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झारखंड और छत्तीसगढ़ छोड़ जंगल लगभग सभी जगह खत्म हो गए हैं

जैसे सभी इस इंतजार में हैं कि कोई मसीहा आएगा और उनके अंतहीन इंतजार को खत्म करेगा। झारखंड और छत्तीसगढ़ छोड़कर जंगल...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 04:15 AM IST
जैसे सभी इस इंतजार में हैं कि कोई मसीहा आएगा और उनके अंतहीन इंतजार को खत्म करेगा। झारखंड और छत्तीसगढ़ छोड़कर जंगल लगभग सभी जगह खत्म हो गए हैं। कोई क्रांति का इंतजार कर रहा है तो कोई कयामत का। 3 हजार किलोमीटर की यात्रा में हर समाज में लोगों की छटपटाहट देखी। पानी बचाने के पैगाम के साथ मुंबई से रांची तक की पदयात्रा कर चुके फिल्मकार श्रीराम डाल्टन ने उक्त बातें भास्कर से कहीं। वो बताते हैं कि जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए मुठ्ठी भर लोग ही कोशिश कर रहे हैं। जब आप लोगों से पानी के मूलभूत अधिकार की बात करते हैं, तो वो डरने लगते हैं। इतने लंबे सफर में कभी मन उचाट तो नहीं हुआ के सवाल पर कहते हैं, जब निकला था तो गर्मी में माथा गरम था। तीन दिन चलते हुए जब देह जलने लगी तो जाकर एक रेस्टोरेंट की जमीन पर टाइल्स पर लेट गया। शरीर और दिमाग ठंडा किया कि ऐसे तो मर जाऊंगा। संघर्ष तो बहुत लंबा है। थोड़ा ठहरा। फिर चलने लगा। लोक गायिका जीवन साथी मेघा मुझे ढूंढते हुए एक शहर में पहुंच गईं। साथ चलने की जिद करने लगीं। बाकी टीम मेंबर भी साथ थे। बहुत समझा बुझा कर मेघा को वापस किया।

पानी बचाने का दे रहे हैं पैगाम

श्रीराम डाल्टन

रात आदिवासियों ने खिलाया खाना

रात 12 बज रहे थे महाराष्ट्र के ललिंग जंगल पहाड़ पार कर पहुंचा। थकान के मारे रोड किनारे चटाई बिछाकर जब लेटे तो कुछ लोग जमा हो गए। पहाड़ी पर आदिवासियों की बस्ती है। खुले टाट के बने झोपड़ी में अक्सर मुंह मारने वाले लोगों के कारण चोर-उचक्के आ जाते हैं। हमसे भी ऐसा ही डर था उनको। जब यात्रा वृत्तांत बताया और कुछ फिल्मों की झलक दिखलाई तो उन्होंने हमारे लिए खाना बनवाया और सोने के लिए जगह दी।