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अमेरिकन टेक्निक से डिजाइन बनाएं, इसलिए ट्रेनिंग दे रही हूं / अमेरिकन टेक्निक से डिजाइन बनाएं, इसलिए ट्रेनिंग दे रही हूं

Bhaskar News Network

Sep 13, 2018, 04:11 AM IST

News - डॉ हेजल लुट्ज अमेरिका से हर वर्ष रांची के कॉलेजों में फैशन डिजाइनिंग पर वर्कशॉप देने आती हंै। इस बार निर्मला कॉलेज...

Ranchi - अमेरिकन टेक्निक से डिजाइन बनाएं, इसलिए ट्रेनिंग दे रही हूं
डॉ हेजल लुट्ज अमेरिका से हर वर्ष रांची के कॉलेजों में फैशन डिजाइनिंग पर वर्कशॉप देने आती हंै। इस बार निर्मला कॉलेज में एपलिक वर्क पर वर्कशॉप दे रही हैं। कहती हैं कि मुझे रांची आना बहुत अच्छा लगता है। यहां के लोगों को कुछ नया सिखाना भी संद है। मैं खुद रिटायर्ड प्रोफेसर हूं। थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल में पढ़ाना पसंद है, इससे बच्चे जल्दी सीखते हंै। झारखंड के ट्रेडिशनल ड्रेस वाइट साड़ी रेड बॉर्डर में कुछ एप्लिक डिजाइन का इस्तेमाल कर कुछ क्रिएटिव करें। एप्लिक वर्क बहुत ही सुंदर आर्ट है, इसे सदियों से बनाया जा रहा है। इस आर्ट में छोटे-छोटे टुकड़ों को जोड़ कर डिजाइन बनाया जाता है। कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए इस तरह से नए डिजाइन बनाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन अमेरिकन टेक्निक यूज करके वे खुद की डिजाइन बना सकती हैं। रिवर्स एप्लीके इसी टेक्निक का हिस्सा है। ये बहुत ही क्रिएटिव आर्ट है जो कि सेंट्रल अमेरिका से आया है। वहां के लोग तो सीख कर इस आर्ट को डेवलप कर ही चुके हैं। इंडिया में भी इस आर्ट का विस्तार हो इसीलिए यहां सीखा रही हूं। मैंने कोशिश की है कि स्टूडेंट्स किसी की डिजाइन कॉपी न करें। मैंने स्टूडेंट्स को देवनागरी अक्षर लिखना सिखाया है।

समय के साथ बदलाव हो

मैं पहली बार रांची 1971 में आई थी, तब यहां की महिलाएं सिर्फ साड़ी पहनती थी, पंजाबी लड़कियां सलवार-कमीज पहनती थीं। फिर कुछ सालों बाद आई तो देखा बदलाव हुआ है। सभी ने चूड़ीदार-कुरता पहनना शुरू कर दिया है। अब तो दुपट्टा भी लेना बंद है। फैशन में काफी बदलाव आया है, महिलाएं घूंघट से बाहर आ रही हैं।

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