सक्सेस फैक्टर / 3 चुनावों में 36 सीटों पर जीत का मार्जिन 2% से भी कम, भाजपा-झामुमो को मिली थीं 11-11 सीटें, कांग्रेस को 5



हटिया से भाजपा के रामजी लाल सारडा के नाम सबसे छोटी हार का रिकॉर्ड दर्ज है। वह 0.02% के अंतर से हार गए थे। हटिया से भाजपा के रामजी लाल सारडा के नाम सबसे छोटी हार का रिकॉर्ड दर्ज है। वह 0.02% के अंतर से हार गए थे।
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हटिया से भाजपा के रामजी लाल सारडा के नाम सबसे छोटी हार का रिकॉर्ड दर्ज है। वह 0.02% के अंतर से हार गए थे।हटिया से भाजपा के रामजी लाल सारडा के नाम सबसे छोटी हार का रिकॉर्ड दर्ज है। वह 0.02% के अंतर से हार गए थे।

  • 3% से कम वोटों से भाजपा ने विधानसभा चुनावों में 18 सीटें जीतीं, झामुमो से 5 व कांग्रेस से दोगुना ज्यादा
  • 2009 व 2005 के चुनाव में झामुमो ने 8, भाजपा ने 7 सीटें 2% से कम मार्जिन से जीती

Dainik Bhaskar

Nov 06, 2019, 02:28 AM IST

रांची (राकेश परिहार). झारखंड में अबतक हुए तीन विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों के बीच रोचक मुकाबले होते रहे हैं। जीत-हार का अंतर कम रहा है। भाजपा और झामुमो ने बीते तीन चुनावों की 36 सीटों में 11-11 पर ऐसी जीत हासिल की थी, जहां मार्जिन 2% से भी कम था। कांग्रेस ने 5 और अन्य दलों ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी।


2014 में 12 सीटों पर प्रत्याशियों की जीत का मार्जिन 2% से भी कम रहा। इनमें भाजपा ने चार सीटें, झामुमो ने तीन, कांग्रेस ने एक और अन्य दलों ने चार सीटें जीती थीं। इसी तरह 2009 में 11 सीटों पर जीत की मार्जिन 2% से भी कम वोटों पर थीं। जबकि झारखंड विधानसभा के लिए हुए पहले चुनाव में 2005 में 9 सीटाें पर जीत-हार का अंतर 2%से कम वोटों से था। अब तक हुए चुनावों में 1% से कम अंतर की जीत का रिकॉर्ड भी भाजपा के नाम है। भाजपा के खाते में ऐसी 9 सीटें गईं। 7 सीटों के साथ झामुमो दूसरे नंबर पर रहा, जबकि  कांग्रेस ने 3 और अन्य दलों ने 5 सीटें जीतीं।

 

2014 में 8 सीटों पर 1% के अंदर फैसला
तोरपा-पोलुस सुरीन, झामुमो-0.04%, राजमहल- अनंत कुमार ओझा, भाजपा-0.36%, लोहरदगा- कमल किशोर भगत, आजसू-0.41%, बोरियो-ताला मरांडी, भाजपा-0.46%, निरसा-अरूप चटर्जी, एमसीओ-0.52%, सरायकेला-चंपई सोरेन, झामुमो-0.54%, राजकिशोर महतो,आजसू -0.65%, मनिका-हरिकृष्ण सिंह,भाजपा-0.88%।

 

2009 में 11 सीटों पर 1% के अंदर हार-जीत का निर्णय
हटिया- गोपाल शाहदेव, कांग्रेस-0.02%, चक्रधरपुर-लक्ष्मण गिलुवा, भाजपा-0.30%, लातेहार- वैद्यनाथ राम, भाजपा-0.42%, खूंटी-नीलकंठ सिंह मुंडा, भाजपा-0.46%, लोहरदगा-कमल किशोर भगत, आजसू-0.52% धनबाद-मन्नान मलिक, कांग्रेस-0.56%, टुंडी- मथुरा महतो, झामुमो- 0.68%, बड़कागांव-योगेंद्र साव, कांग्रेस-0.91%, शिकारीपाड़ा-नलिन सोरेन, झामुमो-0.93%, घाटशिला- रामदास सोरेन, झामुमो-0.94%,सिमडेगा- विमला प्रधान, भाजपा-0.96%।

 

2005 में 5 सीटों पर 1% के अंदर जीत
हुसैनाबाद-कमलेश कु. सिंह, एनसीपी)-0.03%, सरायकेला-चंपई सोरेन, झामुमो-0.59%, बिशुनपुर-चंद्रेश उरांव, भाजपा-0.59%, सिसई-समीर उरांव, भाजपा-0.63%, गुमला-भूषण तिर्की, झामुमो-0.93%।
2014 की छोटी हार- तोरपा से भाजपा के कोचे मुंडा 0.04% वोटों के अंतर से हारे थे। उन्हें झामुमो के पोलुस सुरीन 43 वोटों से हराया था।

 

सबसे बड़ी जीत भाजपा के नाम
तीन चुनावों में अबतक की सबसे बड़ी जीत भाजपा के विरंची नारायण के नाम है। 2014 में उन्होंने बोकारो से निर्दलीय प्रत्याशी समरेश सिंह को 72 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। इसी साल दूसरी बड़ी जीत रघुवर दास (सीएम) के नाम थी। उन्होंने कांग्रेस के आनंद बिहारी दुबे को 70 हजार से ज्यादा मतों से हराया था। 2005 में भाजपा के अर्जुन मुंडा ने खरसावां से कांग्रेस की कुंती सोय को 55 हजार से ज्यादा मताें से हराया था। अर्जुन मुंडा को 74797 वोट मिले थे।

 

सबसे छोटी हार
सबसे छोटी हार का रिकॉर्ड भी भाजपा के नाम है। 2009 में हटिया से भाजपा के रामजी लाल सारडा 0.02% के अंतर से हार गए थे। उन्हें कांग्रेस के गोपाल शाहदेव ने 25 वोटों से हराया था। शाहदेव को 39921 और शारडा को 39896 वोट मिले थे। दूसरी छोटी हार राजद के खाते में गई थी। 2005 में हुसैनाबाद से एनसीपी के कमलेश कुमार सिंह 0.03% वोटों के अंतर से जीते थे। संजय यादव 35 वोट से हार गए थे। कमलेश को 21661 और संजय को 21626 वोट मिले थे।

 

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