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सीएम के निर्देश के बाद छात्रा को मुहैया कराई व्हीलचेयर; बीडीओ ने कहा- 50 किलो चावल और दो कंबल दिया, आयुष्मान कार्ड भी मिलेगा

एक वर्ष पहले
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ट्राइसाइकिल पर पायल व पास में मां के साथ छोटे भाई-बहन। - Dainik Bhaskar
ट्राइसाइकिल पर पायल व पास में मां के साथ छोटे भाई-बहन।
  • मुख्यमंत्री ने पायल की पीड़ा पर लिया संज्ञान, 6 फरवरी को दैनिक भास्कर में छपी थी खबर

गुमला. करमटोली निवासी सपना टोप्पो की नाबालिग बेटी पायल कुमारी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेेन के निर्देश पर प्रशासन की ओर से ट्राइसाइकिल मुहैया कराया गया है। शनिवार को बीडीओ और सीओ पायर के घर पहुंचे और ट्राइसाइकिल के साथ 50 किलो चावल, दो कंबल दिया। साथ ही भरोसा दिलाया कि जल्द ही डॉक्टरों की टीम उनके घर पहुंचकर पायल की जांच करेगी और आयुष्मान कार्ड भी दिया जाएगा। बता दें कि दैनिक भास्कर में छह फरवरी को 'गरीबी का दंश ऐसा कि बिस्तर पर कैद होकर रह गई नाबालिग पायल, लगाई मदद की गुहार' शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। 

छह साल से बिस्तर पर कैद है पायल
सपना टोप्पो की 15 वर्षीय नाबालिग बेटी पायल कुमारी की जिंदगी विगत 6 वर्षों से बिस्तर में कैद होकर रह गई है। पायल जब छठी कक्षा में थी, तभी उसकी जिंदगी में अचानक कई ऐसे मोड़ आये जो उसका जीना मुहाल कर दिया। 6 साल पहले एक हादसे में उसके पिता की मिट्टी में दबने से मौत हो गई। पिता की मौत के बाद जहां वे मजदूरी कर रहे थे उस परिवार द्वारा जान की कीमत महज 5 हजार रुपये लगाई गई। वहीं पिता की मौत के सदमे से परिवार उबरा भी नहीं था कि कुछ दिन बाद अचानक स्वयं पैदल चलकर स्कूल जाने वाली पायल का दोनों पैर काम करना बंद कर दिया। इसके बाद तो पायल की उड़ान भरने वाले पंख पर ही विराम लग गया। वह पढ़ लिखकर परिवार के लिए कुछ करने का जज्बा पाल रखी थी। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। वह चाह कर भी स्कूल नहीं जा पाई। 


समय के साथ उसे बेहतर इलाज की जरूरत थी। मगर पिता का साया उठने के बाद परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा। किसी तरह उसकी मां ने एक दिन पायल को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया। जहां डॉक्टरों ने उसे हमेशा के लिए विकलांग हो जाने व किसी बड़े अस्पतालों में बेहतर इलाज कराने की बात कही। इस परामर्श के बाद पायल व उसकी मां की हिम्मत ही टूट गई।आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण पायल का बेहतर इलाज नहीं कराया जा सका।आज भी पायल को इलाज के लिए किसी फरिश्ते का इंतजार था। ताकि वह अपने पैरों पर खड़ा होकर अपने हौसलों का उड़ान भर सके।

मजदूरी कर मां कर रही परवरिश
मां सपना टोप्पो ने कहा था कि उसकी चार बेटे बेटियां हैं। वह दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह बच्चों की परवरिश कर रही है। पढ़ा भी रही है। उनका अपना मकान भी नहीं है। वह किराए में रहती है। पति की मौत के बाद आर्थिक तंगी के कारण बेटी का इलाज नहीं करा पाए। कोई मदद के लिए आगे आये तो बेटी का किसी बड़े अस्पताल में इलाज कराया जा सकता है।

जब स्कूल जाती थी, तो काफी खुश रहती थी पायल
पायल ने कहा था कि जब वह स्कूल जाती थी,तो काफी खुश रहती थी।पर एक दिन अचानक सबकुछ बदल गया।सर से पिता का साया उठ गया। इसके बाद अचानक वह भी दोनों पैर से विकलांग हो गई। पायल ने कहा था कि अगर जीते जी सरकार व प्रशासन मदद करे तो उसे उम्मीद है,वह चल फिर सकती है।