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जायजा / सुखाड़ का आकलन करने आई टीम से मिले मुख्यमंत्री, कहा- सूखा प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत मिले



केंद्रीय टीम के साथ मुलाकात करते मुख्यमंत्री। केंद्रीय टीम के साथ मुलाकात करते मुख्यमंत्री।
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केंद्रीय टीम के साथ मुलाकात करते मुख्यमंत्री।केंद्रीय टीम के साथ मुलाकात करते मुख्यमंत्री।

  • सूखे का आकलन करने आई केंद्रीय टीम को राज्य में सुखाड़ की विस्तृत जानकारी दी
  • सूखा राहत के लिए कुल 818.938 करोड़ की केंद्रीय सहायता की मांग 

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 05:21 PM IST

रांची.  मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सूखे का आकलन करने आई केंद्रीय टीम से मुलाकात की और कहा कि स्थल निरीक्षण कर वस्तुनिष्ठ तथ्यों तथा संपूर्णता में प्रभाव का आकलन कर जल्द से जल्द रिपोर्ट दें ताकि किसानों को समय पर राहत मिल सके। साथ ही उन्होंने मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को यह निर्देश दिया कि माइक्रो लेवल पर एडवांस प्लानिंग कर के सभी कार्य किए जाएं ताकि किसानों को अगली फसल में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो।

818.938 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता की अपेक्षा: मुख्य सचिव

  1. केंद्रीय कृषि विभाग के संयुक्त सचिव आतिश चंद्रा ने कहा कि राज्य सरकार के मेमोरेंडम बहुत समय पर प्राप्त हुआ है तथा मानकों के अनुरूप है। समग्रता में इसका आकलन कर जल्द से जल्द रिपोर्ट दी जाएगी। मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि 818.938 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता की अपेक्षा है जिससे किसानों को सहायता, अनुदान, पशु कैंपों में चारा, दवाई और पानी की व्यवस्था तथा फिस सीड फार्म को अनुदान दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त इस राशि से पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं जल संसाधन विभाग के द्वारा भी किसान हित में कार्य होंगे।

  2. सूखा प्रभावित किसान राहत की उम्मीद में: मुख्य सचिव

    केंद्रीय कृषि विभाग के संयुक्त सचिव आतिश चंद्रा के नेतृत्व में राज्य में सूखा प्रभावित इलाके का स्थल निरीक्षण करने आई अंतर मंत्रिमंडलीय टीम का स्वागत करते हुए मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि प्रभावित किसान राहत के लिए काफी उम्मीद से आपकी राह देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय टीम जांच के दौरान अपने अनुभव से उन पक्षों को भी हमारे सामने लाएए जो हमारे मेमोरेंडम में नहीं है, लेकिन जिसका उपचार आवश्यक हो। उन्होंने टीम से ऐसी सलाह देने का अनुरोध करते हुए सूखा प्रभावित किसानों के हित में सहयोग और मार्गदर्शन की अपेक्षा की। वहीं अधिकारियों ने केंद्रीय टीम को प्रेजेंटेशन के माध्यम से राज्य में सुखाड़ की विस्तृत जानकारी दी।

  3. गठन के 17 साल में 10 बार सुखाड़ की चपेट में झारखंड

    गृह सचिव एसकेजी रहाटे ने केंद्रीय टीम को बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 दिन देर से राज्य में आया। इसके कारण जून में 32.96 प्रतिशत कम बारिश हुई। इस कारण देर से और कम रोपनी हुई। वहीं अक्टूबर में वर्षा काफी कम होने से खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा। इससे राज्य के 18 जिलों के 129 प्रखंड बुरी तरह प्रभावित हुए। उन्होंने बताया कि राज्य गठन के 17 सालों में राज्य 10 बार सुखाड़ की चपेट में आ चुका है। सबसे खराब स्थिति 2015 में हुई थी। कम वर्षा के कारण पेयजल समस्या को देखते हुए तत्काल पेयजल व्यवस्था के लिए 100 करोड़ रुपए तथा अन्य राहत कार्यों के लिए प्रति प्रभावित जिला एक-एक करोड़ रुपए दिये जा चुके हैं। 

  4. कोडरमा, गिरिडीह, पलामू, गढ़वा, पाकुड़, गोड्डा और दुमका की सबसे खराब स्थिति

    कृषि सचिव पूजा सिंघल ने केंद्रीय टीम को बताया कि सबसे खराब स्थिति कोडरमा, गिरिडीह, पलामू, गढ़वा, पाकुड़, गोड्डा और दुमका जिले की है। उन्होंने कहा कि 18 जिलों के 129 प्रखंडों को सूखा प्रभावित घोषित करने के दौरान सूखा मैन्युअल 2016 की सभी प्रक्रिया को अपनाया गया है। स्थल सत्यापन के दौरान सूखा प्रभावित घोषित 129 में से 93 प्रखंड बुरी तरह प्रभावित और 36 मध्यम प्रभावित मिले हैं। उन्होंने बताया कि फौरी तौर पर सूखा प्रभावित जिलों में राहत के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए जा चुके हैं। 

  5. केंद्रीय टीम स्थल जांच के लिए रवाना

    केंद्रीय टीम तीन समूहों में बंटकर स्थल निरीक्षण के लिए पलामू, गढ़वा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा, कोडरमा और गिरिडीह के लिए रवाना हो गई। केंद्रीय कृषि विभाग के संयुक्त सचिव आतिश चंद्रा ने कहा कि टीम स्थल जांच के बाद अपने आकलन के अनुसार रिपोर्ट देगी कि कितनी वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि टीम निरीक्षण के दौरान किसानों तथा वहां के जनप्रतिनिधियों से भी चर्चा करेगी। स्थल निरीक्षण के बाद 9 दिसंबर को रांची लौट कर केंद्रीय टीम अपने आकलन और अनुभव को राज्य के अधिकारियों के साथ साझा करेगी।

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