कोडरमा / सेवानिवृत शिक्षक सहित चार लोगों की हत्या के दो दोषियों को फांसी की सजा

फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस हिरासत में कोर्ट से बाहर निकलते दोषी। फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस हिरासत में कोर्ट से बाहर निकलते दोषी।
X
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस हिरासत में कोर्ट से बाहर निकलते दोषी।फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस हिरासत में कोर्ट से बाहर निकलते दोषी।

  • जिला जज चतुर्थ विश्वनाथ शुक्ला की अदालत ने सुनाया फैसला 
  • मुख्य आरोपी को पूर्व में ही सुनाई जा चुकी है आजीवन कारावास की सजा
  • सीआईडी जांच के बाद आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी

दैनिक भास्कर

Feb 19, 2020, 06:52 PM IST

कोडरमा. सतगांवा के डुमरी में सेवानिवृत शिक्षक कपिलदेव प्रसाद यादव सहित चार लोगों की हत्या के मामले में बुधवार को कोर्ट ने दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। जिला जज चतुर्थ विश्वनाथ शुक्ला की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। जिले में किसी मामले में फांसी की सजा सुनाए जाने का यह पहला मामला है। जिन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है उनमें सतगांवा के डुमरी गांव निवासी रामवृक्ष यादव और सतगांव के खाब गांव निवासी संजय प्रसाद यादव शामिल है। 

सितंबर 2004 का है मामला
25 सितंबर 2004 को शाम करीब 7:30 बजे जब शिक्षक कपिलदेव प्रसाद यादव अपने घर की छत पर बैठ कर समाचार सुन रहे थे, उसी समय 20-25 की संख्या में अपराधियों ने उनके घर पर हमला कर दिया था। हमले में कपिलदेव प्रसाद यादव, उनके पुत्र नीरज यादव, पौत्र अनोज कुमार व रिश्तेदार सकलदेव कुमार की हत्या कर दी गई। उनके सिर को धड़ से अलग कर दिया गया था। घटना के वक्त शिक्षक के पुत्र सुरेश कुमार ने किसी तरह छत से कूद कर अपनी जान बचाई थी। 

हत्या के बाद एमसीसी जिंदाबाद का नारा लगाते निकले थे दोषी
मामले में सुरेश कुमार के लिखित आवेदन पर सतगावां थाना में एफआईआर दर्ज किया गया था। घटना को अंजाम देने के बाद सभी अभियुक्त एमसीसी जिंदाबाद के नारे लगाते हुए निकल गए थे। मामले में 16 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था। सरकार के निर्देश पर मामले की हुई सीआईडी जांच में आठ लोगों को बरी कर दिया गया था। वहीं 8 लोगों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इस मामले के मुख्य अभियुक्त सुनील यादव एमसीसीआई एरिया कमांडर को पूर्व में कोडरमा न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। वर्तमान में वह जमानत पर है। 

वहीं मामले के एक अभियुक्त दारोगी प्रसाद यादव की मामले की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। जबकि रंजीत यादव, विपिन यादव, नवलेश यादव व राजेश प्रसाद यादव फरार चल रहे हैं। अभियुक्त रामवृक्ष यादव व संजय यादव के खिलाफ 13 दिसंबर 2016 को न्यायालय में आरोप पत्र गठित किया गया था। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक विनोद प्रसाद ने 11 गवाहों का परीक्षण कराया, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता वासिफ बख्तावर खान ने दलीलें रखी। इस घटना में मनोज यादव, महेश कुमार, सरस्वती देवी, दयानंद प्रसाद यादव व सुरेश कुमार घटना के प्रत्यक्षदर्शी गवाह थे। गवाहों के बयान व अभिलेख पर उपस्थित साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने मामले को जघन्य हत्या की श्रेणी में मानते हुए फांसी की सजा सुनायी। 

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना