विस चुनाव / इन 10 सीटों पर झारखंड की नजर; सीएम, पूर्व सीएम, मंत्री, स्पीकर समेत एक परिवार की दो बहू मैदान में



Jharkhand Election 2019 Hot Seat: Jamshedpur BJP Raghubar Das, Saryu Rai, Congress Gaurav Vallabh
X
Jharkhand Election 2019 Hot Seat: Jamshedpur BJP Raghubar Das, Saryu Rai, Congress Gaurav Vallabh

  • जमशेदपुर पूर्वी सीट पर सीएम रघुवर दास के खिलाफ उनके मंत्री रहे सरयू ने किया नामांकन
  • तमाड़ विधानसभा सीट पर पूर्व नक्सली, पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक लड़ रहे हैं चुनाव
  • 03 दिसंबर तक होना है आखिरी चरण के चुनाव का नामांकन, सभी दल अपनी ज्यादातर सीटें कर चुके हैं घोषित

Dainik Bhaskar

Nov 20, 2019, 04:30 PM IST

रांची (गुप्तेश्वर कुमार). झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 दिसंबर को आ जाएंगे। 81 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 10 सीटें ऐसी हैं, जिस पर पूरे झारखंड की निगाह रहेगी। इन सीटों में मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा स्पीकर समेत एक परिवार की दो बहू, पूर्व नक्सली व पूर्व मंत्री ताल ठोंक रहे हैं। झारखंड विधानसभा चुनाव में अभी तीसरे चरण के वोटिंग के नामांकन चल रहे हैं। पांचवे चरण के चुनाव के लिए 03 दिसंबर तक नामांकन होंगे।

 

सभी राजनीतिक दलों की ज्यादातर सीटों पर प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। इससे जो तस्वीर उभर के सामने आई है, उसमें राज्य की सबसे हॉट सीट जमशेदपुर पूर्वी है। यहां सीएम रघुवर दास के खिलाफ उनकी सरकार में मंत्री रहे सरयू राय निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर खड़े हो गए हैं। वहीं, कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ को मैदान में उतारा है।

 

जमशेदपुर पूर्वी
यहां से भाजपा ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को अपना प्रत्याशी बनाया है। 2014 विधानसभा चुनाव में भी रघुवर दास ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था। बिहार से झारखंड के अलग होने के बाद हुए 3 विधानसभा चुनाव में रघुवर दास ने इसी सीट पर भाग्य आजमाया और उन्हें तीनों ही बार जीत मिली है। यह सीट अब और भी चर्चित हो गया है। क्योंकि, भाजपा से टिकट कटने के बाद भाजपा सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री रहे सरयू राय निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। वहीं, इसी सीट पर कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर गौरव वल्लभ को मैदान में उतारा है।

 

सिल्ली
झारखंड के पहले गृह मंत्री और पूर्व उपमुख्यमंत्री व आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो इस बार भी सिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका सीधा मुकाबला झामुमो प्रत्याशी सीमा महतो से है। 2005 व 2009 के विस चुनाव में सुदेश महतो ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। 2014 में सुदेश झामुमो प्रत्याशी अमित महतो से हार गए थे। मई, 2018 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में भी सुदेश महतो को झामुमो प्रत्याशी सीमा महतो ने हराया था। सीमा महतो, पूर्व विधायक अमित महतो की पत्नी है।

 

तमाड़
तमाड़ सीट से विधायक रहे पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा के हत्यारोपी नक्सली कुंदन पाहन के साथ ही हत्या की सुपारी देने के आरोपी पूर्व मंत्री राजा पीटर यहां से आमने-सामने हैं। रमेश सिंह मुंडा के पुत्र और निवर्तमान विधायक विकास सिंह मुंडा झामुमो के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। 2005 में विकास सिंह मुंडा के पिता रमेश सिंह मुंडा ने जदयू के टिकट पर इस सीट से चुनाव जीता था। 2009 में रमेश सिंह मुंडा के पुत्र विकास मुंडा जदयू प्रत्याशी गोपाल कृष्णा पातर से हार गए थे। 2014 में आजसू के टिकट पर विकास सिंह मुंडा ने यहां जीत दर्ज की थी।

 

लोहरदगा
यह सीट तीन कारणों से हॉट बनी है। कांग्रेस विधायक सुखदेव भगत इस बार भाजपा के टिकट पर यहां चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव भी उन्हें टक्कर देने के लिए चुनाव मैदान हैं। आजसू से भाजपा की इस सीट को लेकर हुई टूट के बाद उसने इस सीट पर पूर्व विधायक कमल किशोर भगत की पत्नी नीरू शांति भगत को प्रत्याशी घोषित कर दिया। 2005 के विस चुनाव में कांग्रेस से सुखदेव भगत ने यहां जीत दर्ज की थी। 2009 व 2014 में आजसू प्रत्याशी कमल किशोर भगत यहां से जीते थे। जबकि 2015 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सुखदेव भगत यहां से विधायक चुने गए थे।

 

झरिया
झरिया विधानसभा सीट पर एक बार फिर एक ही परिवार के बीच चुनावी दंगल होगा। 2014 विधानसभा चुनाव में संजीव सिंह भाजपा की टिकट पर खड़े थे और कांग्रेस ने यहां से उनके चचेरे भाई नीरज सिंह को मैदान में उतारा था। नीरज सिंह की हत्या हो चुकी है और इसी मामले में संजीव सिंह जेल में हैं। भाजपा ने संजीव की पत्नी रागिनी सिंह को और कांग्रेस ने स्वर्गीय नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह को उम्मीदवार बनाया है। अब यहां एक ही परिवार की दो बहू आमने-सामने हैं, जिससे झरिया सीट पर मुकाबला कांटे का हो गया है।

 

बहरागोड़ा
2014 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के टिकट पर विधायक बने कृणाल षाडंगी अब इस सीट से भाजपा प्रत्याशी हैं। झामुमो से समीर मोहंती मैदान में हैं। दो विधानसभा चुनाव से बहरगोड़ा सीट झामुमो के कब्जे में रही है। 2009 झामुमो के विद्युत वरण महतो ने भाजपा प्रत्याशी डॉ. दिनेश कुमार षाड़ंगी को हराया था। 2014 में दिनेश षाड़ंगी के बेटे कुणाल ने झामुमो के टिकट पर भाजपा प्रत्याशी डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी को हराया था। अब कुणाल भाजपा में हैं।

 

चंदनकियारी
रघुवर सरकार के मंत्री अमर कुमार बाउरी भाजपा प्रत्याशी हैं। इन्होंने 2014 में झाविमो को छोड़ भाजपा ज्वाइन की थी। यह सीट इसलिए भी ज्यादा चर्चा में हैं क्योंकि भाजपा-आजसू में टूट के कारणों में यह सीट भी शामिल है। भाजपा इस सीट पर अपना प्रत्याशी उतारना चाहती थी, जबकि आजसू ने भी इसकी मांग की थी। बात नहीं बनी और अब भाजपा के अमर के खिलाफ आजसू ने उमाकांत रजक उतारा है। झारखंड में अब तक हुए तीन विस चुनाव में कभी भी भाजपा यहां खाता नहीं खोल सकी है।

 

धनवार
झारखंड के पहले मुख्यमंत्री व झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी धनवार विस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। 2014 में बाबूलाल मरांडी ने गिरिडीह व धनवार दोनों ही सीट से भाग्य आजमाया था पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। धनवार से 2005 के विस चुनाव में भाजपा की जीत हुई थी। 2009 में यहां से झाविमो ने जीत दर्ज की और 2014 में सीपीआई प्रत्याशी यहां से विधायक बने थे।

 

दुमका
समाज कल्याण मंत्री डॉ. लुईस मरांडी के भाजपा के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ने की वजह से यह सीट काफी चर्चित हो गई है। इस सीट से 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी चुनाव लड़ा था पर वो कामयाब नहीं हो सके थे। 2009 के चुनाव में डॉ. लुईस मरांडी दूसरे नंबर पर थीं, जबकि हेमंत सोरेन ने यहां जीत दर्ज की था।

 

सिसई
इस सीट पर विधानसभा अध्यक्ष प्रो. दिनेश उरांव भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। उनका सीधा मुकाबला झामुमो प्रत्याशी जिग्गा सुसारन होरो से है। 2014 विस चुनाव में दिनेश उरांव ने जिग्गा सुसारन होरो को 2 हजार 593 मतों से पराजित किया था। इस सीट पर 2005 विस चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी की जीत हो चुकी है।

 

DBApp

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना