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झारखंड को मिले 2732 करोड़, सिर्फ जलापूर्ति व शौचालय पर काम, शिक्षा-स्वास्थ्य को छोड़ा

3 वर्ष पहले
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डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में जमा फंड और विभिन्न राज्यों में उक्त फंड से ली गई योजनाओं का स्टेटस रिपोर्ट जारी कर दिया गया है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में देश के सभी राज्यों में डीएमएफटी से हुए कार्यों पर रिपोर्ट जारी किया। केन्द्रीय खनन मंत्रालय की निदेशक डी.वीणा कुमारी ने देश भर से आए स्टेक होल्डर को बताया कि अभी तक 20 राज्यों ने डीएमएफटी रूल्स को नोटिफाई किया है। डीएमएफटी में अभी तक 19,955 करोड़ रुपए जमा हुए। इसमें विभिन्न योजनाओं के लिए 13,265 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सीएसई की निदेशक सुनीता नारायण ने बताया कि डीएमएफटी से आया पैसा खनन प्रभावित क्षेत्र में रहने वालों के कल्याण के लिए खर्च होना था, लेकिन सभी राज्यों ने अपने तरीके से इस फंड को खर्च किया। झारखंड में डीएमएफटी में 2,732 करोड़ रुपए आए हैं, 1,743 करोड़ रुपए की योजना स्वीकृत की गई है।

अब तक 537 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में सिर्फ जलापूर्ति और शौचालय पर ही जोर दिया गया। जबकि खनन से प्रभावित होने वाली आबादी को व्यवस्थित करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके आवास की व्यवस्था पर काम करने की जरूरत थी। खनन सचिव अबु बकर सिद्दकी ने कहा कि खामियों पर ध्यान देकर उसे दूर किया जाएगा। मौके पर धनबाद, बोकारो, चतरा, चाईबासा के डीसी सहित अन्य राज्यों के अधिकारी उपस्थित थे।

खनन प्रभावित लोगों के उत्थान के लिए नहीं बनाई गई योजना, आवास पर काम शुरू तक नहीं हुआ़, खान सचिव बोले-खामियों पर ध्यान देकर उसे दूर किया जाएगा
डिस्ट्रिक मिनरल फांडेशन का स्टेटस रिपोर्ट जारी करते सीएसई और खनन विभाग के पदाधिकारी।

अधिकारियों का जवाब- राजनीतिक दवाब की वजह से दूसरी योजना पर नहीं होता काम
पेयजल बड़ी समस्या, लाल-काला पानी पीते हैं लोग : झारखंड के खनन सचिव अबु बकर सिद्दीकी ने स्टेटस रिपोर्ट में जलापूर्ति पर जोर देने की बात सामने आने पर कहा कि झारखंड में पीने के पानी की स्थिति खराब है। दूसरे राज्यों में पीने योग्य पानी की उपलब्धता 60 प्रतिशत है तो झारखंड में 30 प्रतिशत। धनबाद का माइंस प्रभावित क्षेत्र में पानी का रंग काला है और चाईबासा में पानी का रंग लाल है। इन क्षेत्र के लोग काला और लाल पानी पीने को मजबूर हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री की पहल पर योजना बनाओ अभियान चलाया गया। इसमें लोगों ने सबसे अधिक पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग की। इसलिए जलापूर्ति योजना पर फोकस किया गया। खनन प्रभावित क्षेत्र में स्वच्छता पर भी पैसा खर्च किया गया। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर कैपिसिटी बिल्डिंग बड़ी समस्या है। 300-400 करोड़ रुपए की योजना का डीपीआर बनाना बड़ी समस्या है। ग्राम सभा की क्षमता बढ़ाने पर अब काम करने पर जोर दिया जा रहा है।

कहीं पार्किंग तो कहीं बिल्डिंग बना दी
सीएसई के उप निदेशक चन्द्रभूषण ने कहा कि डीएमएफटी के पैसे का कई स्तर पर दुरुपयोग हो रहा है। कई राज्यों में इस पैसे से पार्किंग, स्कूल और हेल्थ सेंटर बनाया है। वह भी शहर में । उन्होंने कहा कि झारखंड में झरिया सबसे अधिक प्रभावित है। यहां से लोग विस्थापित हो गए हैं। चाईबासा में खनन प्रभावित परिवार के बच्चों में कुपोषण का स्तर बढ़ गया है। इस समस्या को दूर करने के लिए एक रुपए खर्च नहीं किए गए। हालांकि कई जिला के डीसी ने कहा कि डीएमएफ के फंड पर काफी राजनीतिक दबाव रहता है। कोई पीसीसी रोड-नाली मांगता है तो कोई आंगनबाड़ी केन्द्र। इसलिए दूसरी योजनाओं पर काम करना मुश्किल है।

झारखंड में फंड का ऐसे हो रहा उपयोग
02 जिला हजारीबाग और रामगढ़ में डीएमएफटी के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बना, अन्य जिला में कोई काम नहीं।

1433 करोड़ रुपए की जलापूर्ति योजना स्वीकृत की गई धनबाद, बोकारो और चाईबासा में।

274 करोड़ रुपए स्वीकृत किया गया स्वच्छता पर शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

5.1 करोड़ रुपए स्वास्थ्य सुविधा देने की योजनाओं के लिए स्वीकृत किया गया।

31.5 करोड़ रुपए ब्रिज, बाउंड्रीवॉल, ट्रेनिंग सेंटर जैसी योजनाओं के लिए स्वीकृत। हालांकि डीएमएफटी में इसका प्रावधान नहीं है।

स्टेक होल्डर का सुझाव ग्रामीण विकास से डीएमएफ को जोड़ें
डीएमएफ के फंड का सही दिशा में उपयोग करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर बड़ी योजना बनानी होगी।

आईटी प्लेटफॉर्म बनाना होगा, ताकि सभी सूचनाएं पब्लिक डोमेन में रहे। योजना बनाने से लेकर खर्च का लेखा जोखा जरुरी।

केन्द्र सरकार को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनाना होगा, ताकि सभी राज्यों की मॉनिटरिंग किया जा सके।

डीएमएफ को ग्रामीण विकास विभाग से टैग किया जाए, ताकि खनन प्रभावित सभी क्षेत्र गांव में है। इससे बेहतर प्लानिंग होगी।

खनन प्रभावित क्षेत्र के लोगों को चिन्हित कर उनके पुनर्वास के लिए समेकित योजना तैयार किया जाए, ताकि आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित आधारभूत संरचना विकसित हो।

वाहनों के रजिस्ट्रेशन के समय पैन कार्ड देना जरूरी
संपत्ति और आय छिपाना मुश्किल, व्यवस्था लागू
राजीव कुकरेजा | रांची

अब सरकार से अपनी चल-अचल संपत्ति और आय छिपाना लोगों के लिए मुश्किल हो जाएगा। सरकार ने आदेश जारी कर किसी भी वाहन के पंजीयन और बिक्री करने पर पैन कार्ड नंबर देना अनिवार्य कर दिया है। यह आदेश नए वाहन की खरीद पर भी लागू हो गया है। किसी भी प्रकार का दुपहिया या चौपहिया वाहन खरीद रहे हैं, तो रजिस्ट्रेशन के लिए पैन कार्ड जरूरी होगा। इस संबंध में जिला परिवहन अधिकारी के कार्यालय में आदेश पहुंच गया है। साथ नए सॉफ्टवेयर पर नया कॉलम देखने के बाद इस संबंध में सूचना बोर्ड पर लगा दी गई है।

परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त शेखर जमुआर से मिली जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था केवल झारखंड में ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी लागू कर दी गई है। नए बदलाव के तहत अब अगर किसी को भी अपना नया वाहन पंजीकृत करवाना या पुराना वाहन खरीदकर अपने नाम पंजीयन करवाना होगा, तो उसके पास पैन नंबर होना जरूरी है। बिना पैन कार्ड के किसी भी वाहन का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा। अब सॉफ्टवेयर में पैन कार्ड का कॉलम अनिवार्य कर दिया गया है। इससे अब वाहन बेचने व खरीदने में भी पारदर्शिता बने रहने की उम्मीद है। वाहन खरीदने पर ग्राहक को अपना पूरा पता, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड और एक विटनेस भी देना पड़ेगा।

परिवहन विभाग से जुड़े काम बिना पैन कार्ड के नहीं
परिवहन विभाग में वाहन संबंधित किसी भी काम के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया है। अपने कार्यालय में यह साफ्टवेयर आ गया है। अब भविष्य में वाहन का पंजीयन समेत सभी तरह के काम बिना पैन कार्ड के नहीं हो पाएंगे। - नागेंद्र राय जिला परिवहन पदाधिकारी रांची

लोन, टैक्स जमा करने पर भी पैन नंबर जरूरी
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अगर वाहन मालिक के पास पैन नंबर नहीं है तो उसके नाम से वाहन का पंजीयन नहीं होगा। इसी प्रकार अगर परिवहन विभाग में दूसरे कामों में लोन कटवाने, गैसकिट फिट करवाने, लोन चढ़वाने, टैक्स जमा करवाने या फिर कोई भी काम होगा तो उसके लिए भी पैन नंबर देना होगा। वर्तमान व्यवस्था में पैन कार्ड बिना आधार कार्ड के नहीं बन सकता। ऐसे में सरकार ने आधार कार्ड को मजबूत करते हुए यह नई व्यवस्था की है।

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