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अब तक 18 महिलाएं बनीं विधायक; कुछ ने पिता-पति की संभाली विरासत तो कई संघर्ष से पहुंचीं विधानसभा

10 महीने पहले
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  • 2000 में बिहार से अलग होकर नया राज्य बना था झारखंड
  • 81 सीटों वाली विधानसभा के लिए अब तक हो चुके हैं 3 बार चुनाव

रांची (ओम प्रताप). बिहार में सन् 2000 में हुए विधानसभा चुनाव के कुछ महीने बाद झारखंड नया राज्य बना था। 2005, 2009, 2014 में यहां हुए विधानसभा चुनाव में कुछ 18 महिलाओं को विधानसभा जाने का मौका मिला। इनमें से कुछ अपनी पिता या पति की विरासत संभाल रही हैं तो कई संघर्ष के रास्ते विधानसभा तक पहुंची हैं। इनमें से 6 महिला विधायक ही मंत्री बन सकीं।

1) जानिए झारखंड में अब तक विधायक बनीं महिला नेताओं के बारे में

बिहार में छोटानागपुर से विधायक बनी मेनका सरदार की शादी 1986 में जोजोबेड़ा (जमशेदपुर) निवासी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रहे विभीषण सरदार से हुई है। विभीषण सरदार टाटा मोटर्स में कार्यरत थे। मेनका ने पहली बार 1995 में निर्दलीय चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गईं। भाजपा ने मेनका सरदार को 2000 के बिहार विधानसभा चुनाव में पोटका सीट से टिकट दिया। इसमें वह जीत गईं। 2004 में वह मामूली मतों से हार गईं। फिर 2009 और 2014 में लगातार जीतीं।

जोबा मांझी दो बार झारखंड सरकार में 2000 से 2003 तक बाबूलाल मरांडी और 2003 से 2005 तक अर्जुन मुंडा की सरकार में मंत्री रही थी। उनके पति देवेंद्र मांझी सिंहभूम आंदोलन के नेता थे। जोबा अभी मनेाहरपुर की विधायक हैं। उनके पति देवेंद्र मांझी भी मनोहरपुर से विधायक रहे थे। उनकी हत्या के बाद जोबा बिरासत संभाल रही हैं।

मांडर सीट से विधायक गंगोत्री कुजूर ने 1990 के दौरान भाजपा से राजनीतिक शुरू की थी। वह महानगर अध्यक्ष, प्रदेश महिला मोर्चा में उपाध्यक्ष, 2006 में राज्य सूचना आयोग, झारखंड में सूचना आयुक्त बनीं।  2014 में मांडर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ीं और विधायक बनीं।

सिमडेगा की भाजपा विधायक विमला प्रधान 2009 में अर्जुन मुंडा की सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहीं। उन्हें 2017 में उत्कृष्ट विधायक का सम्मान दिया गया था। इनकी शादी दिलीप कुमार प्रधान से हुई जो टीचर थे। 1990 में दौरान अटल बिहारी वाजपेयी से प्रभावित होकर भाजपा से जुड़ीं। 2004 में भाजपा प्रदेश मंत्री और 2007 में भाजपा की महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री बनीं। 2009 में सिमडेगा सीट से विधानसभा चुनाव जीतीं और समाज कल्याण व पर्यटन मंत्री बनीं।

2010 में जिला परिषद की उपाध्यक्ष बनीं नीरा यादव 2014 विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा के टिकट से विधानसभा पहुंचीं। शिक्षा मंत्री रहते हुए नीरा ने उस समय पूर्व राष्ट्रपति कलाम के चित्र पर माल्यार्पण कर दिया था, जब वह जीवित थे। 1999 में भाजपा से जुड़ीं नीरा कोडरमा गर्ल्स कॉलेज की प्रिंसिपल भी रह चुकीं हैं। 2013 में उन्हें महिला मोर्चा का उपाध्यक्ष बनाया गय था। पीएचडी कर चुकीं नीरा यादव के पति विजय यादव का ट्रांसपोर्ट और मोटर्स पार्ट्स का बिजनेस है।

लुईस मरांडी मंत्री बनने से पहले भारतीय जनता पार्टी के महिला मोर्चा की अध्यक्ष रह चुकी हैं। इसके अलावा वे झारखंड महिला आयोग की सदस्य रह चुकी हैं। राजनाथ सिंह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब लुईस राष्ट्रीय सचिव थीं। मिशन द्वारा संचालित हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की मैट्रिक की परीक्षा में उर्त्तीण कर दुमका स्थित महिला कॉलेज से इंटर किया। 1985 में ब्रेन्चूस किस्कू के साथ शादी की। पति ने आगे की पढ़ाई के लिए लुइस को प्रेरित किया। पीएचडी करके सिद्धो-कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुईं। 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हराकर दुमका में 37 साल बाद गैर-झामुमो पार्टी का झंडा लहराया।

सीता सोरेन झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन की बहू हैं। उनकी शादी शिबू सोरेन के बड़े बेटे दुर्गा सोरेन से हुई थी। पति की मौत के बाद उन्हें जामा से विधायक चुना गया था। 2012 में राज्यसभा चुनाव में उन पर पैसे लेने का भी आरोप था। उन्हें सात महीने की जेल हुई थी। फिलहाल वे जमानत पर हैं।

निर्मला देवी कांग्रेस नेता योगेंद्र साव की पत्नी हैं। 2009 में चुनाव जीतकर योगेंद्र हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बने थे। उन पर नक्सली संगठन चलाने का आरोप लगा, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 2014 में उनकी पत्नी निर्मला देवी कांग्रेस के टिकट पर बड़कागांव से चुनाव जीतकर विधायक बनी।

सिल्ली विधानसभा सीट से 2014 में चुनाव जीते अमित महतो की पत्नी हैं। अमित पर मारपीट का आरोप साबित हुआ था, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। सिल्ली में हुए उपचुनाव में सीमा महतो ने जीत दर्ज की थी।

कोयला चोरी मामले में गोमिया से झामुमो विधायक योगेंद्र महतो को 2018 फरवरी में कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई। इसके बाद गोमिया सीट पर हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी बबीता देवी ने जीत दर्ज की।

लिट्टीपाड़ा की पूर्व विधायक सुशीला हांसदा का 2016 में निधन हो गया। 54 वर्षीय सुशीला हांसदा पूर्व मंत्री साइमन मरांडी की पत्नी थीं। झामुमो के टिकट पर 1990 से 2009 तक लगातार चार बार विधायक रहीं। 2015 में उत्कृष्ट विधायक के लिए उनका चयन किया गया था। वे 2010 से 2015 तक लिट्टीपाड़ा प्रखंड की प्रमुख भी रह चुकी हैं। वर्ष 2014 में मंत्री साइमन मरांडी द्वारा झामुमो से बगावत करने और पार्टी छोड़ने के बावजूद वे झामुमो से जुड़ी रहीं। विधायक बनने से पूर्व वे दो साल तक शिक्षिका भी रही थीं।

अपर्णा सेन गुप्ता 2005 में निरसा से विधायक बनी थीं। उनके पति सुशांतो सेनगुप्ता फारवर्ड ब्लाक के बड़े नेता थे। 2001 में उनकी हत्या हो गई थी।

कुंती देवी के पति सूर्यदेव सिंह झरिया से तीन बार विधायक रहे। उनके बाद कुंती देवी के देवर बच्चा सिंह एक बार विधायक रहे। कुंती सिंह दो बार यहां की विधायक रहीं। अब उनके बेटे संजीव यहां के विधायक हैं। इस बार संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह को भाजपा ने टिकट दिया है। संजीव चचेरे भाई नीरज सिंह की हत्या के मामले में जेल में बंद हैं।

झारखण्ड के सिसई विधानसभा की पूर्व विधायक व मंत्री गीताश्री के पिता स्व. कार्तिक उरांव लोहरदगा के सांसद थे, जबकि मां सुमति उरांव भी सांसद और केंद्र सरकार में 1990 के दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री रह चुकी हैं। गीताश्री का विवाह डॉ. अरुण उरांव से हुआ जो भारतीय पुलिस सेवा में थे। अब वीआरएस लेने के बाद जिंदल पॉवर में महत्वपूर्ण पद पर हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक गीता 2009 में सिसई सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीतीं।

सुधा चौधरी पहली बार 2009 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट से विधायक बनीं। इस बार भी जेडीयू के टिकट पर छतरपुर से उम्मीदवार हैं। सुधा चौधरी ने अपने क्षेत्र में शराब छोड़ो दुध पीयो कार्यक्रम चलाया था, जिससे उन्हें खासी लोकप्रियता मिली थी।

अन्नपूर्णा के पति स्वर्गीय रमेश प्रसाद यादव 1998 में बिहार की राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। पति के निधन के बाद अन्नपूर्णा देवी राजनीति में आईं। 1998 के उपचुनाव, 2000 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन बिहार और झारखंड बनने के बाद 2005 और 2009 में वह विधानसभा पहुंचीं। 2013 में बनी हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बनीं। 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

2009 में पहली बार विधायक बनीं गीता कोड़ा झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा की पत्नी हैं। वे उस वक्त 25 वर्ष की थीं। झारखंड की सबसे कम उम्र की विधायक बनने का रिकॉर्ड गीता के नाम है। 2018 में गीता कोड़ा कांग्रेस में शामिल हुईं थीं। गीता इंटरमीडिएट पास हैं। मधु कोड़ा से शादी के बाद काफी समय तक वह गृहणी ही रहीं। 2009 में जब मधु कोड़ा को भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाना पड़ा तब गीता कोड़ा ने राजनीति में कदम रखा।

सिल्ली के विधायक अमित महतो व गोमिया के योगेंद्र महतो अलग-अलग मामले में सजा होने के कारण इनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। 2017 में हुए उपचुनाव में इन सीटों पर दोनों विधायक की पत्नियों ने चुनाव लड़ा और जीत कर विधानसभा पहुंची। सिल्ली से सीमा देवी व गोमिया से बबीता देवी विजयी हुई थी।

2005 में हुए विधानसभा चुनाव में मात्र 03 महिलाएं ही विधानसभा पहुंचीं थीं। इनमें लिट्टीपाड़ा से सुशीला हांसदा, कोडरमा से अन्नपूर्णा देवी व निरसा से अर्पणा सेनगुप्ता शामिल थीं। 2005 के चुनाव में 94 महिलाएं चुनावी मैदान में थीं। इसमें से 85 महिलाओं की जमानत जब्त हो गई थी।

2009 के विधानसभा चुनाव में 08 महिला प्रत्याशी विधानसभा पहुंची थीं। इसमें कोडरमा से अन्नपूर्णा देवी, जामा से सीता सोरेन, झरिया से कुंती देवी, पोटका से मेनका सरदार, जगन्नाथपुर से गीता कोड़ा, सिसई से गीताश्री उरांव, सिमडेगा से विमला प्रधान और छतरपुर से सुधा चौधरी शामिल थीं। 2009 चुनाव में 107 महिला प्रत्याशी चुनावी मैदान में थीं, इसमें से 94 महिलाओं की जमानत जब्त हो गई थी।

2014 के विधानसभा चुनाव में कुल 109 महिला प्रत्याशियों में से सिर्फ 09 को जीत हासिल हुई थी। इन महिला उम्मीदवारों में लुईस मरांडी, गंगोत्री कुजूर, निर्मला देवी, नीरा यादव, सीता सोरेन, विमला प्रधान, गीता कोड़ा (अब सांसद), मेनका सरदार, जोबा मांझी शामिल हैं। इन महिला विधायकों में लुईस मरांडी, गंगोत्री कुजूर, निर्मला देवी, नीरा यादव और उपचुनाव में विजयी सीमा और बबीता देवी पहली बार विधानसभा पहुंचीं हैं।

2014 चुनाव में पोटका से भाजपा उम्मीदवार मेनका सरदार, जगन्नाथपुर से जय भारत समानता पार्टी की उम्मीदवार गीता कोड़ा, मनोहरपुर से झामुमो उम्मीदवार जोबा मांझी, मांडर से भाजपा उम्मीदवार गंगोत्री कुजूर, सिमडेगा की भाजपा उम्मीदवार विमला प्रधान, कोडरमा से भाजपा उम्मीदवार नीरा यादव, दुमका से भाजपा उम्मीदवार लुइस मरांडी, जामा से झामुमो उम्मीदवार सीता सोरेन तथा बड़कागांव में कांग्रेस उम्मीदवार निर्मला देवी ने जीत हासिल की थी। इनमें से गीता कोड़ा इसी साल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सांसद बन चुकी हैं। वहीं पोटका से मेनका सरदार, मनोहरपुर से जोबा मांझी, कोडरमा से नीरा यादव, दुमका से लुइस मरांडी, गोमिया से बबीता देवी, सिल्ली से सीमा महतो चुनावी मैदान में हैं।

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