पड़ताल / फायदा आधे से भी कम हो जाएगा... इसीलिए कई निजी अस्पताल आयुष्मान भारत के विरोध में



कुछ बड़े निजी अस्पताल को छोड़कर अन्य अस्पतालों में आयुष्मान भारत चालू नहीं हुआ है। कुछ बड़े निजी अस्पताल को छोड़कर अन्य अस्पतालों में आयुष्मान भारत चालू नहीं हुआ है।
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कुछ बड़े निजी अस्पताल को छोड़कर अन्य अस्पतालों में आयुष्मान भारत चालू नहीं हुआ है।कुछ बड़े निजी अस्पताल को छोड़कर अन्य अस्पतालों में आयुष्मान भारत चालू नहीं हुआ है।

  • झारखंड में 560 क्लिनिक और नर्सिंग होम में से 170 को ही सरकार ने दिया एप्रूवल 
  • आयुष्मान भारत... लांच हुए एक माह बीते, पर राजधानी के निजी अस्पतालों में शुरू नहीं हो सका इलाज 

Oct 24, 2018, 07:04 AM IST

रांची. जरूरतमंद मरीजों का बड़े अस्पतालों में बेहतर इलाज के लिए आयुष्मान भारत को लांच हुए एक माह बीत चुके हैं। पर राजधानी के निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज शुरू नहीं हो सका है। अधिकांश अस्पतालों में आयुष्मान भारत की सुविधा नहीं दी जा रही है। इससे जरूरतमंद मरीजों का इलाज सुविधायुक्त अस्पतालों में नहीं हो पा रहा है। मरीजों का कहना है कि वह निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाते हैं तो लौटा दिया जाता है। मरीजों की शिकायत पर भास्कर ने निजी अस्पतालों में योजना की पड़ताल की तो पता चला कि कुछ बड़े निजी अस्पताल को छोड़कर अन्य अस्पतालों में आयुष्मान भारत चालू नहीं हुआ है। 

सरकारी प्रक्रियाओं में लेटलतीफी भी कारण

  1. भास्कर ने कई अस्पताल प्रबंधकों से बात की तो उन्होंने कहा कि योजना के इंप्लीमेंटेशन में कई खामियां हैं, जो हमारे बूते नहीं है। इसलिए, अस्पताल योजना को नहीं अपनाने के मूड में हैं। ये अस्पताल योजना का लाभ के लिए अप्लाई तो कर दिए हैं, पर उत्साह नहीं है। झारखंड हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम एसोसिएशन की मानें तो इसे चालू करने में सरकारी प्रक्रियाओं में लेटलतीफी तो है ही, साथ ही इलाज का टैरिफ भी काफी कम है। जो टैरिफ विलेज हॉस्पिटल को दी जा रही है, वही मेट्रो और अन्य शहरी अस्पतालों के लिए भी है। इतना ही नहीं, अस्पतालों में पहुंचने के बाद मरीजों का इलाज 30 मिनट में शुरू करना था, लेकिन 3 से 4 घंटे बाद भी इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है। 

  2. 2 मुख्य कारण आयुष्मान भारत नहीं अपनाने के

    • इलाज का टैरिफ कम है। जो टैरिफ ग्रामीण अस्पतालों को दी जा रही है, वही टैरिफ मेट्रो और अन्य शहरी अस्पतालों के लिए भी है। 
    • अस्पतालों में पहुंचने के बाद मरीजों का इलाज 30 मिनट में शुरू करना था, लेकिन बीमा कंपनी से एप्रूवल लेने में 3 से 4 घंटे बाद भी इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है। 

  3. इलाज नहीं करने वाले अस्पतालों के तर्क

    • रेफरल के लिए टरशरी सेंटर तय नहीं है। 
    • गंभीर बीमारी का इलाज किस अस्पताल में होगा क्लियर नहीं। 
    • कॉरपोरेट अस्पतालों में तो स्टॉफ हैं, छोटे अस्पताल के डॉक्टरों को क्लर्की करनी होगी। 
    • जिस अस्पताल में भोजन की व्यवस्था नहीं है, वहां परेशानी है। 
    • इलाज के पैकेज में ही सबकुछ करना है, जो संभव नहीं है। 
    • ऑर्किड अस्पताल में डॉक्टरों की सहमति पर मामला फंसा है। 
    • वर्तमान पैकेज में मरीजों का गुणवत्ता पूर्व इलाज में कंप्रोमाइज होगा। 
    • जिन अस्पतालों को लॉगिन मिला है, उनमें अधिकांश के यहां इलाज शुरू नहीं हुआ। 
    • इंडस्ट्रियल रेट पर बिजली, पानी का बिल आता है, नगर निगम को होल्डिंग टैक्स देना होता है। 

  4. रानी चिल्ड्रेन ने कहा- हमने व्यवस्था डेवलप कर ली है

    रानी चिल्ड्रेन मुकुल घोष ने बताया कि शुरुआत में परेशानी हुई थी। अब हमने एक व्यवस्था डेवलप कर ली है, जिससे कि योजना के तहत आने वाले मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो और समय पर इलाज शुरू हो जाए। 

  5. दो अलग-अलग अस्पतालों के तर्क

    • यहां कोई समस्या नहीं: मेडिका अस्पताल के जीएम अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि हमारे यहां कोई समस्या नहीं है। मरीजों का इलाज हो रहा है। सरकार सहयोग कर रही है। 
    • कार्ड में नाम नहीं रहना: रिंची अस्पताल के डॉ. ओपी महनसरिया ने बताया कि डिलेवरी के लिए आनेवाली महिलाओं को दिक्कत हो रही है। क्योंकि, उनका नाम कार्ड में नहीं है। 

  6. इन अस्पतालों में नहीं शुरू हुआ है इलाज

    • प्रभावती अस्पताल, राज अस्पताल, गुरुनानक अस्पताल, मेदांता अस्पताल, देवकमल अस्पताल, बरियातू नर्सिंग होम, ऑर्किड अस्पताल, जगन्नाथ अस्पताल, हेल्थ प्वाइंट, मां रामप्यारी ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल समेत अन्य अस्पताल। 
    • इन्होंने अप्लाई ही नहीं किया: मेदांता और ऑर्किड हॉस्पिटल ने अप्लाई नहीं किया है। 
    • यहां हो रहा है इलाज: मेडिका, रानी अस्पताल, रिंची अस्पताल, क्यूरी अब्दुर्रज्जाक अंसारी कैंसर अस्पताल, सेवा सदन अस्पताल में इलाज हो रहा है। दोनों आंकड़े एक सप्ताह पहले के हैं। 

  7. 20 अस्पतालों को मिला है लॉगिन

    सिविल सर्जन रांची डॉक्टर विजय बिहारी प्रसाद ने बताया कि शहर के 20 अस्पतालों को लॉगिन-पासवर्ड दे दिया गया है। 20-22 अस्पतालों को एप्रुवल मिला है। इन्हें फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद लॉगिन दिया जाएगा। जबकि, कुल 56 अस्पतालों ने अप्लाई किया है। सदर अस्पताल में 80 से अधिक मरीजों का इलाज किया गया है, जो उपलब्धि है।  

  8. रांची की यह है स्थिति

    • 55 ने अप्लाई किए थे 
    • 22 को अप्रूवल मिला 
    • 05 में हो रहा इलाज 

  9. टैरिफ हमारे लिए निगोशिएबल नहीं है

    झारखंड हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष सईद अंसारी ने बताया कि योजना का टैरिफ हमारे लिए निगोशिएबल नहीं है। जो पैसा ग्रामीण अस्पतालों को दिया जा रहा है, वहीं मेट्रो शहर को भी। इसमें मरीजों का इलाज कैसे संभव हो सकेगा। 40 हजार की कीमोथेरेपी 6 हजार में कैसे करेंगे। इंश्योरेंस कंपनी से एप्रुवल मिलने में 3 से 4 घंटे का समय लग रहा है। 

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