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रांची(जीतेंद्र कुमार). आगाज से मिल जाता है अंजाम का आभास। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत से पंचम विधानसभा के कार्यकाल का अनुमान भी लगाया जाने लगा है। पक्ष हो या विपक्ष परोक्ष रूप से स्वीकारने लगा है कि विधायिका की गरिमा के ऊंचे मानदंड स्थापित करने की बात तो दूर, बचाये रखना भी शायद मुश्किल होगा। कारण स्पष्ट है स्पीकर अपने एक्ट से विपक्ष को भरोसे में नहीं ले पा रहे। दूसरी ओर विपक्षी सदस्य भी वेल में विरोध करने के बदले हुटिंग पर उतर आए हैं। इससे टकराव और तनाव दोनों बढ़ रहा है और इसका नुकसान विधायिका को होगा। सदस्यों का भी मानना है कि बजट सत्र है तो राज्य सरकार का वित्तीय वर्ष 2020-21 का बजट भी पास होगा। इसमें कहीं कोई किंतु-परंतु नहीं है। प्रश्नकाल बाधित होगा। यह भी नयी बात नहीं। लेकिन विरोध के क्रम में विपक्ष स्पीकर के आसन की गरिमा का ख्याल नहीं रख रहा है। यहां स्पीकर भी विपक्ष को संतुष्ट नहीं कर पा रहे। विपक्ष को विश्वास दिलाने की जरूरत है कि बाबूलाल मरांडी को लेकर उठे विवाद का कहां और कब हल होगा।
5वीं विधानसभा के 6दिन
पहला दिन: बाबूलाल के मुद्दे पर हंगामा
दूसरा दिन: स्पीकर की बातों का विपक्ष पर असर नहीं, हंगामा जारी
तीसरा दिन: हंगामे के बीच बगैर चर्चा के ही पास हुआ अनुपूरक बजट
चौथा दिन: स्पीकर के तेवर चढ़े-विपक्ष को चेताया सदन को मजाक न बनाएं
पांचवा दिन: प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष स्पीकर के सामने पीटते रहे टेबल
छठा दिन: जेपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग पर प्रदर्शन
असंतुष्टि... नेता प्रतिपक्ष के मामले पर विपक्ष का भरोसा नहीं जीत पा रहे विधानसभा अध्यक्ष
छोटी-छोटी बातें डालेंगी दूरगामी प्रभावविपक्षी दल के विधायकों का स्पीकर के टेबल के पास जाकर जानवर की आवाज निकालना। स्पीकर की बातों को नजरअंदाज कर असंसदीय ढंग से विरोध प्रदर्शन करना। छह मार्च को स्पीकर द्वारा बुलाये गए होली मिलन समारोह का बहिष्कार करना। इस तरह की बातें पक्ष-विपक्ष की खाई को लगातार बढ़ाती जा रही हैं।
बदला-बदला सा है आजसू का मिजाजसदन में इस बार आजसू पार्टी का मिजाज भी बदला-बदला दिख रहा है। एनडीए घटक दल के रूप में चिन्हित आजसू पार्टी के विधायक सदन में सरकार के विरोध में सीधा नहीं बोल रहे हैं। बजट अनुदान पर चर्चा में इसके विधायक लंबोदर महतो सरकार को सुझाव देने के साथ समस्या भी बता रहे हैं।
इन विधायकों पर सबकी रहती है नजर
सदन की कार्यवाही के दौरान कुछ विधायकों पर सबकी नजर रहती है। विपक्ष की ओर से रणधीर कुमार सिंह का आचरण कुछ अलग ही है। कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी अपने पूर्व के स्वभाव पर आगे-आगे ही चलते जा रहे हैं। हां विरंची नारायण, भानू प्रताप शाही का नया रूप पहली बार सदन में देखने को मिल रहा है। सरयू राय में बहुत अंतर नहीं है।
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