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खूंटी गैंगरेप का मास्टरमाइंड जॉन जुनास तिड़ू चाहता है डील; कहा- केस से मेरा नाम हटा ले पुलिस, बाकी आरोपियों को पकड़वाने में मदद करेंगे

ग्रामीण पुलिस को कुछ नहीं बताएंगे, हम ही पता लगा सकते हैं

Danik Bhaskar | Jul 11, 2018, 03:18 AM IST
तिड़ू ने मंगलवार को फोन पर दैनि तिड़ू ने मंगलवार को फोन पर दैनि
  • पत्थलगड़ी के नाम पर उपद्रव करने वालों के नेता तिड़ू ने कहा-पुलिस मुझे फंसा रही है, ग्रामीणों को डरा रही है

रांची. खूंटी के कोचांग में पांच युवतियों के साथ हुए गैंगरेप में पुलिस जिस जॉन जुनास तिडू को मास्टर माइंड बता रही है, वह अब खुद इस मामले में डील चाहता है। तिड़ू ने मंगलवार को फोन पर दैनिक भास्कर को बताया कि पुलिस उसे फंसा रही है। पीड़िताओं में एक उसके गांव की बहू है, फिर भी उसे ही मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

कहा, मामले में ग्रामीण जानकारी भी नहीं देंगे: उसने दावा किया कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही कहा कि यदि पुलिस इस केस से उसका नाम हटा ले तो बाकी आरोपियों तक पहुंचने में वह पुलिस की मदद करेगा। उसने कहा कि इस मामले में पुलिस अगर गांवों में जाकर लोगों से पूछताछ भी करेगी तो कोई जानकारी नहीं देगा, मगर हमलोग ग्रामीणों से पूछेंगे तो ग्रामीण जरूर बताएंगे कि गैंगरेप के आरोपी कब और कहां देखे गए हैं।

पुलिस कहीं भी कैंप लगा लें, जारी रहेगी पत्थलगड़ी: खूंटी के घाघरा, कोचांग में पुलिस कैंप लगाए जाने से संबंधित सवाल पर तिड़ू ने कहा कि पुलिस को जहां मन करे, कैंप लगाए। पुलिस तानाशाही रवैया अपना रही है। जैसा मर्जी है करे, लेकिन आदिवासियों का हक नहीं छीन सकती। पत्थलगड़ी आगे भी जारी रहेगी। लेकिन पुलिस के दमनकारी रवैये की वजह से इसका रूप बदलेगा। पुलिस की तानाशाही अगले वर्ष समाप्त हो जाएगी। लोक सभा और विधानसभा चुनाव के बाद पुलिस को पता चलेगा शासन क्या होता है।

डीआईजी बोले- पहले सरेंडर करे, फिर देंगे जवाब: रांची प्रक्षेत्र के डीआईजी एवी होमकर ने कहा-जॉन जुनास तिड़ू अपराधी है। जब तक वह सरेंडर नहीं करता, तब तक उसके सवालों का जवाब नहीं दे सकता। तिड़ू पर कोचांग गैंगरेप के अलावा चार जवानों को अगवा करने का मामला दर्ज है। वह मानता है कि दुष्कर्म मामले में वह नहीं था। लेकिन जिस दिन सांसद कड़िया मुंडा के आवास से जवानों को अगवा किया गया था, उस दिन वह उपस्थित थे। इसलिए इस मामले में उसे तुरंत सरेंडर कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने कुरूंगा सहित आसपास के गांवों में कैंप लगाया है।

राज्यभर के आदिवासी समुदाय के लोग वोटिंग में शामिल नहीं होंगे: तिडू ने कहा कि आदिवासियों के लिए लोकतंत्र नहीं है। लोकतंत्र सामान्य सम्यक क्षेत्रों के लिए है। आदिवासी नॉन ज्यूडिशियल क्षेत्र में रहते हैं। इसलिए खूंटी सहित राज्यभर के आदिवासी वोटिंग में शामिल नहीं होंगे। वोट व्यवस्था के कारण देश की खनिज संपदा भी लूटी जा रही है। उसने कहा कि वर्ष 1996 में पेसा कानून बना। लेकिन हमारे अधिकार को छीन लिया गया। इस पेसा कानून के माध्यम से पंचायती राज व्यवस्था लाया गया। लेकिन यह व्यवस्था भी आदिवासियों के हक-अधिकार का हनन कर रही है। अब लोकसभा, विधानसभा और आगामी पंचायत चुनाव भी नहीं होने देंगे।