विस चुनाव / 2005 में तीन और 2009 में दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीता था चुनाव, 2014 में खत्म हुआ सफर



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • झारखंड में तीन बार हुए विस चुनाव में मात्र ही एक सीट ऐसी थी, जहां लगातार दो बार निर्दलीय प्रत्याशी जीते
  • पांकी और जरमुंडी की सीट पर 2005 की तुलना में 2014 में काफी कम चुनाव लड़ा निर्दलीय प्रत्याशियों ने
  • झारखंड के पहले विस चुनाव 2005 में जरमुंडी, जगरनाथपुर, दुमका में भी निर्दलीय प्रत्याशी का रहा था कब्जा

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2019, 05:50 PM IST

रांची. नवंबर में झारखंड विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा 25 अक्तूबर के बाद हो सकती है। हालांकि राजनीतिक पार्टियां तैयारी में जुट चुकी हैं और जगह-जगह सभाएं भी आयोजित होने लगी है। ऐसे में दैनिक भास्कर आपको बता रहा है पिछले तीन बार हुए विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों का हाल। झारखंड में हुए 2005, 2009 और 2014 के चुनाव में मात्र एक ही ऐसी सीट थी, जहां निर्दलीय प्रत्याशी लगातार दो बार जीत हासिल कर सके। वो सीट थी जरमुंडी की। 2014 में तो इस एक सीट से भी निर्दलीय प्रत्यािशयों को हाथ धोना पड़ा। 2014 में झारखंड के 81 विधानसभा सीटों में से एक पर भी निर्दलीय प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर सके थे। वहीं, 2005 में तीन और 2009 में दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव जीता था।

2014 में एक भी निर्दलीय नहीं जीता
2005 में हुए झारखंड के पहले विस चुनाव में जरमुंडी सीट के साथ ही जगरनाथपुर और दुमका में भी निर्दलीय प्रत्याशियों का कब्जा रहा था। 2009 में दुमका आैर जगरनाथपुर की सीट निर्दलीय उम्मीदवारों हाथ से निकल गई। पर पांकी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की। 2014 में तो इन सभी सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव में खड़े तो जरूर हुए पर जीत ना सके।

जरमुंडी ऐसी सीट, जहां लगातार दो बार निर्दलीय प्रत्याशी का रहा कब्जा
2005, 2009 और 2014 के चुनाव में जरमुंडी ही एक ऐसी सीट रही, जहां लगातार दो बार निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई। वो समय था 2005 और 2009 के चुनाव का। इन दोनों ही चुनाव में हरिनारायण राय ने जीत दर्ज की थी। जरमुंडी संथाल परगना मंडल की एक विधानसभा सीट है। संथाल परगना मंडल में कुल 18 विधानसभा सीट आती हैं। जरमुंडी का ज्‍यादातर क्षेत्र ग्रामीण परिवेश का है। यहां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्‍या ज्‍यादा है। यहां सबसे ज्‍यादा हिंदी और संथाली भाषाएं बोली जाती हैं।

2005 में तीन विस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीता था चुनाव
2005 में दुमका से स्टीफन मरांडी, जरमुंडी से हरि नारायण राय और जगरनाथपुर से मधु कोड़ा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की थी। मधु कोड़ा तो यूपीए गठबंधन के दौरान राज्य में 2006 से 2008 के बीच मुख्यमंत्री भी रहे। मधु कोड़ा ने झारखंड में पहले निर्दलीय मुख्यमंत्री के रूप में पहचान बनाई थी। 2005 के विधान सभा चुनाव में दुमका में 9 निर्दलीय थे। वहीं, जरमुंडी में 16 और जगरनाथपुर में 6 प्रत्याशियों ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था।

2009 में दो विस सीट पर ही निर्दलीय प्रत्याशियों का रहा कब्जा
2009 के चुनाव में दो विधानसभा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। जरमुंडी और पांकी से। जरमुंडी से हरि नारायण राय और पांकी से विदेश सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था और जीतकर विधानसभा पहुंचे। इस वक्त दुमका की सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन और जगरनाथपुर से जय भारत समता पार्टी से गीता कोड़ा ने चुनाव जीता था। हेमंत सोरेन 2013-2014 के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री भी रहे थे। जरमुंडी सीट पर ऐसा दो साल रहा जब निर्दलीय प्रत्याशी हरि नारायण राय ने जीत दर्ज की थी। 2009 के विधान सभा चुनाव में पांकी से 13 प्रत्याशी निर्दलीय थे। वहीं, जरमुंडी से 19 उम्मीदवार निर्दलीय थे।

तीन बार हुए चुनाव में पांकी विस सीट से विदेश सिंह ही रहे विजेता
2014 के चुनाव में तो झारखंड की 81 विस सीटों में से एक पर भी निर्दलीय प्रत्याशी नहीं जीत सके। उनके हाथ से पांकी और जरमुंडी की सीट भी फिसल गई। इस चुनाव में पांकी से कांग्रेस प्रत्याशी विदेश सिंह जीते तो जरमुंडी से भी कांग्रेस के प्रत्याशी बादल पत्रलेख विजयी हुए। इस चुनाव के दौरान खास बात यह भी रही कि इन दोनों ही सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या भी कम हो गई थी। 2014 में पांकी सीट से 6 और जरमुंडी से मात्र 4  निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। 2005, 2009 और 2014 के चुनाव में पांकी सीट से विदेश सिंह ही विजई हुए। 2005 में राजद से, 2009 में निर्दलीय तो 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर विदेश सिंह ने यहां चुनाव जीता था।

 

विस सीट 2005 2009 2014
पांकी                  विदेश सिंह(राजद)                विदेश सिंह (निर्दलीय) विदेश सिंह (कांग्रेस)
दुमका         स्टीफन मरांडी (निर्दलीय) हेमंत सोरेन (जेएमएम) लुईस मरांडी (भाजपा)
जरमुंडी    हरि नारायण राय (निर्दलीय) हरि नारायण राय (निर्दलीय) बादल पत्रलेख (कांग्रेस)
जगरनाथपुर     मधुकोड़ा (निर्दलीय) गीता कोड़ा (जय भारत समता पार्टी) गीता कोड़ा (जय भारत समता पार्टी)
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