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बुंडू राधा-कृष्ण नवरात्रि मंदिर में वैशाख शुक्ल तृतीया से नौ दिनों तक होता है संकीर्तन

रांची से 42 किलोमीटर दूर बुंडू है, जहां का राधा-कृष्ण नवरात्रि मंदिर पूरे इलाके में प्रसिद्ध है। नवरात्रि टोली के...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 03:20 AM IST
रांची से 42 किलोमीटर दूर बुंडू है, जहां का राधा-कृष्ण नवरात्रि मंदिर पूरे इलाके में प्रसिद्ध है। नवरात्रि टोली के विशाल प्रांगण में भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी जी का सुंदर एवं भव्य नवरात्रि मंदिर लगभग एक एकड़ भूमि पर बना हुआ है। श्रीकृष्ण और राधारानी जी का यह मंदिर काफी प्राचीन माना जाता है। मंदिर के विशाल प्रांगण के अंदर जाते ही एक अनुपम शांति की अनुभूति होती है। नवरात्रि के इस मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन कलश की स्थापना की जाती है एवं उसके दूसरे दिन से नौ दिन और रात्रि हरीनाम का संकीर्तन किया जाता है। यहां होनेवाले कीर्तन को सुनने के लिए आस-पास के गांव-देहात से लोग उपस्थित होते हैं। इस अवसर पर यहां विशाल एवं भव्य मेले का आयोजन भी होता है।

श्रीकृष्ण-राधा रानी यहां रचाते थे रास

नवरात्रि मंदिर में रखी गई श्रीकृष्ण की मूर्ति काफी प्राचीन है। कहा जाता है कि वर्षों पहले यहां का स्थानीय निवासी भोला घासी अपने जानवरों को चराने पास के जंगल गया था। वहां उन्होंने एक अनुपम दृश्य देखा। श्रीकृष्ण और राधारानी जी रास रचाते झूला झूल रहे थे। भोला को देखकर राधारानी जी वहां से चली गईं और कृष्णजी पाषाण मूर्ति हो गए। उसी रात्रि भोला जी को श्रीकृष्ण और राधा रानी जी के लिए मंदिर स्थापित करने का स्वप्न आया। धीरे-धीरे यह बात फैल गई। चंदा जमाकर मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। मंदिर का कार्य संपन्न होने पर श्रीकृष्ण जी की उसी पाषाण मूर्ति और राधारानी जी की पीतल से बनी हुई मूर्ति प्रतिस्थापित की गई। नवरात्रि मंदिर में कृष्ण जी और राधा रानी जी को तीनों पहर पूजन एवं भोग अर्पण किया जाने लगा।

प्रतिमा के रंग में होता है परिवर्तन

नवरात्रि मंदिर में एक अनुपम शांति का अहसास होता है। कृष्ण और राधारानी जी नित नए परिधानों में सुजज्जित किए जाते हैं। मंदिर परिसर में एक बड़ा-सा बरगद का पेड़ है, जहां चलने वाली मंद-मंद वायु में एक अनूठा आकर्षण है। कहा जाता है कि कृष्ण की प्रतिमा को अगर काफी देर तक एकटक देखा जाए तो नीले रंग में परिवर्तित हो जाती है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भव्य झूलन का भी आयोजन किया जाता है।

विनीता चैल, बुंडू, रांची