड आते रहे हैं। 

     

    दूसरों से क्या अलग: दसवीं की परीक्षा के लिए स्कूल में टीचर्स सेट बनवाकर पढ़ाई कराते थे। क्लास के बाद रिवीजन के दौरान हम सेट के सवाल हल करते थे। फिर टीचर्स हमें गाईड करते थे। अच्छी तैयारी और नंबर्स का श्रेय टीचर्स को जाता है। क्लास के अलावा छह से सात घंटे पढ़ाई करते थे। क्लास की पढ़ाई के अलावा छात्रों के बीच ग्रुप डिस्कशन होता था जिसका मुझे फायदा मिला। कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है। स्कूल में सम्मेलन के दौरान टीचर्स के मोटिवेशनल स्पीच सुनते थे। अंतराक्षरी खेलते थे।

     

    लक्ष्य: आईआईटी करना है फिलहाल, आगे यूपीएसएसी की तैयारी करना चाहते हैं। 

     

    परिवार: घर में मम्मी-पापा और बड़ा भाई है। पापा गोपाल यादव किसान हैं जबकि मां हाउस वाइफ हैं। बड़ा भाई एयर फोर्स की तैयारी कर रहा है। 

  • गोपाल सिंह: गीता पढ़ने का फायदा मुझे मिला

    गोपाल सिंह: गीता पढ़ने का फायदा मुझे मिला

    सिमडेगा जिले के लचड़ागढ़ के रहने वाले गोपाल सिंह को 500 में से 492 अंक मिले हैं। गोपाल को नेतरहाट आवासीय विद्यालय के छात्र हैं। इन्हें आईआईटी में 99, संस्कृत में 100, गणित में 100, विज्ञान में 98 और सामाजिक विज्ञान में 95 मार्क्स मिले हैं। पहली से लेकर सातवीं तक की पढ़ाई गोपाल ने सिमडेगा से ही की। इसके बाद सातवीं से लेकर दसवीं तक की पढ़ाई नेतरहाट विद्यालय से की। गोपाल को पहली से लेकर सातवीं तक गोपाल हमेशा फर्स्ट आते रहे। इसके बाद
    फर्स्ट और सेकंड। 

     

    दूसरों से क्या अलग: टीचर्स से जुड़ाव रखा, उनके बताए मार्ग पर चलता रहा। कॉन्सेप्ट क्लियर रखा। अच्छे मार्क्स के पीछे टीचर्स, माता-पिता, सीनियर और जूनियर ने हमेशा प्रोत्साहित किया। पढ़ाई के दौरान हमेशा रूटिन को फॉलो किया और क्लास के बाद सात घंटे तक सेल्फ स्टडी किया। कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं हैं। यूट्यूब पर डॉक्टर विवेक बिंद्रा का मोटिवेशनल स्पीच सुनता था। पढ़ाई के दौरान अंत समय में मैं हतोत्साहित हो गया था। फिर मुझे किसी ने गीता पढ़ने का सुझाव दिया। गीता पढ़ा जिसका फायदा मुझे मिला।

     

    लक्ष्य: आईआईटी करना है फिलहाल, आगे यूपीएसएसी की तैयारी करना चाहते हैं। 

     

    परिवार: घर में मम्मी-पापा और दादी हैं। गोपाल अपने घर में इकलौते हैं।

  • काजल कुमारी: 10-12 घंटे पढ़ाई किया, डॉक्टर बनना है लक्ष्य

    काजल कुमारी: 10-12 घंटे पढ़ाई किया, डॉक्टर बनना है लक्ष्य

    झारखंड बोर्ड 10वीं में चौथी स्टेट टाॅपर काजल कुमारी ने 491 अंक प्राप्त किया है। काजल तिरिल सरना टोली, रांची की रहने वाली हैं और इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग से मैट्रिक की परीक्षा दी हैं। काजल इससे पहले 9वीं तक की परीक्षा में 90 फीसदी तक नंबर प्राप्त कर चुकी हैं। 

     

    एग्जाम के लिए दूसरों से क्या और कितने अलग तरीके से पढ़ाई की? 
    काजल का कहना है कि उन्हें पढ़ाई के वक्त बेहद शांति चाहिए होती है। ऐसे में वो आराम से स्टडी कर पाती हैं। सेल्फ स्टडी पर ज्यादा फोकस रहता है। प्रॉब्लम होने पर सीनियर्स से हेल्प लेने से बिल्कुल नहीं हिचकती। काजल एग्जाम के वक्त रोजाना करीब 10-12 घंटे पढ़ाई किया करती थीं।

     

    सोशल मीडिया अकाउंट है क्या? आपका लक्ष्य क्या है? 
    काजल का सोशल मीडिया पर अकाउंट नहीं है। डॉक्टर बनने का लक्ष्य है। काजल के पिता विजय कुमार आरबीएस कॉलेज पटना में लेक्चरल हैं। मां अनिता देवी हाउस वाइफ है। बड़ी बहन टीचर ट्रेनिंग का कोर्स कर रही हैं और दो छोटे भाई 9वीं क्लास में पढ़ाई कर रहे हैं।

  • पल्लवी: सीए करना चाहती है 10वीं की 4th स्टेट टॉपर

    पल्लवी: सीए करना चाहती है 10वीं की 4th स्टेट टॉपर

    झारखंड बोर्ड 10वीं में चौथी स्टेट टाॅपर पल्लवी ने 491 अंक प्राप्त किया है। पल्लवी पटना की रहने वाली है और इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल, हजारीबाग से मैट्रिक की परीक्षा दी है। पल्लवी इससे पहले 9वीं तक परीक्षा में टॉप 10 स्टूडेंट्स में ही रही है। 

     

    एग्जाम के लिए दूसरों से क्या और कितने अलग तरीके से पढ़ाई की? 
    पल्लवी बताती है कि वो हॉस्टल में रहती थी। इसलिए ज्यादातर रात में ही पढ़ाई करती थी। खाना खाने के बाद पढ़ने बैठती और कम से कम 1 बजे रात तक इसे जारी रखती थी। कोचिंग नहीं किया बल्कि सेल्फ स्टडी पर ध्यान दिया।

     

    सोशल मीडिया अकाउंट है क्या? 
    पल्लवी ने फेसबुक पर अपना अकाउंट बना रखा है। पल्लवी के पिता राकेश कुमार बिजनेस करते हैं। उनकी मां नेहा कुमार गृहणी हैं। बड़ी बहन ओडिशा से बीटेक का कोर्स कर रही है। छोटा पटना में ही छठी क्लास में पढ़ाई करता है।

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