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मां-बाप की खिदमत में जिहाद से ज्यादा सवाब

मां और बाप क्या होते हैं, कभी उनसे पूछिए जो इनसे वंचित हैं। ममता और वात्सल्य ऐसी ताकत है, जिसके बल पर इंसान बड़ी से...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:20 AM IST
मां-बाप की खिदमत में जिहाद से ज्यादा सवाब
मां और बाप क्या होते हैं, कभी उनसे पूछिए जो इनसे वंचित हैं। ममता और वात्सल्य ऐसी ताकत है, जिसके बल पर इंसान बड़ी से बड़ी मुसीबत का सामना करने को तैयार हो जाता है। इसलिए इस्लाम ने मां-बाप के लिए औलाद को कई हुक्म दिए हैं। जिनको मानना उनके लिए इतना ही जरूरी है, जितना कि अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत न करना। इस्लाम कहता है, अपने मां-बाप के साथ अच्छा सुलूक करो। अल्लाह से उनके लिए दुआ करो कि वह उन पर करम करे। अपने मां-बाप से सच्चे दिल से मोहब्बत करें। हर पल उन्हें खुश रखने की कोशिश करें।

अपनी कमाई दौलत, और संपत्ति उनसे न छुपाएं। इस्लाम ने मां के कदमों तले जन्नत कहा है, वहीं पिता को जन्नत का दरवाजा। इस पहलू को हमें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हुजूर (स.) का इरशाद है कि वह आदमी जलील हो, जलील हो, जलील हो। लोगों ने पूछा, कौन है वो आदमी। आपने कहा, जिसने मां-बाप को बुढ़ापे की हालत में देखा और उनकी खिदमत न की। रसूल अल्लाह(स.) ने इरशाद फरमाया, मां-बाप की बददुआ से बचो, क्योंकि वो बादलों को फाड़ कर मंजूरी के दरवाजे तक पहुंचती है। अल्लाह उसे तुरंत कबूल करता है। मां की बददुआ तो तलवार से भी ज्यादा तेज होती है। मां से बदतमीजी करने वाला सबसे बड़ा गुनाहगार होता है।

एक बार किसी ने नबी अकरम से पूछा, तो उससे फरमाया कि क्या तुम्हारी मां जिंदा है। उसने कहा, हां मेरी मां जिंदा हैं। आपने फरमाया, उनकी इज्ज्तत करो, उनका कहना मानो, क्योंकि उनके पैर के नीचे जन्नत है। एक और हदीस में आया है कि एक व्यक्ति ने कहा, या रसूल अल्लाह (स.) मैं जिहाद में जाना चाहता हूं। आपने फरमाया अगर तुम्हारे मां-बाप बहुत बूढ़े हैं, तो जाओ उनकी ख़िदमत (सेवा) करो। अल्लाह की कसम उनकी एक रात की ख़िदमत जिहाद से ज्यादा सवाब रखती है। नबी (स.) का इरशाद है कि औलाद का मां-बाप को मोहब्बत भरी नज़रों से देखना भी एक हज का सवाब रखता है।

(लेखक रांची सेंट्रल मुहर्रम कमेटी के महासचिव हैं।)

इस्लाम

अकील-उर-रहमान, रांची

इस्लाम कहता है- अपने मां-बाप के साथ अच्छा सुलूक करो, अल्लाह से उनके लिए दुआ करो कि वह उन पर करम करे

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