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26 जून से मिजल्स रुबेला वैक्सिनेशन कैंपेन प्रोग्राम शुरू करने वाला 22वां राज्य होगा झारखंड

राज्य में 26 जून से शुरू हो रहे मिजल्स रुबेला वैक्सिनेशन कैंपेन की तैयारियों की समीक्षा के लिए गुरुवार को कैपिटोल...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 03:50 AM IST
राज्य में 26 जून से शुरू हो रहे मिजल्स रुबेला वैक्सिनेशन कैंपेन की तैयारियों की समीक्षा के लिए गुरुवार को कैपिटोल हिल में स्टेट कम्युनिकेशन प्लानिंग वर्कशाप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए (एनएचएम) के अभियान निदेशक कृपानंद झा ने कहा कि जिले में सिर्फ बैठक की खानापूर्ति करने से स्वास्थ्य कार्यक्रम सफल नहीं हो सकता, इसके लिए कम्युनिकेशन प्लान बनाकर उसपर गंभीरता से काम करना होगा। जिले के उपायुक्त को भी अभियान में शामिल किया जाएं। अभियान निदेशक ने कहा कि आईईसी सामग्री जिले के निचले स्तर के स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंच रहा है या नहीं इसकी मॉनिटरिंग की जाए। इस एक दिवसीय कार्यशाला में 26 जून से शुरू होने वाले मिलज्स रुबेला टीकाकरण अभियान से संबंधित कार्ययोजना बनाने के लिए विभिन्न जिलों के सिविल सर्जन और अन्य स्वास्थ्य पदाधिकारी भाग ले रहे थे।

खसरा और रुबेला टीकाकरण अभियान

खसरा और रुबेला टीकाकरण अभियान एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। इस अभियान के अंतर्गत नौ महीने से लेकर 15 साल तक के बच्चों का टीकाकरण किया जायेगा। इस अभियान में इस आयुवर्ग के बच्चों को चुना गया है, क्योंकि ऐसा देखा जाता है कि खसरा रुबेला के अधिकतर मामले 15 साल तक के बच्चों में पाये जाते हैं। सभी बच्चों का टीकाकरण प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा किया जाएगा। यानी टीकाकरण अभियान पूरी तरह सुरक्षित है। किसी भी प्रतिकूल स्थिति से निपटने के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सीय टीम उपलब्ध रहेगी। जो प्रतिकूल स्थिति से निपटने के लिए तुरंत सहायता करने पहुंचेगी।

खसरा से न्यूमोनिया, दस्त और अन्य बीमारी हो सकती है जो बच्चे के लिए घातक

कार्यशाला में अतिथियों ने बताया कि खसरा से न्यूमोनिया, दस्त और अन्य बीमारी हो सकती है, जो बच्चे के लिए घातक हो सकती है। खसरा रोग के कारण बच्चों में विकलांगता या उनकी असमय मृत्यु हो सकती है। वहीं गर्भावस्था के दौरान रुबेला संक्रमण के कारण शिशु जन्मजात दोषों के साथ जन्म ले सकता है। जैसे उसमें अंधापन, बहरापन, कमजोर दिमाग, जन्म के समय से ही दिल की बीमारी जैसे लक्षण पाए जा सकते हैं। जिन बच्चों को एमआर एमएमआर का टीका पहले भी दिया जा चुका है, उन्हें भी टीका दिया जाएगा।

निशुल्क दिया जाएगा: टीका सभी सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, और स्कूलों में निशुल्क लगाया जाएगा। एमआर टीके का इस्तेमाल दुनियाभर में पिछले 40 सालों से किया जा रहा है। भारत के अलावा विश्व के कई देशों में बच्चों की सुरक्षा के लिए इसका इस्तेमाल हो रहा है। वहीं हमारे देश में निजी चिकित्सक एमआर/एमएमआर का टीका पिछले कई सालों से बच्चों को दे रहे हैं।