Hindi News »Jharkhand »Ranchi »News» बच्चों ने कहा- सर! हमलोगों को बहुत दिनों से रोटी नहीं मिली है, हार्लिक्स पीते हैं तो लगता गर्म पानी पी रहे हैं

बच्चों ने कहा- सर! हमलोगों को बहुत दिनों से रोटी नहीं मिली है, हार्लिक्स पीते हैं तो लगता गर्म पानी पी रहे हैं

अजय कुमार तिवारी | धनबाद/ रांची राज्य के अनुसूचित जाति के बच्चों को सरकार के द्वारा आवासीय सुविधा देते हुए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:35 AM IST

बच्चों ने कहा- सर! हमलोगों को बहुत दिनों से रोटी नहीं मिली है, हार्लिक्स पीते हैं तो लगता गर्म पानी पी रहे हैं
अजय कुमार तिवारी | धनबाद/ रांची

राज्य के अनुसूचित जाति के बच्चों को सरकार के द्वारा आवासीय सुविधा देते हुए शिक्षा की व्यवस्था को लेकर राजकीय अनुसूचित जाति आवासीय उच्च विद्यालयों को गठन किया गया है। धनबाद के गोविंदपुर प्रखंड में पड़ने वाले तथा कमल कटेसरिया स्कूल के आगे स्थित इस आवासीय विद्यालय की स्थिति इतनी जर्जर हाे चुकी है कि यहां के बच्चों की स्थिति देखकर किसी को माया आ जाए। लेकिन प्रशासन है कि उसे कभी इन पर दया नहीं आती है। तभी तो बिना पंखा के बच्चे रहते है और फर्श इतना खराब की उस पर चलना भी मुश्किल है। सरकार सुविधाएं देने में कभी कोताही नहीं करती है लेकिन उसे धरातल पर लागू करने के लिए स्थानीय प्रशासन सही पहल नहीं करता है। तभी तो लाखों खर्च होने के बाद भी यह आवासीय विद्यालय अपनी कुव्यवस्था के लिए जाना जाने लगा है। डीबी स्टार की टीम को देखते ही बच्चों ने कहना शुरू कर दिया कि सर हमलोगों ने कई दिनों से रोटी नहीं खाया है। अंडा भी कम मिलता है और जब हार्लिक्स मिलता है तो लगता है कि गर्म पानी पी रहे हैं। हार्लिक्स की मात्रा काफी कम रहती है। दिन में मेन्यू में जो खाना है वह तो मिल जाता है लेकिन रात में नहीं। रात में भी हमलोगों को चावल ही खाने के लिए मिलता है रोटी मांगते है तो कहा जाता है कि स्टाफ कम है अभी रोटी नहीं मिलेगा। बच्चों ने काफी उत्सुकता से पूछा कि सर हमलोगों को रोटी कब मिलेगा।

कमीशन के लालच में डॉक्टर मरीजों से कर रहे हैं खिलवाड़

दवा कंपनियों द्वारा बार-बार ड्रग कॉम्बिनेशन बदले जाने का असर सीधा मरीज पर पड़ता है। जिस ड्रग की जरूरत मरीज को नहीं होती, उसे भी मरीज को कॉम्बिनेशन की वजह से खाना पड़ता है।

डीबी स्टार बोकारो/जमशेदपुर

नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) पर दवा कंपनियों की चालाकी भारी पड़ रही है। ड्रग प्राइजिंग कंट्रोल आॅर्डर (डीपीसीओ) से बचने के लिए देशभर की दवा कंपनियां अब नया तरीका अपना रही हैं। जो दवाएं डीपीसीओ में आ चुकी हैं, कंपनियां उनका उत्पादन कम कर उससे मिलती-जुलती दवाएं बाजार में उतार देती हैं। चूंकि ये दवाइयां डीपीसीओ से बाहर होती हैं। एेसे में कमीशन के लालच में डॉक्टर जमकर ये दवाइयां मरीजों को लिखने लगते हैं। कंपनियों की इस चालाकी से जहां मरीज महंगी दवाइयां लेने को मजबूर हैं, वहीं कमीशनखोरी काे भी बढ़ावा मिल रहा है। एनपीपीए के अफसर भी इस बात को स्वीकार रहे हैं कि दवा कंपनियों के लगातार फार्मूले चेंज करने एवं नए कॉम्बिनेशन बाजार में उतारने से उन दवाइयों को डीपीसीओ में लेने में दिक्कत आती है, क्योंकि उससे मिलती-जुलती दवा का कॉम्बिनेशन पहले से ही डीपीसीओ में शामिल रहता है। डीबी स्टार ने इस मामले में एनपीपीए के डायरेक्टर प्राइजिंग से बात की तो उनका कहना था कि हम इस तरह के मामलों की समीक्षा कर रहे हैं।

ऐसी स्थिति में रहने को मजबूर हैं बच्चे

इतनी बदत्तर स्थिति में रहने को मजबूर हैं विद्यालय के छात्र, कहने को तो सरकार हर सुविधा मुहैया करवाती है पर जांच करने पर असली स्थिति पता चलती है।

हॉस्टल में नहीं लगे हैं पंखे, बच्चों ने पंखों को बना दिया डंबल

हॉस्टल का डीबी स्टार ने निरीक्षण किया तो पाया गया कि पंखे नहीं है कहीं लटक भी रहे है तो उसका कनेक्शन नहीं है। वहीं कई जगहों पर देखा गया कि बच्चों ने दो पंखों को जोड़कर डंबल बना दिया। कहते है कि जब चलता ही नहीं है तो हमलोग इससे बॉडी बनाते है। गर्मी काफी लगता है दिन तो किसी तरह से कट जाता है लेकिन रात में मच्छर और गर्मी से हमलोग परेशान रहते हैं।

दवा कंपनियों के नए-नए फाॅर्मूले से परेशान अफसर

815

वायरिंग बिना बर्बाद होता हॉस्टल।

दवाएं अब तक डीपीसी में ला चुका है एनपीपीए

कुछ तो काम आया पंखा

विद्यालय में पंखा तो दे दिया गया, पर मेंटेनेंस की वजह से खराब होने पर छात्रों ने दो पंखे को जोड़कर डंबल बना दिया। जो कि अब शरीर बनाने के काम लाया जा रहा।

ऐसे किया बदलाव

एंटी बॉयोटिक : एमपीसिलिन क्लोक्साॅसिन दवा पहले 50 रुपए की स्ट्रिप आती थी। डीपीसीओ में आते ही यह 19 रुपए की हो गई। दवा कंपनियों ने एमोक्सीलिन डाइक्लोसाॅसिन कॉम्बिनेशन बाजार में उतार दिया, जिसकी कीमत 70 रु. है।

पेन किलर : आइबूप्रोफेन पेरासिटामोल की स्ट्रिप 20 रु. की थी। डीपीसीओ के बाद यह 6 रुपए की हो गई। कंपनियों ने 50 रुपए कीमत का एसेक्लोफेनिक पेरासिटामोल व सेरेपेटटेडाइज का काॅम्बिेशन उतार दिया।

एंटीबॉयोटिक : सेफट्राइक्सोन इंजेक्शन पहले 100 रु. में बिकता था, डीपीसीओ के बाद इसकी कीमत 50 रु. रह गई। अब कंपनियों ने सिफाप्रोजोन व सेलवेक्टम के नाम से ड्रग बाजार में उतार दिया जो 150 रु. का है। (उक्त नाम तो उदाहरण मात्र हैं, बाजार में इस तरह की सैकड़ों दवाएं बिक रही हैं)

वायरिंग के अभाव में बच्चों को शिफ्ट नहीं किया गया

नया हॉस्टल वर्ष 2009 से ही बनकर तैयार है । उसमें वायरिंग ही नहीं है तो बच्चों को कैसे शिफ्ट किया जाए। बच्चों को खेलने के लिए गेंद उपलब्ध कराया जाता है। रोटी नहीं मिलने की बात पर कहा कि ऐसी बात नहीं है। बच्चों को सारी सुविधाएं दी जाती है। रीता कुमारी, प्रिंसिपल, राजकीय अनुसूचित जाति आवासीय उच्च विद्यालय, गोविंदपुर, धनबाद

Get the latest IPL 2018 News, check IPL 2018 Schedule, IPL Live Score & IPL Points Table. Like us on Facebook or follow us on Twitter for more IPL updates.
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Ranchi News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: बच्चों ने कहा- सर! हमलोगों को बहुत दिनों से रोटी नहीं मिली है, हार्लिक्स पीते हैं तो लगता गर्म पानी पी रहे हैं
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0
    ×