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  • Pathalgadi Jharkhand | Jharkhand Pathalgadi Supporters Killing Inside Story; 7 Gulikera Villager Killed For Opposing Pathalgadi Movement

पत्थलगड़ी समर्थकों पर पहले भी लगे हिंसा के आरोप; गैंगरेप और पुलिस के अपहरण में भी आया इनका नाम

6 महीने पहले
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अगस्त 2016 में खूंटी के कांकी गांव में ग्रामीणों ने 13 घंटे तक पुलिसकर्मी को बंधक बनाए रखा था। (फाइल फोटो)
  • पश्चिमी सिंहभूमि के अति नक्सल प्रभावित गुलीकेरा में पत्थलगड़ी का विरोध करने पर 7 लोगों की हत्या
  • वारदात को अंजाम देने वालों की पहचान नहीं, पत्थलगड़ी समर्थकों द्वारा हत्या की जाने की आशंका
  • घटनास्थल गुलीकेरा गांव सोनुआ से 35 किलोमीटर दूर सुदूर जंगल और घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र
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रांची. पश्चिमी सिंहभूमि के अति नक्सल प्रभावित गुलीकेरा गांव में पत्थलगड़ी का विरोध करने पर 7 लोगों की हत्या कर दी गई। इनकी हत्या का आरोप पत्थलगड़ी समर्थकों पर लगा है। इन पर हिंसा का यह पहला आरोप नहीं है। इससे पहले भी इन पर हिंसा के बल पर अपने विरोध में उठने वाली आवाज को दबाने के आरोप लगते रहे हैं। पत्थलगड़ी समर्थकों पर खूंटी में नाटक मंडली की पांच युवतियों से गैंगरेप व पुलिस के अपहरण का भी आरोप लग चुका है। 

6 महीने पहले गुलीकेरा गांव में हुई थी पत्थलगड़ी समर्थकों की बैठक
जानकारी के मुताबिक, 6 महीने पहले गांव में पत्थलगड़ी के समर्थन में उसी गांव में बैठक हुई थी जहां पर रविवार को ग्रामीणों ने बैठक की। ऐसा बताया जा रहा है कि खूंटी के कुछ लोग गाड़ी से इस गांव में आए थे। गांव से जाते वक्त पुलिस ने उनसे पूछताछ की थी। उन लोगों के पास से कुछ दस्तावेज भी मिले थे। हालांकि] उसके बाद कहीं से पत्थलगड़ी को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली थी। घटनास्थल बुरुगुलीकेरा गांव सोनुआ से 35 किलोमीटर दूर सुदूर जंगल और घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थित है। रविवार को 7 लोगों की हत्या के बाद मंगलवार दोपहर पुलिस को घटना की जानकारी मिली। करीब 19 घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस ने 7 ग्रामीणों के शव को बरामद किया। इस दौरान चाईबासा जिले के सभी बड़े अफसर गांव में कैंप करते रहे।

7 लोगों की हत्या क्यों हुई?
गुलीकेरा पंचायत के उप मुखिया जेम्स बुढ़ और उसके साथ के लोग एक स्थान पर पत्थलगड़ी करने का विरोध कर रहे थे। इससे पहले भी कई बार विरोध किया था, जिसके कारण उन्हें और उनके साथ अन्य 6 ग्रामीणों को मारा गया। बंदगांव और सोनुआ, गुदड़ी इलाके में पत्थलगड़ी समर्थक सक्रिय हैं। बता दें कि गुदड़ी के जिस इलाके में 7 लोगों की हत्या हुई है, वह इलाका बहुत दूर है। गुदड़ी में थाना है, लेकिन उससे भी घटनास्थल तक पहुंचना आसान नहीं। चाईबासा से चक्रधरपुर होकर जाने पर कुल दूरी 150 किमी होगा। सोनुवा से 40 किमी दूर है। रास्ता खराब है।

19 जून 2018: खूंटी में पत्थलगड़ी समर्थकों पर गैंगरेप का आरोप
खूंटी जिले में ग्राम सभा का पैरोकार बनने वाले पत्थलगड़ी नेताओं पर गैंगरेप का आरोप लग चुका है। 19 जून 2018 को खूंटी के कोचांग में नाटक मंडली की पांच युवतियों के साथ गैंगरेप हुआ था। ये युवतियां नुक्कड़ नाटक करने गई थी। जांच पड़ताल के दौरान खुलासा हुआ था कि पत्थलगड़ी नेता जुनास तिड़ू के कहने पर पीएलएफआई के कई कट्टर उग्रवादियों ने युवतियों के साथ गैंगरेप किया था। बाद में गैंगरेप में शामिल उग्रवादी चाईबासा के कराईकेला थाना क्षेत्र में पकड़े गए थे।

24 जून 2018: घाघरा में पुलिस कर्मी को किया था अगवा
गैंगरेप की घटना के बाद मामला बढ़ा तो पत्थलगड़ी समर्थित नेता जुनास तिड़ू, प्रोफेसर यूसुफ पूर्ति ने जनसभा के लिए खूंटी जिले के घाघरा में भीड़ जुटाई थी। मामले की जानकारी के बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो बीच सभा से पहले ही जनसभा में मौजूद भीड़ ने हिंसा का रूप धारण कर लिया और खूंटी के पूर्व सांसद कड़िया मुंडा के घर में तैनात हथियारबंद तीन जवानों को बंधक बना लिया। बाद में पुलिसिया कार्रवाई हुई तो राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को लेकर हंगामा हुआ था।

वीर बिरसा मुंडा के इलाके में पत्थलगड़ी समर्थक सक्रिय
अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी वीर बिरसा मुंडा की कर्मभूमि वाले क्षेत्र में भी पत्थलगड़ी समर्थक सक्रिय हैं। पिछले साल छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ इलाकों में पत्थलगड़ी की खबरें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही थी। लेकिन, बिरसा की जन्मस्थली खूंटी के कोचांग, उलीहातु इलाके में पत्थलगड़ी का पहला प्रभाव देखा गया था। इसके बाद झारखंड के बंदगांव, गुदड़ी इलाके के घने जंगल इलाके में पत्थलगड़ी समर्थकों की सक्रियता बताई जाती है। इन इलाकों में घने जंगल, खराब रास्ते और उग्रवाद का खौफ है।

पत्थलगड़ी से संबंधित मुकदमे खूंटी और सरायकेला जिले में
पत्थलगड़ी से संबंधित मुकदमे खूंटी व सरायकेला जिले में दर्ज हैं। बता दें कि पत्थलगड़ी समर्थक सरकारी अधिकारी के कानूनी आदेश व निर्देश को नहीं मानने, विधि-व्यवस्था को अपने हाथों में लेने, अपना बैंक खोलने की कोशिश करने व अपना सिक्का चलाने की भी पत्थलगड़ी समर्थकों ने कोशिश की थी। पत्थलगड़ी समर्थकों पर समानांतर सरकार चलाने, ग्राम सभा की गलत व्याख्या करने, सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं लेने के लिए दबाव बनाने का आरोप है। इसके अलावा यह भी आरोप है कि संविधान की पांचवीं अनुसूची की गलत व्याख्या कर ग्राम सभा को सरकार के खिलाफ भड़काया जा रहा है। गांवों में पत्थलगड़ी कर उक्त क्षेत्रों में पुलिस-प्रशासन को जाने से रोका जा रहा है।

हेमंत सरकार ने पत्थलगड़ी समर्थकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने का लिया था निर्णय
सरकार गठन के बाद 29 दिसंबर 2019 को हेमंत सोरेन ने पहली बैठक में पत्थलगड़ी के दौरान हुए सारे मुकदमों को वापस लेने का निर्णय लिया गया था। बैठक के बाद कैबिनेट सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया था कि पत्थलगड़ी करने के क्रम में जिन व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर मुकदमे दायर किए गए हैं, उन्हें वापस लेने का निर्णय लेते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

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