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आदिवासी ग्राम विकास समिति गठित करने के संकल्प को खारिज करने की मांग

5 वर्ष पहले
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पंचायती राज दिवस के अवसर पर ही राज्य भर के मुखिया ने मंगलवार को मुखिया संघ झारखंड प्रदेश के नेतृत्व में राजभवन के प ास धरना दिया। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। धरना में शामिल मुखिया का कहना था कि संविधान के 73वें संशोधन का मुख्य लक्ष्य ग्राम स्तर पर स्थानीय स्वशासन स्थापित करना है। इससे जनता की प्रत्यक्ष भागीदारी ग्राम सभा के माध्यम से हो। हर स्तर के पंचायत के जनप्रतिनिधि ग्राम सभा के निर्णयों के अनुरूप कार्य कर सकें। झारखंड पंचायती राज अधिनियम की धारा-10 में ग्राम सभा की शक्तियों और कार्यों का वर्णन है। इसके तहत ग्राम विकास समिति का गठन पंचायत चुनाव के बाद ही हो चुका है। इसके बाद भी ग्रामीण विकास विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा 13 मार्च 2018 के निर्देश में पुन: आदिवासी विकास/ग्राम विकास समिति का गठन करना गैर संवैधानिक है। राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा को पेसा के तहत विशेष शक्तियां प्राप्त हैं। ऐसे में पंचायती राज विभाग के द्वारा निकाला गया संकल्प झारखंड पंचायती राज अधिनियम को कमजोर करेगा।

राज्य भर के मुखिया का राजभवन के पास धरना

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