झारखंड / इस बार खूंटी, दुमका और कोडरमा बनी स्टार सीट, दिल्ली जाने की चाह में तीन पूर्व सीएम



lok sabha election 2019 jharkhand khunti dumka kordama star seats for lok sabha chunav
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lok sabha election 2019 jharkhand khunti dumka kordama star seats for lok sabha chunav

Dainik Bhaskar

Apr 03, 2019, 10:15 AM IST

रांची. (जीतेंद्र कुमार/पंकज त्रिपाठी). यूं तो झारखंड की हर लोकसभा सीट पर मुकाबला रोचक ही होता है, मगर इस बार के लोकसभा चुनाव में खासतौर पर तीन सीटों पर सबकी निगाह लगी हुई है...क्योंकि इन तीन सीटों से राज्य के 3 पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली जाने की चाह में अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाए हुए हैं। राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी जहां कोडरमा में दम ठोंक रहे हैं, वहीं शिबू सोरेन दुमका के अपने पारंपरिक गढ़ को बचाने की जुगत में हैं। इन दोनों के साथ ही खूंटी सीट से पहली बार लोकसभा के रण में उतरे अर्जुन मुंडा की जीत या हार भी राज्य की राजनीति में काफी असर डालेगी।

मुकाबले की एक और खास बात ये है कि अब तक सिर्फ दुमका में शिबू सोरेन को ही अपने प्रतिद्वंद्वी का नाम पता है। भाजपा ने यहां से सुनील सोरेन की घोषणा कर दी है। खूंटी से महागठबंधन और कोडरमा से भाजपा के प्रत्याशी की घोषणा होना अभी बाकी है। इन तीनों स्टार सीटों के समीकरणों पर एक विशेष रिपोर्ट-

खूंटी: यहां के परिणाम से जुड़ी राज्य की भावी राजनीति

  1. खूंटी से भाजपा प्रत्याशी अर्जुन मुंडा। (फाइल)

    खूंटी इस बार झारखंड की राजनीति का भविष्य भी तय करेगी। भाजपा ने यहां कड़िया मुंडा के बजाय पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा को उतारा है। मुंडा बहुल इस संसदीय क्षेत्र में मुंडों के निष्ठा की परीक्षा होगी। भाजपा के मिशनरी और मिशनरी के भाजपा विरोधी अभियान व उसकी एकजुटता की जांच होगी। जनता, भाजपा या विपक्ष, जिसके मुद्दों के साथ जाएगी, राज्य की राजनीति उसी अनुरूप प्रभावित होगी। और इन सबके केंद्र मे होगा पत्थलगड़ी।

  2. मुंडा व मिशनरी के इर्द-गिर्द घूमती राजनीति

    खूंटी संसदीय क्षेत्र में मुंडा जनजातियों की बहुलता है। इसी के इर्द-गिर्द चुनाव की पूरी राजनीति घूमती है। क्योंकि भाजपा को पटखनी देने में सबसे आगे रहनेवाली मिशनरी आबादी का बड़ा भाग मुंडा जनजाति से ही धर्मांतरित हैं। खूंटी में स्थानीय मुद्दे ही ज्यादा प्रभावी होंगे। खूंटी लोकसभा क्षेत्र में पक्ष और विपक्ष, दोनों के मजबूत गढ़ हैं। यह राज्य की एक मात्र लोकसभा सीट है जो 6 जिलों, खूंटी, रांची, सरायकेला-खरसावां,प.सिंहभूम, सिमडेगा व गुमला में फैली है।

  3. दुमका: गुरुजी की जीत का रथ रोकने भाजपा मुस्तैद

    दुमका से जेएमएम प्रत्याशी शिबू सोरेन। (फाइल)

    दुमका लोकसभा सीट भी इस बार सबसे अधिक रोचक होने वाली है। शिबू सोरेन (गुरुजी) के समर्थक क्षेत्र में यह कह रहे हैं कि वह आखिरी बार लोस चुनाव लड़ेंगे। वैसे भी दुमका के आदिवासी दिशोम गुरु से गहरा जुड़ाव रखते रहे हैं जो पिछले कई लोकसभा चुनावों में नतीजे के रूप में दिखा भी है। पर इस बात को भाजपा भी समझती है और मुख्यमंत्री का लगातार संथाल परगना दौरा इसी बात की ताकीद है। भाजपा का मानना है कि यहां जीत से साबित हो जाएगा कि अब संथाल परगना झामुमो का नहीं रहा। जो विधानसभा चुनाव में काम आएगा। दुमका लोकसभा सीट में आने वाले 6 विधानसभा सीटों में 4 शिकारीपाड़ा, नाला, जामताड़ा व जामा पर महागठबंधन का कब्जा है जबकि दुमका व सारठ सीटों से भाजपा के विधायक हैं। दुमका विधायक लुईस मरांडी मंत्री भी हैं लेकिन कुछ माह पहले हुए नगर निकाय चुनाव में झामुमो समर्थित नगर परिषद अध्यक्ष की जीत हुई। भाजपा प्रत्याशी सुनील सोरेन 2009 और 14 में दूसरे स्थान पर रहे थे। पार्टी ने इस बार भी उन पर ही भरोसा किया है।

  4. कोडरमा: बाबूलाल को बेसब्री से प्रतिद्वंद्वी का इंतजार

    कोडरमा से जेवीएम प्रत्याशी बाबूलाल मरांडी। (फाइल)

    भले ही कोडरमा में अभ्रक की चमक फीकी पड़ रही है लेकिन 2019 के चुनाव में यह सीट खूब चमक रही है। कारण, यहां से झारखंड के प्रथम सीएम बाबूलाल मरांडी की दावेदारी। कसक इतनी भर है कि भाजपा ने अब तक प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया है। चिर प्रतिद्वंदी माले के राजकुमार यादव भले मैदान में उतर चुके हों, इंतजार भाजपा प्रत्याशी का ही है। 2014 में बाबूलाल दुमका से शिबू सोरेन के खिलाफ लड़े थे। दुमका में शिबू सोरेन को हराने पर ही 1999 में उन्हें केंद्र में राज्यमंत्री का पद मिला था। उस जीत ने ही राज्य के पहले मुख्यमंत्री बनने का मार्ग भी प्रशस्त किया था। मगर 2014 में दुमका की जनता ने उन्हें मौका नहीं दिया। अब बाबूलाल फिर कोडरमा से मैदान में हैं।

  5. भाजपा पिछड़ी है प्रत्याशी की घोषणा में

    रवींद्र कुमार राय भाजपा के यहां से सांसद हैं। राजद प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी भाजपा में शामिल होने के बाद टिकट की दावेदार है। पिछली दफा झाविमो की टिकट पर चुनाव लड़े और भाजपा में आ चुके प्रणव वर्मा भी दावेदार हैं। कोडरमा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत छह विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें चार पर भाजपा का कब्जा है।

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