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गुनाहों से मुक्ति के लिए होगी इबादत

इस्लामी महीने शाबान की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शब-ए-बरात शुरू होता है। यह दो शब्दों शब और बरात से मिलकर बना है।...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:35 AM IST
इस्लामी महीने शाबान की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शब-ए-बरात शुरू होता है। यह दो शब्दों शब और बरात से मिलकर बना है। शब का अर्थ रात है वहीं बरात का मतलब बरी होना होता है। मुसलमानों के लिए यह रात बेहद फज़ीलत (महिमा) वाली होती है। वे अल्लाह की इबादत करते हैं। दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। इबादत, तिलावत और सखावत (दान-पुण्य) का पर्व शब-ए-बरात इस बार मंगलवार को पड़ रहा है। इसके लिए रांची की मस्जिदों और कब्रिस्तानों में खास सजावट की गई है। सारी रात इबादत और तिलावतों का दौर चलेगा।

मुस्लिम धर्मावलंबी दुनिया से कूच कर चुके अपने परिजनों की मगफिरत यानी मोक्ष की दुआएं करने के लिए मंगलवार रात गुजारकर बुधवार सुबह कब्रिस्तान जाएंगे। कहा जाता है कि पिछले साल किए गए कर्मों का लेखा-जोखा और आने वाले साल की तकदीर भी अल्लाह इस रात तय करता है। नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तान की जियारत और हैसियत के मुताबिक खैरात करना इस रात के अहम काम है। एदार-ए-शरीया झारखंड के नाजिम आला मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने शब-ए-बरात की झारखंड वासियों को बधाई दी है। उन्होंने बताया, पैगंबर-ए-इस्लाम ने फरमाया कि इस दिन सूरज डूबने के बाद से सूरज निकलने तक पूरी रात हर-तरफ अल्लाह तआला के रहमत के फरिश्ते आवाज लगाते रहते हैं कि है कोई रिज्क मांगने वाला है। अल्लाह तआला इस रात में सबकी मुरादें पूरी फरमाता है।

राजधानी की मस्जिदों और कब्रिस्तानों की सफाई के बाद हुई सजावट

हरगिज न करें आतिशबाजी


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