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मजदूर दिवस पर माकपा ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि, लगाए एकता के नारे

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:25 AM IST

News - चंदवा प्रखंड के अलौदिया में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मजदूर दिवस पर बैठक आयोजित कर शहीद वेदी पर...

मजदूर दिवस पर माकपा ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि, लगाए एकता के नारे
चंदवा प्रखंड के अलौदिया में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मजदूर दिवस पर बैठक आयोजित कर शहीद वेदी पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। शहीदों के प्रति एक मिनट का मौन धारण किया गया। मजदूर एकता जिंदाबाद, शहीदों ले लो लाल सलाम, शहीदों तेरे अरमानों को मंजिल तक पहुंचाएंगे, मजदूर दिवस अमर रहे के नारे लगाए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता बैजनाथ ठाकुर ने की।

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए जिला सचिव सुरेंद्र सिंह व वरिष्ठ नेता अयूब खान ने कहा कि एक मई को पूरी दुनिया के हर हिस्से में मजदूर अपने-अपने क्षेत्र में इकट्‌ठे होकर अपने हक के लिए एकताबद्ध आवाज बुलंद करते हैं। 1889 से आज तक लाल झंडे लेकर मजदूर लड़ते आ रहे हैं। पहली बार अमेरिका के शिकागो शहर में 1 मई, 1889 का यह पहला मौका था जब अमेरिका के शिकागो के हजारों मजदूरों ने सफेद झंडे को लेकर संगठित होकर मांग की थी कि 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम व 8 घंटे मनोरंजन के हों, इस तरह 24 घंटों के बंटवारे की मांग की थी। न्यूनतम वेतन तय हो, इसे लेकर सफेद झंडे के साथ इंसाफ की मांग कर रहे निहत्थे मजदूरों को गोलियों का निशाना बनाया गया।

इंसाफ के लिए निकले सफेद झंडा मजदूरों के खून से लाल हो गया। इंसाफ की लड़ाई हक लेने की लड़ाई में तब्दील हो गई। खून से रंगे हुए झंडे को दुनिया के तमाम मजदूरों ने अपने संघर्षों के झंडे के रूप में अपना लिया और इसके बाद पूरी दुनिया के अंदर मालिक और मजदूरों के बीच संघर्ष होते रहे। सरकार तथा पूंजीपतियों को झुकना पड़ता है। तब जाकर आठ घंटे काम करने का कानून बना, लेकिन आज भी मजदूरों मेहनतकशों का शोषण जारी है। उनका हक अधिकार छीना जा रहा है। न्यूूूनतम मजदूरी से वे वंचित हैं। कार्यस्थल पर मजदूरों को कोई सुविधा नहीं मिलती है। अत्याचार समाप्त करने के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। जब तक मेहनतकशों का शोषण रहेगा दुनिया में किसी भी तरह से शांति स्थापित नहीं हो सकती। शोषणकारी शक्तियों को उखाड़ फेंककर मेहनतकशों की सत्ता व समाजवादी समाज की स्थापना की जा सकती है। मौके पर रसीद मियां, ललन राम, मनु उरांव, निकोलस भेंगरा, बैजु उरांव, लालचंद उरांव, बसंत राम सहित कई लोग उपस्थित थे।

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