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रांची(बिनाेद ओझा). कांग्रेस के 18 में से 17 विधायकाें ने राज्यसभा चुनाव में पूर्व सांसद व अल्पसंख्यक नेता फुरकान अंसारी काे टिकट देने की अनुशंसा की थी। इस संबंध में विधायक विक्सल काेंगाड़ी ने पार्टी अध्यक्ष साेनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी काे चार मार्च काे पत्र लिखा था। इस पर प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. रामेश्वर उरांव, विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, बंधु तिर्की व प्रदीप यादव सहित सभी विधायकाें के हस्ताक्षर हैं। सिर्फ दीपिका पांडेय का हस्ताक्षर नहीं है, क्याेंकि वह विदेश में हैं। इसके बावजूद केंद्रीय नेतृत्व ने शहजादा अनवर काे प्रत्याशी घाेषित कर दिया।
4 सवालाें से समझिए... क्या झारखंड में भी मचेगी उठापटक?
1. राज्यसभा चुनाव काे लेकर कांग्रेस में बवाल से काेई नया खेल हाेगा?
सरकार गिराने या दलबदल की संभावना कम है। लंबे समय के बाद कांग्रेस सरकार में आई है। काेई इसे खाेना नहीं चाहता। काेई सामने आकर विराेध नहीं करेगा। कांग्रेस या सरकार, किसी की सेहत पर असर की संभावना नहीं है।
2. क्या झारखंड में भी मध्यप्रदेश जैसे राजनीतिक हालात बन सकते हैं?
इसकी आशंका नहीं है। सरकार में झामुमाे के 29, कांग्रेस के 18, राजद के एक विधायक सहित कुल 51 विधायकाें का समर्थन है। बहुमत का आंकड़ा 41 है। भाजपा के पास 26 व आजसू के दाे विधायक हैं। भाजपा काे सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के कम से कम 12 विधायक और एक अन्य के समर्थन की जरूरत हाेगी। इतने विधायकाें का टूटना मुश्किल है।
3. कांग्रेस का अंदरूनी विवाद किस मुकाम तक पहुंच सकता है?
कांग्रेस में अंदरूनी कलह है। विधायक इरफान अंसारी ने ताे प्रदेश प्रभारी काे ही चुनाैती दे डाली है। उन्हें कई असंतुष्ट विधायकाें का समर्थन है। लेकिन वे खुलकर सामने आएंगे, इसकी उम्मीद कम है। पर राज्यसभा चुनाव में क्राॅस वाेटिंग से इनकार नहीं किया जा सकता।
4. झारखंड में सियासत काेई नया माेड़ लेगी?
मध्यप्रदेश की घटना के बाद झामुमाे व कांग्रेस अपने विधायकाें और भाजपा की गतिविधियाें पर नजर रखे है। इसलिए कुछ विशेष बदलाव की उम्मीद नहीं है।
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