रांची

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रांची: कैश की जगह अब किराया बढ़ाकर कंपनियों से लेवी वसूल रहे नक्सली

मगध आम्रपाली कोल परियोजना में लेवी वसूली का सिस्टम बदला

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 12:22 AM IST
230 रुपए बढ़कर अब ढुलाई प्रति टन 680 230 रुपए बढ़कर अब ढुलाई प्रति टन 680

रांची. तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) सुप्रीमो आक्रमण ने झारखंड-बिहार बाॅर्डर पर रानीगंज को अपना ठिकाना बना लिया है। वहीं से मगध आम्रपाली कोल परियोजना में लेवी वसूली के सिंडिकेट का संचालन कर रहा है। एनआईए जांच शुरू होने के बाद नक्सलियों ने लेवी वसूलने का तरीका भी बदल दिया है। अब कैश की जगह लेवी की राशि ट्रांसपोर्टिंग के किराए में जोड़ कर डीओ होल्डर कंपनियों से वसूल रहा है।

नक्सलियों की तथाकथित ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों ने किराए में प्रति टन 230 रुपए की बढ़ोतरी की है। इसके बाद रेलवे साइडिंग तक कोयला पहुंचाने के लिए डीओ होल्डर्स कंपनियों को 450 रुपए की जगह 680 रुपए प्रति टन का भुगतान करना पड़ रहा है। सीआईडी जांच में पता चला था कि डीओ होल्डर्स कंपनियां मगध आम्रपाली कोल परियोजना में प्रति टन 254 रुपए लेवी के रूप में देती है। दैनिक भास्कर ने 11 मई को ‘अरबपति नक्सली : खदानों के ट्रकों से रोज 1.64 करोड़ की वसूली, सालाना 599 करोड़ रु की कमाई’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के निर्देश पर मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई। इसके बाद नक्सलियों ने लेवी वसूली का तरीका बदल दिया।

सीआईडी जांच में कई कंपनियां हुईं थी चिन्हित : मार्च 2015 और अप्रैल 2017 में सीआईडी ने मगध आम्रपाली कोल परियोजना में लेवी वसूली की जांच की थी। इसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपी गई थी। सीआईडी ने अपनी रिपोर्ट में उन सभी ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों को चिन्हित किया था, जो टीपीसी नक्सलियों की थी। अभी भी वही ट्रांसपोर्टिंग कंपनियां काम कर रही हैं।

आक्रमण को 40 रुपए प्रति टन लेवी: मगध आम्रपाली कोल परियोजना में कोयला उठाने वाली कंपनियां टीपीसी सुप्रीमो आक्रमण को 40 रुपए प्रति टन लेवी का भुगतान कर रही है। अब तक उसे 25 रुपए टन लेवी मिलता था। यह लेवी भी बढ़े हुए किराए में शामिल है।

ट्रांसपोर्टिंग में टीपीसी व समर्थकों की कई कंपनियां

वेदांता इंटरप्राइजेज : यह कंपनी टीपीसी के हार्डकोर आक्रमण की है। हालांकि कागज पर कंपनी का मालिक आक्रमण का भाई अमन कुमार भोक्ता के अलावा अर्जुन गंझू और सुबोध गंझू को दिखाया गया है। यह कंपनी हिंडाल्को और आधुनिक कंपनी की ट्रांसपोर्टिंग का काम करती है।
गणपति ट्रेडर्स : यह कंपनी भी आक्रमण की है। लेकिन मालिक के तौर पर परमेश्वर गंझू का नाम दिखाया गया है। वेदांता इंटरप्राइजेज का एक पार्टनर अर्जुन का भाई परमेश्वर गंझू है। यह कंपनी हिंडाल्को और आधुनिक कंपनी की ट्रांसपोर्टिंग का काम करती है।
नेशनल परिवहन : यह कंपनी टीपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू के साले पंकज साहू की है।
मां गंगे कोल ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड : इसका मालिक बिंदेश्वर गंझू है। भिखन टीपीसी का हार्डकोर उग्रवादी है। काम आदित्य साव और सुधांशु रंजन संभालता है।
प्रेम प्रकाश इंटरप्राइजेज : इसका मालिक टीपीसी समर्थक प्रेम प्रकाश सिंह और मंटू सिंह है। प्रमोद कुमार दास और उज्ज्वल दास काम की देखरेख करते हैं।
टीडी इंटरप्राइजेज : मालिक सबिदा खातून, पति एस मियां। सहयोगी संजीव सिंह है।
एआर इंटरप्राइजेज : मालिक जाबिर अंसारी (सुभान मियां का दामाद)।
सूर्या लक्ष्मी इंटरप्राइजेज : मालिक सूरज उरांव, अलेश दास, प्रदीप राम व रामलाल ।
मां इंटरप्राइजेज : मालिक मिथिलेश कुमार, सुनील कुमार और प्रमोद कुमार गंझू।
भारत कोल ट्रेडिंग : मालिक अक्षय पांडेय, मुखिया, राहमू पंचायत और मंजूर आलम।

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