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असंतोष / भितरघात की आशंका...इसलिए टिकट न मिलने वाले असंतुष्टों पर बीजेपी की नजर

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 12:03 PM IST


jharkhand lok sabha elections 2019 bjp eyes unhappy leaders
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jharkhand lok sabha elections 2019 bjp eyes unhappy leaders
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  • खूंटी, कोडरमा, गोड्डा, चतरा, पलामू, गिरिडीह पर बड़े नेताओं का फोकस 

रांची. झारखंड में टिकट बंटवारे के बाद भाजपा भितरघातियों पर पैनी नजर रख रही है। पार्टी के असंतुष्ट नेता पदाधिकारियों के रडार पर भी हैं। खूंटी, कोडरमा, गोड्डा, चतरा, पलामू और जमशेदपुर एेसी सीटें हैं, जहां टिकट न मिलने से असंतोष है और भितरघात की अाशंका जताई जा रही है। इसके पीछे का कारण यह बताया जा रहा है कि 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी एक-एक सीट के लिए संघर्ष कर रही है। जहां भाजपा की वर्तमान सीटें हैं, उसे किसी कीमत पर खोना नहीं चाहती, इसलिए बड़े नेता अभी से डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं।

झारखंड सरकार में मंत्री के भाई कांग्रेस के टिकट पर खूंटी से लड़ रहे चुनाव

  1. खूंटी में राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के भाई कालीचरण मुंडा कांग्रेस के टिकट पर भाजपा प्रत्याशी अर्जुन मुंडा के विरोध में खड़े हैं। नीलकंठ सिंह मुंडा और कांग्रेस उम्मीदवार कालीचरण मुंडा के बीच बेहतर संबंध है। 2014 में कालीचरण मुंडा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उस समय कड़िया मुंडा भाजपा प्रत्याशी थे। कालीचरण के प्रति नीलकंठ का झुकाव के कारण कड़िया मुंडा और नीलकंठ के संबंधों में कड़वाहट अाई थी। 

  2. जमशेदपुर पर रिस्क नहीं लेगी पार्टी

    झाविमो छोड़ भाजपा में शामिल हुए प्रणव वर्मा की भूमिका पर नजर है। जमशेदपुर संसदीय सीट तीन दिग्गजों की कर्मस्थली है। मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय यहीं से जुड़े हैं। इसलिए यहां भाजपा किसी तरह का रिस्क लेना नहीं चाहती। 

  3. बदले समीकरण में भाजपा की निगहबानी

    चुनाव जीतने के बाद कड़िया मुंडा ने सारी बातें भुला दी। इस कारण नीलकंठ पर पैनी नजर है। कोडरमा में रवींद्र कुमार राय और गिरिडीह में रवींद्र कुमार पांडेय का टिकट कटने के कारण दोनों असंतुष्ट हैं। गोड्डा में भी यही स्थिति बताई जा रही है। इस वजह से पालिवार की भूमिका को पार्टी देख रही है। पलामू में विधायक सत्येंद्र तिवारी, मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के अलावा कई अन्य नेताओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है। गिरिनाथ सिंह के राजद छोड़ भाजपा में अाने के बाद बदले सियासी समीकरण को केंद्र में रखकर देखा जा रहा है। चतरा में भाजपा को सबसे अधिक अपनों से ही खतरा है। भाजपा के चतरा में प्रभावी नेता रहे राजेंद्र साहू के निर्दलीय खड़ा होने के पीछे कारण क्या है, इसे तलाशा जा रहा है। 

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