फैसला / 70 वर्षीया महिला के साथ गैंगरेप के आरोपी को 21 वर्षों की सजा और 10 हजार जुर्माना



Latehar news Gangrape convicted for life imprisonment for 21 years
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Latehar news Gangrape convicted for life imprisonment for 21 years

  • अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय अनिल कुमार पांडेय की अदालत ने सुनाया फैसला
  • अदालत में पीड़िता ने कहा था- असहनीय पीड़ा दी है गुजा सिंह ने
  • अदालत ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान का आदेश सरकार को दिया 

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 07:42 PM IST

लातेहार. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय अनिल कुमार पांडेय की अदालत ने चर्चित गैंगरेप मामले में अपना फैसला सुनाते हए आरोपी गुजा सिंह उर्फ योगेंद्र सिंह को 21 वर्षों का सश्रम कारावास व 10 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। घटना 22 सिंतबर, 2015 को बरवाडीह थाना क्षेत्र के लेदगाई गांव की है, जब 70 वर्षीया वृद्धा अपनी बेटी के घर से अपने घर वापस जा रही थी। 

 

एक आरोपी था नाबालिग, तीन साल के लिए भेजा है रिमांड होम

पीड़िता के ब्यान पर बरवाडीह थाना में मामला दर्ज किया गया था। दर्ज मामले के मुताबिक, जैसे ही वह पीपराडीहा नाला के पास पहुंची थी कि बाइक पर सवार तीन युवकों ने उसे जबरन पकड़ लिया तथा एक पेड़ के नीचे पटककर हाथ बांधकर उसके साथ छेड़छाड़ करने लगे। जब वह काफी आरजू-मिन्नत करते हुए छोड़ने की गुहार लगाई तो एक युवक दीपक सिंह वहां से चला गया तथा गुजा सिंह उर्फ योगेंद्र सिंह एवं चुनमुन सिंह ने उसके साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद आरोपी उसे वहां से छोड़कर भाग गए। शिकायत के बाद आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज था, तभी से गुजा सिंह जेल में था। एक अन्य आरोपी को नाबालिग घोषित होने के बाद गत 20 मई, 2016 को वाद पृथक करके जेजे बोर्ड को भेज दिया गया था। विचारण के दौरान किशोर को तीन वर्षों के लिए रिमांड होम में भेज दिया गया था। 

 

नौ गवाहों ने दिया बयान
प्रभारी लोक अभियोजक बलराम साह ने मामले में तत्कालीन अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कौशिक मिश्रा समेत कुल नौ गवाहों को पेश किया था। मेडिकल रिपोर्ट में डॉ. धर्मशीला चौधरी ने बलात्कार की पुष्टि नहीं की थी, जबकि पीड़िता ने बलात्कार की बात अदालत में बताई थी। संबंधित धारा के तहत पीड़िता का बयान दर्ज करनेवाले न्यायिक पदाधिकारी कौशिक मिश्रा ने अपनी गवाही में पीड़िता के बयान को सही ठहराया था। गवाहों व पीड़िता के बयान के आधार पर अदालत ने आरोपी को का दोषी पाया तथा 21 वर्षों का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष अतिरिक्त कारावास में रखने का आदेश पारित किया। अदालत ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति मुआवजा देने का भी आदेश पारित किया है।

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