महाशिवरात्रि / रांची के पहाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं की जुटी भीड़, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी की पूजा-अर्चना

रांची के पहाड़ी मंदिर के बाहर जुटी श्रद्धालुओं की भीड़। रांची के पहाड़ी मंदिर के बाहर जुटी श्रद्धालुओं की भीड़।
पहाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कलाकारों के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। पहाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कलाकारों के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।
X
रांची के पहाड़ी मंदिर के बाहर जुटी श्रद्धालुओं की भीड़।रांची के पहाड़ी मंदिर के बाहर जुटी श्रद्धालुओं की भीड़।
पहाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कलाकारों के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।पहाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कलाकारों के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।

  • देवघर में चार्टर्ड प्लेन से भक्तों और मंदिर पर प्रशासन की अनुमति से बरसाए गए फूल
  • देवघर के बैद्यनाथ मंदिर समेत झारखंड के तमाम मंदिरों में किया गया जलाभिषेक
  • दोपहर बाद निकली शिव की बारात, भक्तों के सुरक्षा के किए गए थे पुख्ता इंतजाम

दैनिक भास्कर

Feb 21, 2020, 07:38 PM IST

रांची/देवघर. महाशिवरात्रि के मौके पर रांची के पहाड़ी मंदिर समेत तमाम शिवालयों में शुक्रवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी पहाड़ी मंदिर पहुंचे और जलाभिषेक कर पूजा अर्चना की। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं दी l मुख्यमंत्री ने भोले बाबा की जय-जय और हर हर महादेव के जयकारे के बीच मंदिर परिसर से भव्य शिव बारात और जीवंत झांकियों को परंपरागत और विधिवत तरीके से रवाना किया l इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय और शिव बारात आयोजन समिति के पदाधिकारियों के साथ हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे l

पहाड़ी मंदिर में सुबह चार बजे से श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी। पूरा शहर ओम नमः शिवाय के बोल से गुंजायमान रहा। पहाड़ी मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए काफी संख्या में पुलिस बलों को तैनात किया गया था। इधर, शिव बारात आयोजन समिति की ओर से भगवान शिव की भव्य बारात सह शोभायात्रा दोपहर बाद रातू रोड कृष्णा नगर से निकाली गई, जो पहाड़ी मंदिर से होते हुए फिरयालाल चौक तक पहुंची। शिव बारात को लेकर सुरक्षा की विशेष तैयारी की गई थी।

बाबा बैद्यनाथ के लिए राेहिणी से अाया माैर, मुकुट, धाेती अाैर पटवासी
महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण के लिए शुक्रवार को बाबा नगरी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। बिहार- झारखंड, बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु बाबा के जलाभिषेक के लिए बाबा नगरी पहुंचे। गुरुवार रात से ही श्रद्धालुओं के कतार लगने का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह होते-होते भक्तों की कतार लंबी हाेती गई। शुक्रवार सुबह तीन बजे मंदिर का पट खुलने के साथ ही सबसे पहले सरदार पंडा गुलाबनंद ओझा ने बाबा की विशेष पूजा की.। इसके बाद आम भक्तों के जलार्पण सिलसिला शुरू हुआ। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और बेहतर व्यवस्था के लिए उपायुक्त नैन्सी सहाय, एसपी नरेंद्र सिंह, मंदिर प्रभारी सह अनुमंडल पदाधिकारी विशाल सागर अहले सुबह से मंदिर परिसर में डटे रहे और व्यवस्था की मॉनिटरिंग करते रहे। 

शिवरात्रि की भीड़ को लेकर जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये थे। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी की तैनाती की गयी थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया भक्तों की भीड़ भी बढ़ती गयी। हजाराें की संख्या में स्थानीय श्रद्धालु भी बाबा के जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंचे। पूरा मंदिर परिसर भक्तों से पटा रहा। मंदिर में कहीं तिल रखने तक जगह नही थी। हर तरफ शिव के जयकारे लग रहे थे। भीड़ काे नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। सुबह चार बजे से रात दस बजे तक निरंतर जलार्पण का सिलसिला चलता रहा। रात दस बजे के बाद मंदिर का पट बंद होने के बाद बाबा की चतुष्पहर पूजा आरंभ की गयी और शिव पार्वती का ब्याह संपन्न कराया गया। महाशिवरात्रि पर सवा लाख से अधिक भक्तों ने बाबा पर जलार्पण किया।

शीघ्र दर्शनम में बनी अव्यवस्था की स्थिति
महाशिवरात्री को लेकर शीघ्र दर्शनम पास को ढाई सौ से बढ़ाकर पांच सौ कर दिया गया। शीघ्र दर्शनम पास में भक्तों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा था। शीघ्र दर्शनम में सुबह से भक्तों की भीड़ लगी रही। सुबह से शीघ्र दर्शनम के तहत दर्शन करने के लिए आपाधापी मची रही कई बार अव्यवस्था का आलम बनता रहा।अव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उपायुक्त के निर्देश पर कई घंटे शीघ्र दर्शनम काउंटर को बंद कर दिया गया। भीतरखंड कार्यालय के दोनों दरवाजे पर पास वालों की भारी भीड़ लग गयी। दोपहर बाद फिर शीघ्र दर्शनम काउंटर को खोला गया।

ब्याह के मन्नत को लेकर चढ़ाया बाबा पर मोर
महाशिवरात्री पर बाबा को मोर मुकुट चढ़ाया गया। कई लोगों केक द्वारा शादी की मन्नत को लेकर बाबा पंचशूल पर मोर चढ़ाया गया। वहीं कई लोगों ने शादी संपन्न होने पर मोर चढ़ाकर बाबा से मंगलकामना की। एेसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन बाबा के पंचशूल मोर चढ़ाने से कुंवारे लोगों की शादी जल्दी होती है इसी मन्नत के साथ मोर चढ़ाने वालों की भारी भीड़ लगी रही।

सबसे पहले रोहिणी से आया मोर मुकुट बाबा पर चढ़ाया गया
प्राचीन काल से चली आ रही है परंपराओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर सबसे पहले रोहिणी से आया माैर मुकुट व वस्त्र बाबा पर चढ़ाया गया। रोहिणी के घटवाल परिवार के द्वारा बाबा के ब्याह के लिए माैर, मुकुट, सिंदुर, पटवासी, धोती साड़ी भेजी गयी जिसे बाबा पर चढ़ाया गया यह परंपरा घटवाल परिवार के वषों की चलायी जा रही है जिसका निर्वहन आज भी किया जा रहा है। 

महाशिवरात्री पर शिवरात्रि समिति के द्वारा दोपहर में बाबा मंदिर के उपर चार्टर प्लेन से पुष्प वर्षा की गयी। सुबह 11 बजे चार्टर प्लेन मंदिर पहुंचा और मंदिर की परिक्रमा करते हुए पुष्प वर्षा करायी गयी। चार्टर प्लेन के द्वारा 11 बार मंदिर के उपर पुष्प वर्षा करायी गयी।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना