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एमजी रोड में ई-रिक्शा पर "नो-कंट्रोल’, 60 की जगह 200 ई-रिक्शा का हो रहा परिचालन

रांची के एमजी रोड में पेट्रोल-डीजल ऑटो के परिचालन पर रोक है। ऐसे में लोगों को परेशानी दूर करने के लिए ई-रिक्शा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:45 AM IST

  • एमजी रोड में ई-रिक्शा पर
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    रांची के एमजी रोड में पेट्रोल-डीजल ऑटो के परिचालन पर रोक है। ऐसे में लोगों को परेशानी दूर करने के लिए ई-रिक्शा सर्विस करीब दो साल पहले शुरू की गई है। लेकिन अब यही ई-रिक्शा लोगों के मुसीबत बन गई है। शहर के सबसे व्यस्ततम मार्गों में शुमार मेन रोड की यातायात व्यवस्था इसके कारण ध्वस्त नजर आ रही है। हालांकि, ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए नगर निगम ने ई-रिक्शा के लिए रूट पास निर्गत कर रखा है। इसके बाद भी व्यवस्था सुधरने की बजाय बिगड़ती जा रही है। सोमवार को मेन रोड स्थित गुरुद्वारा के समीप दिन के 1.25 बजे दैनिक भास्कर की टीम ने ई-रिक्शा परिचालन का जायजा लिया। महज 5 मिनट में ही अलबर्ट एक्का चौक से सुजाता चौक जाने वाले 118 ई-रिक्शा गुजरे। ऐसे में साफ है कि इस रोड पर 200 से अधिक ई-रिक्शा का परिचालन हो रहा है। जबकि, इस रूट के लिए नगर निगम ने महज 60 ई-रिक्शा को ही पास दिया है। इसके बावजूद बिना परमिट वाले ई-रिक्शा का परिचालन हो रहा है जिस पर नगर निगम का कोई कंट्रोल नजर नहीं आ रहा।

    कभी-कभार ही नगर निगम चलाता है अभियान

    तय संख्या से तीन गुणा अधिक ई-रिक्शा का परिचालन मेन रोड में हो रहा है। लेकिन इन पर नगर निगम अंकुश लगाने में पूरी तरह नाकाम नजर आ रही है। निगम कभी-कभार ही बिना रूट पास वाले ई-रिक्शा पर कार्रवाई करती है। इस दौरान 15-20 ई-रिक्शा पकड़ाते हैं, बाकी सभी दूसरे रूट में चले जाते हैं। हालांकि, एक दिन बाद ही फिर से बिना रूट पास के ही मेन रोड में चलने वाले ई-रिक्शा सड़क पर दिखने लगते हैं। ऐसे में साफ है कि नगर निगम नियमित रूप से कार्रवाई नहीं करती, जिसके कारण लोगों को जाम की परेशानी से गुजरना पड़ रहा है। क्योंकि, ई-रिक्शा वाले भी ऑटो चालकों की तर्ज पर सवारी देखते ही सड़क पर ही वाहन रोक देते हैं। ऐसे में पीछे से आ रहे वाहनों के एक्सीडेंट का खतरा भी लगातार बना रहता है।

    05 जोन में शहर बांटकर निगम ने ई-रिक्शा को दिया रूट पास

    ई-रिक्शा चालकों ने शहीद चौक और अलबर्ट एक्का चौक को बना दिया है स्टैंड

    यह है फाइन का प्रावधान

    पहली बार पकड़ाने पर 3000 रुपए

    दूसरी बार पकड़ाने पर 5000 रुपए

    तीसरी बार पकड़ाने पर 10,000 रुपए

    चौथी बार पकड़ाने पर 15,000 रुपए

    पांचवीं बार पकड़ाने पर 25,000 रुपए

    छठी बार पकड़ाने पर : ई-रिक्शा सील

    किस रूट पर कितने ई-रिक्शा को मिला है पास : जोन 1 : 111 ई-रिक्शा जोन 2 : 473 ई-रिक्शा जोन 3 : 191 ई-रिक्शा जोन 4 : 130 ई-रिक्शा जोन 4 : 89 ई-रिक्शा

    29 रूट में अलग-अलग संख्या में चल रहे हैं ई-रिक्शा

    रूट का पालन नहीं हो रहा है :मेन रोड में चलने वाले कई ई-रिक्शा ऐसे भी हैं। जिन्हें दूसरे रूट का पास मिला हुआ है। लेकिन वो भी मेन रोड में ही ई-रिक्शा चला रहे हैं। दरअसल मेन रोड में लोगों की आवाजाही अधिक होती है। ऐसे में इस रूट पर चलने वाले ई-रिक्शा चालकों की कमाई अच्छी-खासी होती है। जबकि, दूसरे रूट पर यात्रियों की संख्या कम होती है। यही वजह है कि हर कोई मेन रोड पर ही ई-रिक्शा चलाना चाहता है।

    पांच जोन बनाए गए हैं

    ई-रिक्शा के परिचालन के लिए नगर निगम ने कुल पांच जोन बनाए हैं। इन पांच जोन के अंदर 29 रूट तय किए गए हैं। प्रत्येक जोन में चार से सात रूट तय हैं। वहीं, हर रूट में वाहनों की संख्या भी तय की गई है। इसके तहत कुल 29 रूट में 994 ई-रिक्शा को परिचालन के लिए पास दिया गया है। लेकिन इसके बावजूद हर रूट में निर्धारित संख्या से दोगुना-तिगुना ई-रिक्शा चलाए जा रहे हैं।

    इंफोर्समेंट टीम का फोकस अतिक्रमण हटाने में

    मेन रोड सहित शहर के विभिन्न रूटों पर बिना परमिट वाले ई-रिक्शा चल रहे हैं, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। दरअसल इन दिनों निगम की इंफोर्समेंट टीम ई-रिक्शा के खिलाफ अभियान ही नहीं चला रही है। उनका ध्यान सिर्फ अतिक्रमण हटाने पर ही फिलहाल फोकस है। जिसके कारण बिना परमिट वाले भी बिना किसी डर के ई-रिक्शा चला रहे हैं।

    994 ई-रिक्शा को निगम ने दिया है रूट पास

    पकड़ाने पर सीज करते हैं

    पकड़ाने पर सीज करते हैं

    रेग्युलर अभियान नहीं चल पा रहा है, लेकिन महीने में दो-तीन बार इंफोर्समेंट टीम द्वारा जांच होती है। जांच के दौरान 15-20 ई-रिक्शा पकड़ाते भी हैं। पांच बार तक वाहनों को पकड़ने के बाद फाइन लिया जाता है। उसके बाद पकड़ाने पर सीज की कार्रवाई होनी है। -डॉ. किरण कुमारी, हेल्थ ऑफिसर सह प्रभारी इंफोर्समेंट सेल, रांची नगर निगम

    रेग्युलर अभियान नहीं चल पा रहा है, लेकिन महीने में दो-तीन बार इंफोर्समेंट टीम द्वारा जांच होती है। जांच के दौरान 15-20 ई-रिक्शा पकड़ाते भी हैं। पांच बार तक वाहनों को पकड़ने के बाद फाइन लिया जाता है। उसके बाद पकड़ाने पर सीज की कार्रवाई होनी है। -डॉ. किरण कुमारी, हेल्थ ऑफिसर सह प्रभारी इंफोर्समेंट सेल, रांची नगर निगम

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