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रांची. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार काे सदन में कहा आज भी कई विद्यार्थी उनके घर आते हैं और कहते हैं कि मैंने जेपीएससी परीक्षा दी है, मुझे पास करा दें। ऐसे में अब तो मैं हर सुबह उठकर भगवान से यही प्रार्थना करता हूं कि मेरे घर-परिवार का कोई भी सदस्य जेपीएससी पास न करे। अगर ऐसा किसी ने किया तो लोग कहेंगे, मैंने ही करवाया है। उन्होंने कहा कि जेपीएससी ही नहीं एसएससी में भी प्रक्रिया के तहत ही सारी परीक्षाएं होंगी। सदन में गुरुवार को झारखंड लोक सेवा आयोग की छठी और सातवीं परीक्षा का मामला उठा।
प्रदीप यादव समेत कई विधायकाें ने ध्यानाकर्षण के दौरान परीक्षाओं को लेकर सवाल खड़े किये। इसके बाद मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा ये बातें कहीं। उन्हाेंने सदन में घाेषणा की कि झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सभी वर्गों को आरक्षण का उचित लाभ मिलेगा। इसके लिए स्पष्ट नियमावली बनेगी। इसमें आरक्षण रोस्टर क्लियर रहेगा। इसलिए सातवीं जेपीएससी परीक्षा के विज्ञापन को रोक दिया गया है। छठी जेपीएससी परीक्षा के रिजल्ट का आकलन के बाद निर्णय लिया जाएगा।
सीएम ने कहा कि जेपीएससी को लेकर पूरी तरह से स्पष्ट नयी नियमावली बनायी जायेगी। अलग राज्य बनने के बाद से ही जेपीएससी विवादों के घेरे में रहा है। लगभग सभी परीक्षा में विवाद हुए। कुछ उजागर हुए, कुछ नहीं। कुछ मामलों में कोर्ट में केस चल रहा है। लोगों को जब आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है तो समाज में कई सवाल उठते हैं। सीएम ने यह भी कहा कि जेपीएससी एक स्वतंत्र एजेंसी है इसलिए सरकार को भी इसमें ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। लेकिन सभी लोगों को उसका अधिकार भी मिलना चाहिए। जो नियमावली है उसकी अवहेलना नहीं होनी चाहिए। इसलिए नियमावली बनाने के लिये विकास आयुक्त की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। नियमावली बनेगी तो कोई वर्ग अपने अधिकार से वंचित नहीं होगा।
प्रदीप यादव ने सवाल पूछा, क्या सरकार जेएसएससी में आरक्षण का अनुपालन करवाना चाहेगी। क्योंकि आरक्षण के विवाद को लेकर ही सातवीं जेपीएससी के विज्ञापन रद्द कर दिये गये और छठी जेपीएससी में विवाद कायम है। छठी जेपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर विद्यार्थी आंदोलन कर रहे हैं। विनोद सिंह ने भी कहा कि आरक्षण का जो प्रावधान किया गया है वह मिलना चाहिए। छठी जेपीएससी में भी आरक्षण नियम का पालन होना चाहिए। विधायक बंधु तिर्की ने कहा कि विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी में मंत्रिमंडल के किसी सदस्य को भी रखा जाए।
सीएम हेमंत साेरेन ने कहा कि छठी जेपीएससी और एसएससी भी संज्ञान में है। छठी जेपीएससी का भी मामला संज्ञान में है। जेपीएससी एक स्वतंत्र एजेंसी है इसलिए उसके कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। सरकार और जेपीएससी ने भी अपने अधिकार को नहीं समझा इसलिए स्थिति खराब हुई। नतीजतन विद्यार्थी सफर करते रहे। सरकार के हस्तक्षेप के कारण भी कई बार स्थिति खराब हुई है।
20 वर्ष में सिर्फ पांच सिविल सेवा परीक्षा
झारखंड लोक सेवा आयोग के गठन के 20 वर्ष हो चुके हैं। लेकिन अभी तक सिर्फ पांच सिविल सेवा परीक्षा हो सकी है। सिक्स की प्रक्रिया अभी चल रही है। फर्स्ट और सेकेंड सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगने पर पहले निगरानी ब्यूरो द्वारा जांच की गई थी। बाद में इस मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है। अभी जांच पूरी नहीं हो सकी है। जेपीएससी द्वारा आयोजित दर्जनभर परीक्षाओं की जांच चल रही है।
जल्द बनेगा विस्थापन आयोग, पांच साल में सभी मामलाें पर हाेगा निर्णय : हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार काे सदन में घाेषणा की कि झारखंड विस्थापन आयोग का जल्द गठन किया जाएगा। साथ ही पांच साल में विस्थापन के सभी मामलों पर निर्णय होगा। कहा कि विस्थापन की समस्या बहुत पहलीे से है। मुआवजा और नौकरी नहीं मिली है। इसमें कई पीढ़ी मर भी गई। पिछले 14 सालों में राज्य कैसे चला यह सभी को पता है। हमारी सरकार ने इसे संज्ञान मेंं ले लिया है। इस आयोग में जनप्रतिनिधि भी सदस्य होंगे। गुरुवार काे सदन में विधायक विरंची नारायण ने विस्थापन का मामला उठाते हुए कहा कि विस्थापन से राज्य का हर विधानसभा क्षेत्र प्रभावित है। राज्य गठन के बीस साल बाद भी विस्थापिताें काे न्याय नहीं मिला है।
बोकारो स्टील प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के सात हजार से अधिक विस्थापितों को नौकरी अाैर पांच हजार काे मुआवजा नहीं मिला है। भू राजस्व मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि पूर्व की सरकार में क्या हुआ यह कहने की जरूरत नहीं पर हमारी सरकार देरी नहीं करेगी। सभी विस्थापिताें काे उनका हक मिलेगा। इसके बाद सीएम ने कहा कि यह बात सही है कि आजादी के बाद से विस्थापन एक बड़ी समस्या है। राज्य टाटा,एचईसी,बीएसएल,कोल इंडिया हो सभी जगह विस्थापन के बड़े मामले हैं। ऐसे में हमारी सरकार इस समस्या को दूर करने के लिए कृत संकल्प है और जल्द ही झारखंड विस्थापन आयोग का गठन किया जायेगा। विस्थापितों को चिह्नित कर उनका हक दिया जाएगा।




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