ग्राउंड रिपोर्ट / विश्रामपुर: स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र की सेहत खराब सिंचाई, बेरोजगारी पर होगा महासंग्राम

हर चौक-चौराहों पर सिर्फ एक सवाल अबकी बारी किसकी पारी? वजह...हर चुनाव में वोटर बारी-बारी से बदल देते हैं नुमाइंदे

विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र में कुटमु रोड से सतबहिनी तक की सड़क बेहाल है। मानसून की बारिश के बाद भी सड़क तालाब में तब्दील है और ग्रामीणों की मश्किलें बढ़ गई हैं। विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र में कुटमु रोड से सतबहिनी तक की सड़क बेहाल है। मानसून की बारिश के बाद भी सड़क तालाब में तब्दील है और ग्रामीणों की मश्किलें बढ़ गई हैं।
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विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र में कुटमु रोड से सतबहिनी तक की सड़क बेहाल है। मानसून की बारिश के बाद भी सड़क तालाब में तब्दील है और ग्रामीणों की मश्किलें बढ़ गई हैं।विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र में कुटमु रोड से सतबहिनी तक की सड़क बेहाल है। मानसून की बारिश के बाद भी सड़क तालाब में तब्दील है और ग्रामीणों की मश्किलें बढ़ गई हैं।

Dainik Bhaskar

Nov 06, 2019, 02:37 AM IST

विश्रामपुर (राणा अरुण सिंह). पलामू प्रमंडल की हॉट सीटों में है विश्रामपुर। इस विधानसभा चुनाव में यहां पहले चरण में ही 30 नवंबर को वोटिंग होगी। इस सीट पर हर चुनावी फैसले चौंकाने वाले होते हैं। जनता बारी-बारी से अपना नुमाइंदा बदलती है।

 

झारखंड गठन के बाद हुए पिछले तीन चुनाव पर गौर करें तो 2005 में स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी (वर्तमान) ने राजद के टिकट पर कांग्रेस के अजय दुबे को हराया था। 2009 के चुनाव में अजय दुबे के पिता व कांग्रेस नेता चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे ने रामचंद्र चंद्रवंशी को हराया। 2014 में चंद्रवंशी राजद छोड़कर भाजपा के प्रत्याशी थे और उन्होंंने जीत हासिल की थी। ऐसे में अभी चौक-चौराहों पर बस एक सवाल है- अबकी बारी किसकी पारी?


विश्रामपुर के मझिआंव, कांडी, बरडीहा, पांडू, रेहला, ब्रह्ममुड़िया आदि जगहों पर वोटरों से बात करने पर फिलहाल यह तस्वीर उभरती है कि स्वास्थ्य मंत्री चंद्रवंशी के विधानसभा क्षेत्र की सेहत खराब है। इस बार सड़क, सिंचाई, बिजली और बेरोजगारी पर चुनावी महासंग्राम होगा। मझिआंव में सिंचाई सबसे बड़ा मुद्दा है। कांडी के वोटर सड़क-बिजली और बेरोजगारी को सबसे बड़ी समस्या बताते हैं।

 

पांडू, रेहला और ब्रह्ममुड़िया में सिंचाई और बेराजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। इन मुद्दों पर कांग्रेस नेता अजय दुबे वर्तमान विधायक को घेरने में लगे हैं। 2014 चुनाव में अजय दुबे तीसरे स्थान पर थे। हालांकि, उन्हें कांग्रेस में ही कभी साथ रहे अमृत शुक्ला से चुनाैती मिल रही है। इस चुनाव में शुक्ला भी ताल ठोक रहे हैं। पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी अंजू सिंह ने चंद्रवंशी को टक्कर दी थी। वह 24 हजार से ज्यादा वोट लाकर दूसरे स्थान पर थीं। हार के बावजूद वह पांच साल तक सक्रिय रही और इस चुनाव में भी लड़ने की तैयारी है। उन्हें नरेश सिंह से चुनाैती मिल रही है। नरेश सिंह उनके ही गांव के रहने वाले हैं।

 

चुनावी मुद्दा: सबसे बड़ा फैक्टर क्या होगा

 

  • सड़क-सिंचाई : ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें जर्जर हैं। ओबरा के पास बांकी नदी पर पुल नहीं बना। पिछली बार मोहम्मदंगज बराज के लेफ्ट कैनाल से सुंडीपुर तक पानी पहुंचा था। इस बार कौरव जलाशय योजना मुद्दा बनेगी। इससे 3 हजार एकड़ जमीन सिंचित होती व पांडू-नावा के किसानों को लाभ होता।
  • बिजली-बेरोजगारी : ग्रामीण इलाकों में अनियमित बिजली तो शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। स्थानीय लोगाें के मुताबिक, एक बार बिजली कट गई तो घंटों नहीं आती। वहीं, रोजगार नहीं मिलने से युवकों को काम की तलाश में छत्तीसगढ़, कोलकाता, मुंबई जाना पड़ता है।
  • स्वास्थ्य : नीम-हकीम के कारण यहां की जनता परेशान है। स्वास्थ्य मंत्री ने क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो खुलवाए, पर वहां डॉक्टर नहीं बैठते। मेदिनीनगर में मेडिकल कॉलेज चालू हुआ, लेकिन डॉक्टर और संसाधन नहीं हैं। विडंबना है कि स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र की सेहत खराब है।
  • गठबंधन : 2014 चुनाव में भाजपा के रामचंद्र चंद्रवंशी को 22.70% (37861) वोट मिले थे। कांग्रेस, झामुमो और झाविमो ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। कांग्रेस को 22417, झाविमो को 13709 और झामुमो को 9741 वोट मिले थे। इस बार गठबंधन की कोशिशें हो रही हैं।

 

3 चुनावों का सक्सेस रेट

  • 2014 : रामचंद्र चंद्रवंशी, भाजपा-37974, अंजू सिंह, निर्दलीय-24064, अजय कुमार दुबे, कांग्रेस- 22417
  • 2009 : चंद्रशेखर दुबे, कांग्रेस-25609, रामचंद्र चंद्रवंशी, राजद-17257, युगल पाल, झामुमो-16102
  • 2005 : रामचंद्र चंद्रवंशी, राजद-40658, अजय कुमार दुबे-22046, कृष्ण कुमार मिश्र, भाजपा-15313

 

वोटरों के बोल

 

गांव की सड़कें बदहाल हैं। बिजली के पोल व तार तो लग गए, लेकिन बिजली नहीं आई। हर बार क्षेत्र में विकास के नाम पर नेता छलावा करते हैं। इस चुनाव में ऐसे को समर्थन देंगे, जिनमें क्षमता हो। -वासुदेव सिंह, रिटायर शिक्षक, खरौंधा

सबसे बड़ा काम विश्रामपुर क्षेत्र में उग्रवाद पर नियंत्रण हुआ है। पुल और पुलिया भी बने हैं। सरकारी योजनाओं का फायदा वर्तमान विधायक को हो सकता है। -रवींद्र उपाध्याय, मुखिया, बधमनवा

2014 में पेयजल व सिंचाई पर किया वादा पूरा नहीं हुआ। बिजली और बेरोजगारी भी बड़ा मुद्दा है। विश्रामपुर के वोटरों को इसका मलाल है। जनता इस बार चुनाव पूर्व किए गए वायदों का हिसाब लेगी। -शालिक पांडेय, शिक्षक, मझिआंव

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