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ऐसा समाज बनाएं, जिसमें हर व्यक्ति को सर्वांगीण विकास में सहयोग मिले : आचार्य देवानंद अवधूत

आनंदमार्ग प्रचारक संघ के संस्थापक श्रीश्री आनंदमूर्ति जी का 97वां जन्मदिन सोमवार पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया...

Danik Bhaskar | May 01, 2018, 03:35 AM IST
आनंदमार्ग प्रचारक संघ के संस्थापक श्रीश्री आनंदमूर्ति जी का 97वां जन्मदिन सोमवार पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया मनाया गया। इस अवसर पर हेहल स्थित मधु मंजूषा आनंदमार्ग आश्रम में अनुष्ठान हुए। 9 घंटे का बाबा नाम केवलम अखंड कीर्तन हुआ।

बाबा श्रीश्री आनंदमूर्ति जी का जन्मदिवस धूमधाम से मनाया गया। आनंद मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्व देवानंद अवधूत ने कहा कि गुरु का जन्म 1921 में वैशाखी पूर्णिमा के दिन बिहार के जमालपुर में एक साधारण परिवार में हुआ था। परिवार का दायित्व निभाते हुए सामाजिक समस्याओं के कारण का विश्लेषण करने लगे। सन 1955 में उन्होंने आनंद मार्ग प्रचारक संघ की स्थापना की।

हेहल स्थित मधु मंजूषा आनंदमार्ग आश्रम में 9 घंटे का बाबा नाम केवलम अखंड कीर्तन हुआ।

हर एक मनुष्य देवशिशु है, यह सोच कर काम करें

श्रीश्री आनंदमूर्ति ने समझा कि जिस भौतिकवाद को वर्तमान मानव अपना रहे हैं, वह उनके ना शारीरिक व मानसिक और ना ही आत्मिक विकास के लिए उपयुक्त हैं। अतः उन्होंने ऐसे समाज की स्थापना का संकल्प लिया, जिसमें हर व्यक्ति को अपना सर्वांगीण विकास करते हुए अपने जीवन मूल्य को ऊपर उठाने का सहयोग प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि हर एक मनुष्य को शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में विकसित होने का अधिकार है। समाज का कर्तव्य है कि इस अधिकार को ठीक से स्वीकृति दें। वह कहते हैं कि कोई भी घृणा योग्य नहीं। किसी को शैतान नहीं कह सकते।

बुद्ध पूर्णिमा पर जैप-1 बुद्ध मंदिर से निकली प्रभातफेरी

रांची | डोरंडा स्थित जैप-1 में गोरखा समाज की ओर से सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार मनाा। जैप-1 स्थित बुद्ध मंदिर से प्रभातफेरी निकाली। पूजा-अर्चना की गई। प्रभातफेरी में भगवान बुद्ध के अनुयायी शामिल हुए। वरिष्ठ कांग्रेस नेता आलोक दुबे और विधायक नवीन जायसवाल भी पहुंचे। इससे पूर्व जैप-1 परिसर से भगवान बुद्ध की प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। बौद्ध धर्मावलंबियों का यह विश्वास है कि भगवान बुद्ध ने समाज को प्रेम, करुणा व अहिंसा का जो मार्ग दिखाया है, ईश्वर की प्रत्येक सृष्टि में उसे देखने की जरूरत है।