पड़ताल / 10 साल पहले 1 लाख युवाओं ने उत्पाद सिपाही भर्ती के लिए किया था आवेदन, विभाग ने इसे कूड़े में फेंका

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 05:08 AM IST



Job Application in the garbage
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  • राज्य में 245 उत्पाद सिपाहियों की होनी थी भर्ती, 40 रु. के पोस्टल ऑर्डर के साथ मांगा था आवेदन
  • नियमावली न होने से विभाग ने भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी, किसी आवेदकों को सूचना तक नहीं दी

बिनोद ओझा, रांची. उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने हजारों युवाओं की उम्मीदों को कचरे में डाल दिया। विभाग ने 2008 में उत्पाद सिपाही के 245 पदों पर बहाली के लिए विज्ञापन निकाला। नौकरी की चाह में करीब एक लाख युवाओं ने आवेदन दिया। 40 रुपए के पोस्टल ऑर्डर और शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी जमा किया। लेकिन 10 साल बाद भी इन आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

पिछले दिनों विभाग को कांके रोड पर बने नए मुख्यालय भवन में शिफ्ट किया गया। अफसरों ने ये आवेदन वहां ले जाना उचित नहीं समझा और सफाई के नाम पर इसे पुराने मुख्यालय की गैलरी में ही फेंक दिया। दरअसल झारखंड सरकार के तत्कालीन उत्पाद मंत्री कमलेश सिंह के कार्यकाल में उत्पाद विभाग के सिपाहियों की भर्ती की योजना बनाई गई थी। आवेदन आने के बाद उत्पाद मुख्यालय में तैनात कुछ अफसरों ने इस पर आपत्ति जताई।

 

उनका कहना था कि बिना नियमावली बनाए विभाग सिपाहियों की नियुक्ति नहीं कर सकता। यह अनियमितता की श्रेणी में आ जाएगा। इसके बाद यह नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। भर्ती रद्द कर दी गई। आवेदकों को इसकी कोई सूचना तक नहीं दी गई और न ही पोस्टल ऑर्डर की राशि उन्हें लौटाई गई। विभाग ने भी कुछ दिन तक आवेदनों की रजिस्टर में एंट्री की और पोस्टल ऑर्डर भुनाया, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में लिफाफे को खोला तक नहीं।

 

राज्य में सिर्फ 50 उत्पाद सिपाही, 600 से अधिक पद खाली

राज्य गठन के बाद पहली बार 2008 में उत्पाद सिपाहियों की बहाली का विज्ञापन निकला था। भर्ती प्रक्रिया रद्द होने के बाद अब तक फिर इनकी बहाली नहीं हो पाई, जबकि उत्पाद सिपाहियों की भारी कमी है। पूरे राज्य में महज 50 उत्पाद सिपाही ही हैं। इनके 600 से अधिक पद खाली हैं। मुख्यालय के तत्कालीन उत्पाद आयुक्त बिहारी प्रसाद कहते हैं कि मैनपावर की कमी से रजिस्टर मेंटन नहीं हुआ। फिर विज्ञापन ही रद्द कर दिया गया।

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