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सुनवाई / 6 लाख कराेड़ के भ्रष्टाचार के अाराेप पर झारखंड सरकार काे नाेटिस

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 11:02 AM IST


Jharkhand news Notice to Jharkhand Government on corruption charges of six lakh crore
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Jharkhand news Notice to Jharkhand Government on corruption charges of six lakh crore
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  • 358 अायरन अाेर खदानाें के अावंटन मामले में सुप्रीम काेर्ट का अादेश 

नई दिल्ली/रांची. लाैह अयस्क (अायरन अोर) खदानाें के अावंटन में गड़बड़ियाें के अाराेप पर सुप्रीम काेर्ट ने केंद्र सरकार के साथ झारखंड, अाेडिशा अाैर कर्नाटक सरकार काे नाेटिस जारी किया है। जस्टिस एसए बोबडे अाैर जस्टिस एसए नजीर की बेंच ने मंगलवार काे वकील मनाेहर लाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए इन राज्याें से जवाब मांगा है। याचिका में 358 लाैह अयस्क खदानाें की लीज के मामले में छह लाख कराेड़ रुपए के भ्रष्टाचार के अाराेप लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीनियर वकील पीएस नरसिम्हा को कोर्ट की मदद करने के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। 

केंद्र, ओडिशा और कर्नाटक सरकार से भी मांगा जवाब

  1. याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2014 में झारखंड, अाेडिशा और कर्नाटक समेत देश के करीब 350 लौह अयस्क खदानों के आवंटन में गड़बड़ी की गई। खदानाें की लीज बिना मूल्यांकन किए अावंटित कर दी गई या उसे बढ़ा दिया गया। इस साल फरवरी में यह पता चला कि 288 खनन पट्टों को "बड़े दान' के बदले में दिया गया था। इससे सरकारी खजाने काे छह लाख कराेड़ रुपए का नुकसान हुअा। याचिका में इन गड़बड़ियों की सीबीआई से जांच कराने अाैर खदानों की लीज अवधि के विस्तार पर रोक लगाने की मांग की गई है। 

  2. झारखंड में चल रही है सीबीअाई जांच

    झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु काेड़ा के कार्यकाल में राज्य सरकार ने सारंडा क्षेत्र के कई लाैह अयस्क खदानाें के लीज अावंटन की अनुशंसा की थी। लेकिन कई तरह की शिकायतें अा गई। इसके बाद लीज का अावंटन नहीं हुअा अाैर सीबीअाई जांच शुरू हाे गई। यह जांच अब भी चल रही है। 

  3. शाह आयोग की अनुशंसा पर झारखंड सरकार ने बनाई थी 3 कमेटी

    शाह अायाेग की अनुशंसाअाें के अालाेक में झारखंड सरकार ने वर्ष 2013-2015 के बीच तीन जांच कमेटियों का गठन किया था। एक जांच कमेटी पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) के अपर समाहर्ता, दूसरी कमेटी खान विभाग के उपनिदेशक अाैर तीसरी कमेटी राज्य सरकार के विकास अायुक्त की अध्यक्षता में बनाई गई थी। तीनाें कमेटियाें ने अपनी जांच रिपाेर्ट में कई अनियमितताअाें अाैर खनिज समुदान नियमावली -1960 के नियम 37 का उल्लंघन कर अवैध खनन हाेने की पुष्टि की थी। साथ ही अनियमितता बरतने वालाें का खनन पट्टा रद्द करने की अनुशंसा की थी। इसके बाद सरकार ने कई लीज रद्द कर दिए थे। बाद में अाराेप लगा था कि खान विभाग अाैर राज्य प्रशासन के जाे भी पूर्व अाैर वर्तमान अधिकारी छद्म खनन के दाेषियाें काे लंबे समय से संरक्षण देते रहे हैं, राज्य पर्षद के समक्ष सुनवाई के दाैरान तमाम सबूताें के रहते हुए भी उन्हें पेश नहीं किया गया। 

  4. जस्टिस शाह अायाेग ने भी की थी गड़बड़ी की पुष्टि

    देशभर में एेसी ही कथित अनियमितताअाें की जांच के लिए सुप्रीम काेर्ट के अादेश पर वर्ष 2012 में जस्टिस एमबी शाह अायाेग बना था। अायाेग ने अपनी रिपाेर्ट में कई लाैह अयस्क पट्टाधारियाें द्वारा बरती गई अनियमितताअाें के साथ खनिज समानुदान नियमावली का उल्लंघन हाेने की पुष्टि की थी। लेकिन झारखंड में काम पूरा करने से पहले ही जस्टिस एमबी शाह अायाेग का कार्यकाल खत्म हाे गया था। फिर भी अायाेग ने कम समय में ही झारखंड में लाैह अयस्क खनन क्षेत्राें में बरती गई अनियमितताअाें काे रेखांकित किया था। 

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