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बुरूडीह डैम से रिसकर बहने वाले पानी से किसान साल में 2 बार करते हैं धान की खेती

6 महीने पहले
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गर्मा धान की रोपनी के लिए चारा उखाड़ती महिलाएं।
  • बुरूडीह डैम कैचमेंट एरिया में पानी स्टाेर करने की सही व्यवस्था नहीं

घाटशिला (पंकज कुमार सिंह). बुरूडीह डैम से सालाें भर रिस कर बेवजह बहने वाले पानी का आसपास गांव के किसान सदुपयाेग कर खेताें में वर्ष में दाे बार धान की खेती करते हैं। डैम के आसपास करीब 30-40 हेक्टेयर में जेठ माह की गर्मी में भी खेत हरे-भरे और धान की फसल से लहलहाते हैं। डैम के दक्षिणी छाेर से सालाें भर पानी रिस कर बहता रहता है। इसी पानी काे किसान सदुपयोग कर धान की खेती करते हैं। बारिश के दिनाें में धनकटनी करने तक काफी मात्रा में पानी जमा रहता है। किसानों को तैयार धान को काटने के लिए खेत की मेढ़ को काटकर पानी बाहर निकालना पड़ता है।


धान काटने के बाद पुन: खेताें में गर्मा धान खेती के लिए बिचड़ा डाला जाता है। बुरूडीह डैम के दाे आउटलेट सिंचाई नाला विभाग द्वारा बनाया गया है। लेकिन बुरूडीह डैम में बारिश के दिनाें में भी डैम में पानी स्टाेर करने की सही व्यवस्था नहीं रहने के कारण काफी मात्रा में पानी बेवजह बह कर बर्बाद हाे जाता है। विभाग द्वारा डैम में पानी का स्टाॅक बढ़ाने के लिए इसे चांडिल डैम की नहर से पानी देने की याेजना तैयार किया जाना आवश्यक है।


इसके अलावा डैम से रिसकर बहने वाले पानी और दाेनाें आउट लेट से बेवजह पानी की बर्बादी राेक कर किसानाें काे क्षेत्र में गर्मा धान की खेती के लिए उपयुक्त मात्रा में पानी दिया जा सकता है। इससे बुरूडीह, रामचंद्रपुर, हीरागंज, बांधडीह, कालचिती, धाेबनी समेत कई गांवों में खेती के लिए अावश्यक मात्रा में पानी खेताें काे पहुंचाया जा सकता है।

क्या कहती हैं जिप सदस्य
घाटशिला की जिला परिषद सदस्य देवयानी मुर्मू ने कहा कि बुरूडीह डैम क्षेत्र पर्यटन स्थल है। विभाग द्वारा इसे मल्टीपर्पज डैम बनाने की याेजना की जरूरत है। इसे विकसित करने के लिए डैम में पानी का स्टाॅक बढ़ाकर क्षेत्र में हर खेत तक सालाें भर पानी देने की जरूरत है। इसके अलावा डैम पर निर्भर लाेगाें के राेजगार में वृद्धि के लिए डैम में केज फिसिंग, स्पीड बाेटिंग, राेपवे अाैर एक खूबसूरत पार्क का निर्माण किया जाना जरूरी है। लेकिन यह तभी हाेगा जब विभाग इसकी याेजना बनाए और सरकार याेजनाओं काे पूरा करने के लिए अावश्यक फंड उपलब्ध कराएगी।

कालचिती पंचायत के कई गांव डैम पर निर्भर : मुखिया
कालचिती पंचायत की मुखिया साेमवारी साेरेन ने कहा कि कालचिती पंचायत के अधिकांश गांव डैम पर निर्भर हैं। पंचायत कृषि प्रधान क्षेत्र रहने के बाद भी सरकार द्वारा हर किसान के खेताें तक सालाें भर पानी पहुंचाने की दिशा में काेई पहल नहीं की गई है। अगर बुरूडीह डैम काे विकसित किया जाए ताे राेजगार के साधन में वृद्धि के साथ खेताें काे सही स्तर पर पानी मिलने लगेगा।

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