झारखंड / मरीज का ठीक से इलाज नहीं करने पर सीएम नाराज, ट्वीट कर कहा- टाल-मटोल बर्दाश्त नहीं

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। (फाइल) मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। (फाइल)
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। (फाइल)मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। (फाइल)

  • ट्वीट से मिली सदर अस्पताल कोडरमा की शिकायत पर मुख्यमंत्री हुए गंभीर
  • सीएम ने कहा-सरकारी अस्पताल में संवेदनशीलता के साथ करें मरीजों का इलाज

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2020, 11:27 AM IST

रांची. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों का उचित देखभाल नहीं होने की शिकायत पर नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिम्मेवारी से अपना पल्ला झाड़ने के बदले समस्या के निदान पर जोर दें। अस्पताल के चिकित्सकों व प्रबंधन को अपनी मानसिकता बदलनी होगी। टाल- मटोल का रवैया अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दैनिक भास्कर के 14 जनवरी के चतरा-कोडरमा अंक में छपी खबर पर सीएम ने संज्ञान लेते हुए यह निर्देश दिया है।

अस्पताल के रवैये से नाराज हुए मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री को ट्वीट कर जानकारी दी गई थी कि बिहार के एकंगरसराय निवासी 60 वर्षीय शत्रुघ्न साव की सड़क दुर्घटना में बाएं पैर के जांघ की हड्डी टूट गई थी। हादसे के बाद उन्हें सदर अस्पताल कोडरमा में भर्ती किया गया था। लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा उनके बेहतर इलाज को प्राथमिकता न देकर उनके परिजनों की प्रतीक्षा करता रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस घटना पर नाराजगी प्रकट करते हुए राज्य के सभी अस्पतालों में मरीजों के साथ संवेदनशीलता के साथ इलाज करने का निर्देश दिया।

मरीज को एंबुलेंस से बेहतर इलाज के लिए रिम्स भेजा गया

मुख्यमंत्री ने कहा कि अज्ञात मरीजों के मामलों में परिजन का पता लगाकर सम्पर्क करना पुलिस का दायित्व है और डॉक्टर हर मरीज के बेहतर से बेहतर इलाज पर ही अपना ध्यान दें। मुख्यमंत्री के ट्वीट के बाद शत्रुघ्न साव को एंबुलेंस से बेहतर इलाज के लिए रिम्स भेजा गया है, जहां वह इलाजरत हैं। मुख्यमंत्री ने साव का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश रिम्स प्रबंधन को दिया है। मुख्यमंत्री ने रांची के उपायुक्त को मरीज के इलाज के बाद बिहार स्थित उनके पैतृक निवास भेजने हेतु प्रबंध करने को कहा है।

हेमंत ने दी मकर संक्रांति व टुसू पर्व की शुभकामना
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मकर संक्रांति, टुसू, माघ बिहू व पोंगल पर झारखंडवासियों को शुभकामनाएं दी है। सोरेन ने कहा है कि एक पर्व के कई नाम हो सकते हैं। पर्व मनाने की अलग-अलग परंपराएं हो सकती हैं, लेकिन सभी में उत्सवधर्मिता, प्रकृति की उपासना और सौहार्द का भाव एक समान व्याप्त होता है। हमारे देश की यही खूबसूरती है। यहां विभिन्न जाति, भाषा व धर्म को मानने वाले लोगों की साझा संस्कृति है।

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