रांची

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चूना, सीमेंट, अमोनिया, सफाई वाला डिटर्जेंट आंखों की कॉर्निया के लिए बेहद खतरनाक

आईएमए सभागार में रांची ऑप्थेलमिक फोरम के तत्वावधान में कॉर्निया वर्कशॉप आयोजन शनिवार रात किया गया

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2018, 07:14 PM IST
Lime, cement, ammonia, cleaning detergents are extremely dangerous for the cornea of the eyes

रांची. आईएमए सभागार में रांची ऑप्थेलमिक फोरम के तत्वावधान में कॉर्निया वर्कशॉप आयोजन शनिवार रात किया गया। इसमें कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सर्जरी की नई विधियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। वर्कशॉप में डॉ. निधि गडकर कश्यप ने कहा आंखों में एसिड से ज्यादा क्षारीय चीजों से नुकसान ज्यादा होता है। जैसे कि चूना, सीमेंट, अमोनिया, घर में सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाला डिटर्जेंट एवं आतिशबाजी। इन क्षारीय चीजों से आंखों की कॉर्निया के अंदरूनी सतह पर काफी नुकसान पहुंचता है। अम्लीय चीजें जैसे बैटरी का एसिड, विनेगर, नेल पॉलिश रिमूवर, स्विमिंग पूल एवं फैक्ट्री साफ करने का एसिड इत्यादि से भी आंखों के कॉर्निया पर काफी नुकसान पहुंचता है। इसके लिए जरूरी है कि स्पेशल सेफ्टी गोगल्स का इस्तेमाल किया जाए। क्योंकि समय पर इलाज नहीं होने से रोशनी जा सकती है।

डीसेक व डीमेक सर्जरी कॉर्निया ट्रांसप्लांट में काफी महत्वपूर्ण
कोलकाता से आए कॉर्निया विशेषज्ञ डॉ. समर बसाक ने कहा नेत्र प्रत्यारोपण की नई विधि लैमेलर केराटोप्लास्टी जैसे डीसेक व डीमेक सर्जरी में बिना पूरा कॉर्निया बदले सिर्फ कॉर्निया की अंदरूनी खराब परत को हटा कर नेत्र दाता की कॉर्निया की स्वस्थ अंदरूनी परत को प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। यह खास कर के मोतियाबिंद सर्जरी के बाद कभी-कभी कुछ कारणवश खराब हुई कॉर्निया की स्थिति में या केराटोकोनस बीमारी में या कॉर्निया की जन्मजात बीमारियों में विशेष फायदेमंद होता है। उन्होंने कहा कि नेत्र प्रत्यारोपण के बाद मरीजों की आखों की देखभाल किस प्रकार की जाए उसपर चर्चा की।

15 लाख लोगों को कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए इंतजार कर रहे
रांची ऑप्थेल्मिक फोरम की सचिव डॉ. भारती कश्यप ने बताया कि 15 लाख लोगों को कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए इंतजार कर रहे हैं। डिमांड और सप्लाई में बहुत बड़ा अंतर है। 25 से 30 हजार कॉर्निया ही हर साल हमारे देश में दान स्वरूप आती है। जिसका 60 प्रतिशत नेत्र प्रत्यारोपण में उपयोग होता है। नेत्र दान के फॉर्म को भरने से यह कमी नहीं पूरी हो सकती है। ज्यादा जरूरी है मृतक के नेत्र दान के लिए उनके परिजनों को प्रेरित करना और परिवार में किसी की मृत्यु होने पर परिवार के सदस्यों को मृतक के नेत्र दान के लिए प्रेरित करना। डॉ. बीपी कश्यप ने कहा कश्यप मेमोरियल आई बैंक झारखंड-बिहार का पहला एक्टिव आई बैंक है जहां साल में 25 से ज्यादा नेत्र प्रत्यारोपण होते हैं। आई बैंक एसोसिएशन इंडिया के मुताबिक वर्ष में 25 या उससे ज्यादा प्रत्यारोपण करने वाले आई बैंक को एक्टिव श्रेणी में रखा गया है।

कॉर्निया जनित दृष्टिहीनता के मरीजों के इलाज के लिए कोई आगे नहीं आता: स्वास्थ्य मंत्री

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा वर्कशॉप के समापन मौके पर मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि हम चाहते हैं कि नेत्र विशेषज्ञ कॉर्निया की सुपर स्पेशीलिटी की पढ़ाई भी पढ़ें। क्योंकि ज्यादातर जो नेत्र विशेषज्ञ हैं, वह मोतियाबिंद की पढ़ाई पढ़ते हैं। क्योंकि इस दिशा में उन्हें लगता है कि ज्यादा पैसा है और ज्यादा सफलता है। कॉर्निया जनित दृष्टिहीनता के मरीजों के इलाज के लिए कोई आगे नहीं आता है। ज्यादातर युवा चिकित्सक विदेश चले जाते हैं, ऐसे में उन्हें डॉ. निधि गडकर कश्यप से उम्मीद है कि वह झारखंड में अपनी सेवा दे और दृष्टिहीनों के इलाज में अपना योगदान दें। अतिथि वक्ताओं को स्वास्थ्य मंत्री ने स्मृति चिन्ह एवं शॉल दे कर सम्मानित किया।

ये डॉक्टर थे उपस्थित
सेमिनार में कोलकाता के नामी कॉर्निया सर्जन डॉ. सोहम बसाक, जमशेदपुर की डॉ. भारती शर्मा, डॉ. नितिन गणेश धीरा, डॉ. रवि बर्भया, बोकारो के डॉ. जाहिद सिद्दीकी, डॉ. आलोक कुमार एवं रांची के डॉ. बीपी कश्यप, डॉ. भारती कश्यप, डॉ.एके ठाकुर, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. डॉली टंडन, डॉ. उत्पला चक्रवर्ती और डॉ. राहुल कुमार ने भी अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। सेमिनार में कई डॉक्टरों को सम्मानित किया गया। इनमें डॉ. समर बसाक, डॉ. सोहम बसाक, डॉ. निधि गडकर कश्यप, डॉ. भारती शर्मा, डॉ. नितिन धीरा शामिल हैं। रांची ऑप्थेलमिक फोरम के वरिष्ठ सदस्य डॉ. विमल सहाय को भी सम्मानित किया गया।

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