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श्रीमद् भागवत से जितना आप अलग रहेंगे, परमानंद से दूर होते चले जाएंगे

महाराष्ट्र के चंद्रपुर से आए कथावाचक मनीष भाई महाराज ने कहा कि भाव गति विवेक और तत्व का सम्मिश्रण है श्रीमद््...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:50 AM IST

श्रीमद् भागवत से जितना आप अलग रहेंगे, परमानंद से दूर होते चले जाएंगे
महाराष्ट्र के चंद्रपुर से आए कथावाचक मनीष भाई महाराज ने कहा कि भाव गति विवेक और तत्व का सम्मिश्रण है श्रीमद्् भागवत। इसमें डुबकी लगाएं, तो ईश्वर की प्राप्ति होगी। जितना आप इससे अलग रहेंगे परमानंद से दूर होते चले जाएंगे। भागवत से भगवान और स्वयं को जानने का मौका मिलता है। चुटिया केतार बागान स्थित कथास्थल वृंदावनधाम में 9 दिनी श्रीमद्् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में महाराज भक्तों को गुरुवार को संबोधित कर रहे थे। आयोजन श्रीभागवत सेवा समिति ने किया है। आयोजन समिति के अध्यक्ष राजीव कुमार सिंह ने बताया कि कथा प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम चार बजे से 07 बजे तक होगी। प्रतिदिन दो पाली में आयोजित कार्यक्रम में श्रीमद् भागवत के विभिन्न प्रसंगों की चर्चा होगी। इनमें कथा महात्म्य, नारद अवतार, शुकदेव प्राकट्य, वराह अवतार, कपिल अवतार, नरसिंह अवतार आदि पर चर्चा होगी।

श्रीमद् भगवत कथा ज्ञान यज्ञ पर संतश्री मनीष भाई महाराज से कथा सुनते श्रद्धालु।

जीवन में द्वंद्व को सहन करने वाला ज्ञानी : माधवानंद

चिन्मय मिशन आश्रम के आचार्य स्वामी माधवानंद ने कहा कि वह इंसान जो अपने सांसारिक जीवन की यात्रा में आने वाले तमाम उतार-चढ़ाव, सुख-दु:ख, लाभ-हानि और मान-अपमान अथवा जो उसके जीवन के द्वंद हैं, को सहन करता है, वही ज्ञानी है। वह गुरुवार को श्रीश्री मां आनंदमयी आश्रम, एमजी रोड में तीसरे दिन श्रीमद् भगवद् गीता के सांख्य योग अध्याय की व्याख्या कर रहे थे। स्वामी माधवानंद ने कहा कि इस संसार में पंडित वे हैं, जो मर गए हैं। उनके लिए और जो जीवित हैं, उनके लिए कभी शोक नहीं करते हैं। उनका मानना है कि इस संसार में जो भी आया है, उसे जाना है। अर्थात जन्म है तो उसके साथ मृत्यु भी सुनिश्चित है। इसलिए, मृत्यु से घबराएं नहीं, बल्कि उसके अकाट्य सत्य के रूप में स्वीकार करते हुए परलोक में स्थान सुनिश्चित करने के लिए भी काम करें। उन्होंने शरीर को नश्वर और उसमें रहने वाली आत्मा को अमर बताते हुए कहा कि प्रत्येक इंसान के जीवन में साधारणत: तीन अवस्था होते हैं, जिसमें कुमार, यौवन और वृद्धावस्था का है।

भागवत का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ आध्यात्मिकता में बढ़ना : शिवम

रांची | पुरुषोत्तम महीने में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आयोजन का उद्देश्य लोगों को जन-मन को आध्यात्मिक ज्ञान से तृप्त करना मात्र नहीं, बल्कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, अधिकाधिक पौधरोपण कर पर्यावरण बचाव व संरक्षण करने और अपनी आध्यात्मिक संस्कृति व इसके मूल्यों को अक्षुण्ण रखना है। कोलकाता से पधारे किशोरवय कथा व्यास श्री कृष्णानुरागी पंडित शिवम विष्णु पाठक ने गुरुवार को श्री श्याम मंदिर हरमू रोड में पत्रकारों से बात कर रहे थे। पंडित शिवम विष्णु पाठक ने बताया कि बांके बिहारी श्री कृष्ण भगवान की आशीष, योजना और इच्छा से उनका रांची में यह दूसरा आगमन है। इस आगमन का उद्देश्य श्री श्याम मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ है। मौके पर अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की राष्ट्रीय सचिव सुषमा अग्रवाल, श्याम मित्र मंडल रांची के अध्यक्ष हरि पेड़ीवाल, महामंत्री आनंद शर्मा, विश्वनाथ नारसरिया, राजेश शर्मा, विवेकानंद सारस्वत, सुरेश सरावगी, मुक्तेश्वर प्रसाद, कृष्णा अग्रवाल, गोपाल मुरारका व विष्णु पाठक आदि ने भी प्रेस को कई जानकारियां दी।

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Web Title: श्रीमद् भागवत से जितना आप अलग रहेंगे, परमानंद से दूर होते चले जाएंगे
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