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राजधानी को अपराध मुक्त बनानेवाले प्रवीण सिंह को दी गई अंतिम विदाई

झारखंड कैडर के 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार को विशेष विमान से दिल्ली से रांची...

Danik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:15 AM IST
झारखंड कैडर के 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार को विशेष विमान से दिल्ली से रांची लाया गया। साथ में उनकी प|ी, दोनों बच्चे और पूर्व मुख्यमंत्री जगदंबिका पाल आए। रांची एयरपोर्ट से पार्थिव शरीर सीधे डोरंडा स्थित जैप वन के परेड ग्राउंड में ले जाया गया। यहां मुख्यमंत्री रघुवर दास की ओर से शहरी विकास मंत्री सीपी सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी, नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन, मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, डीजीपी डीके पांडेय समेत प्रशासनिक अफसरों ने श्रद्धांजलि दी। जैप वन से पार्थिव शरीर एचईसी सेक्टर तीन स्थित ई टाइप आवास पर लाया गया। यहां एचईसी सीएमडी अभिजीत घोष की ओर से वरीय अधिकारी एस सुब्रह्मण्यम ने श्रद्धा पुष्प चढ़ाए। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो, जल संसाधन मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी सहित शहर के गणमान्य लोग श्रद्धांजलि देने के लिए आवास आए थे। मालूम हो कि दिल्ली के मैक्स अस्पताल में रविवार को लंबी बीमारी के बाद प्रवीण सिंह का निधन हुआ था। रांची के एसएसपी के रूप में प्रवीण सिंह ने शहर को अपराध मुक्त बनाया था। शहर को अपराध मुक्त बनाने में जनता की ससहायता ली थी और गुप्तचर बनाए थे। वे मूल रूप से सस्तीपुर के रहनेवाले थे। वर्तमान में वे पुलिस उप-महानिरीक्षक, एनआईए, नई दिल्ली के पद पर कार्यरत थे।

अंतिम विदाई के मौके पर आईपीएस प्रवीण कुमार सिंह की प|ी और उनका बेटा। बगल में सलामी देते पुलिस अफसर।

छोटा बेटा नाना जगदंबिका पाल से लिपटा रहा

शाम में पार्थिव शरीर हरमू मुक्तिधाम लाया गया। प्रवीण सिंह के बड़े बेटे प्रणव ने उन्हें मुखाग्नि दी। बगल में खड़ा छोटा बेटा प्रणेत अपने नाना जगदंबिका पाल से लिपटा हुआ था। मुखाग्नि से पूर्व जैप जवानों ने सलामी दी। उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इधर, आईपीएस एसोसिएशन ने पुलिस मुख्यालय में शोकसभा की। डीजीपी ने निधन को झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताई। पुलिस महानिरीक्षक, प्रशिक्षण प्रिया दुबे ने बताया कि बताया कि प्रवीण 1998 बैच के काफी लोकप्रिय पदाधिकारी थे। इन्होंने अपना प्रारंभिक प्रशिक्षण एनपीए, हैदराबाद से किया। वे झारखंड के राज्यपाल के एडीसी बनाए गए। इन्होंने बोकारो व पलामू में एसडीपीओ के रूप में सेवा दी।

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