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रांची के इंट्री प्वाइंट पर कोरोनावायरस जांच की कोई सुविधा नहीं, कभी भी हो सकती है महामारी की इंट्री

5 महीने पहले
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रांची एयरपोर्ट पर रिम्स के दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है। ये दोनों डॉक्टर विदेश से आने वाले लोगों की जांच कर रहे हैं।
  • यूपी में 13 लोग संक्रमित, बनारस से आती हैं कई बसंे, फिर भी स्टैंड में नहीं हो रही फॉगिंग
  • परिवहन की भूमिका अहम... क्योंकि इसी ने विश्व के 120 से ज्यादा देशों में वायरस को पहुंचाया है

रांची. कई देशों में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। देश के कई राज्यों में भी मरीज और संदिग्ध मिलने लगे हैं। हालांकि, रांची सहित पूरा राज्य इससे अछूता है। स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और नगर निगम अपनी पूरी तैयारी कर चुका है कि रांची में यह बीमारी न पहुंचे। अगर, कोई केस आए तो वायरस को फैलने से रोका जाए। रिम्स और सदर अस्पताल मरीजों की पहचान होने पर उसे ठीक करने के लिए तैयारी कर चुका है। रिम्स में तो एक सप्ताह में जांच मशीन भी आ जाएगी, जिससे तुरंत जांच रिपोर्ट मिलेगी। इससे मरीज को जल्द ठीक करने में मदद मिलेगी। रांची में यह बीमारी पड़ोसी राज्यों से आ रही बसों, ट्रेन या फ्लाइट से आ सकती हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि रांची में इन बीमारियों की इंट्री न हो, इसके लिए क्या पहल की गई है। दैनिक भास्कर इन तीनों इंट्री प्वाइंट पर सुरक्षा जांच की पड़ताल की है।

बस, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के इंट्री प्वाइंट इसलिए अहम
आगरा की एक महिला इटली में पति के साथ हनीमून मनाकर बेंगलुरु वापस लौटी। वापस आने पर पति कोरोना वायरस से पॉजिटिव पाया गया तो महिला को आईसोलेट किया गया। महिला आईसोलेशन से निकल कर फ्लाइट से दिल्ली और फिर ट्रेन से आगरा अपने मायके जा पहुंची। जब इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को मिली तो सबके होश उड़ गए। अब महिला के ट्रैवल रूट को ट्रेस किया जा रहा है।

सेल्फ केयर करें, लक्षण दिखे तो रिम्स आकर जांच कराएं
रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी के एचओडी डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि आम आदमी को सेल्फ केयर होना होगा। ट्रेन, बस और फ्लाइट से सफर कर जो व्यक्ति आएं हैं, उन्हें लगता है कि उनमें कुछ लक्षण दिख रहे हैं, तो वह खुद आगे बढ़कर जांच कराने आएं। इसमें ऐसा भी न हो कि रिर्सोस का दुरुपयोग किया जाए।

रांची स्टेशन के टिकट काउंटर पर भीड़, लेकिन यहां सरकार की एक भी सुरक्षा गाइडलाइन का पालन नहीं
रेलवे स्टेशन
: रांची रेलवे स्टेशन के अंदर और बाहर कहीं भी जांच की कोई सुविधा नहीं है। टिकट काउंटर पर लोगों की भीड़ लगी थी, जिसमें एक-दो लोग ही मास्क लगाए हुए थे। मरीज या संदिग्ध भी हों तो वह सामान्य लोगों के साथ सफर कर रहे हैं। आंध्रप्रदेश में दो मरीजों की पहचान हुई है। जबकि, आंध्रप्रदेश से होते हुए ही एल्लेपी एक्सप्रेस आती है। ट्रेन में वेंडर और लोकल यात्री भी चढ़ते हैं, जिससे सुरक्षा में अनदेखी हो रही है। सरकार की सुरक्षा गाइड लाइन का एक भी पालन यहां नहीं हो रहा है। हालांकि, रेलवे का दावा है कि बाेगियाें में फॉगिंग हो रही है। स्टेशन में लगे लिफ्ट और एस्कलेटर की सफाई नियमित अंतराल में की जा रही है।

एयरपोर्ट : रांची एयरपोर्ट से निकलने वाले अधिकांश यात्री मास्क लगाए हुए थे। लेकिन, उनकाे रिसीव करने आए परिजन बिना मास्क के थे। रांची एयरपोर्ट पर रिम्स के दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है। ये दोनों डॉक्टर विदेश से आने वाले लोगों की जांच कर रहे हैं। लेकिन, दिल्ली से आनेवाले यात्रियों की तबीयत खराब होने की शिकायत पर ही जांच की जा रही है। ज्ञात हो कि अभी तक कोरोना वायरस फैलने का प्वाइंट ट्रैवल रूट ही रहा है। खासकर एयरपोर्ट। फिर भी सुरक्षा की अनदेखी हो रही है।

बस स्टैंड : खादगढ़ा और आईटीआई बस स्टैंड से हर दिन 380 से अधिक बसें ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, यूपी और बिहार से आती हैं, पर यहां जांच की कोई सुविधा नहीं है। जबकि, यूपी में भी 13 लोग संक्रमित पाए गए हैं। यात्री बिना सुरक्षा के बसों में यात्रा कर रहे हैं। यहां जागरूकता के भी उपाय नहीं किए गए हैं। जबकि, दिल्ली में बसों में वायरस को मारने के लिए फॉगिंग की जा रही है। यात्री शेड में बच्चा, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा झुंड बनाकर बैठे हुए हैं। बच्चे आसपास की हर चीजों को टच कर रहे हैं।

कोरोना का इंफेक्शन रोकने के सस्ता और सुरक्षित उपाय
डॉ. पीएन पांडेय ने कहा- कॉटन का कपड़ा लें। उसे बढ़िया से धो लें और सुखाकर प्रेस कर लें। ऐसा दो से तीन सेट बनाएं। उसे आप चेहरे पर दिन भर बांधकर घूम सकते हैं। इसका वायरस बड़े साइज का है, जो इस कपड़े से अंदर नहीं जा पाएगा।

  • सेनेटाइजर नहीं है तो समय-समय पर हथेली से कलाई तक साबून से 20 सेकेंड तक धोएं।
  • हाथों को आंख, नाक, कान व मुंह में न डालें। लोगाें से हाथ नहीं मिलाएं। नाखून न बढ़ाएं।
  • भीड़ वाली जगह पर जाने से बचें। जाना हो तो कपड़े का मास्क पहनकर जाएं।
  • पब्लिक प्लेस की चीजों जैसे कुर्सी, सीढ़ी की रेलिंग, दरवाजे का हैंडल को न छुएं।
  • मोबाइल और टीवी के रिमोट को भी हमेशा साफ रखें। नोट को गिनने में थूक नहीं लगाएं।
  • तुलसी, अदरख, गोलकी का चाय पीएं। विटामिन सी वाले फल नींबू, संतरा, आंवला का यूज करें। दूध में हल्दी मिलाकर पीएं।

इधर, खेलगांव में न सेनेटाइजर, न ही मास्क की कोई व्यवस्था, गंदगी और कचरे के बीच रह रहे खिलाड़ी
भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सरकार ने कई दिशा-निर्देश भी जारी किए। खेल मंत्रालय ने भी खिलाड़ियों को इस संक्रमण से बचने की हिदायत दी है। लेकिन झारखंड सरकार आैर सीसीएल की ओर से खेलगांव में चल रही झारखंड राज्य खेल प्रोत्साहन सोसाइटी (जेएसएसपीएस) इस मामले में पूरी तरह से लापरवाह बनी हुई है। यहां न साफ-सफाई के मानकों को पूरा किया जा रहा है, न ही बच्चों को भीड़ से अलग रखने का कोई इंतजाम है। गंदगी के बीच ही बच्चे रहने को मजबूर हैं। ब्वॉयज हॉस्टल के सामने ही कचरा पसरा है। एक अोर सरकार ने लोगों की सुरक्षा को देखते हुए भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचने का निर्देश दिया है। साथ ही कई अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के मैच तक रद्द कर दिए हैं। वहीं, इस एकेडमी में विभिन्न खेलों के लगभग 700 ब्वॉयज एंड गर्ल्स खिलाड़ी रहते हैं। इनके स्वास्थ्य के प्रति सरकार लापरवाह बनी हुई है। हालांकि दोनों के रहने के लिए अलग-अलग हॉस्टल है।

3 करोड़ में आरडी कंस्ट्रक्शन को मिला है हाउसकीपिंग का जिम्मा
आरडी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 3 करोड़ 31 लाख रुपए में खेलगांव की साफ-सफाई का काम संभाला है। कंपनी ने एक मार्च से काम शुरू भी कर दिया है। टेंडर के मुताबिक सफाई को लेकर कई आधुनिक मशीनों का उपयोग करना है। इसके लिए 136 मजदूरों को रखा गया है। वहीं, पड़ताल के दाैरान सफाई व्यवस्था की यहां पोल खुल गई। यहां न तो कोई आधुनिक मशीन नजर आई, न ही 136 मजदूर दिखे। एक महिला सफाईकर्मी ने बताया कि 90 के अासपास यहां मजदूर हैं।

मशीनों का उपयोग नहीं किया, तो होगी कार्रवाई
जेएसएसपीएस की लोकल मैनेजमेंट कमेटी के सीईओ वसाब चौधरी ने बताया कि साफ-सफाई को लेकर निर्देश कंपनी को दिए गए हैं। कंपनी अगर इसका पालन नहीं कर रही है, तो यह गलत है। आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जांच होगी। व्यवस्था ठीक नहीं है तो कार्रवाई होगी।


इन मशीनों का उपयोग करना है : स्क्रबर मशीन, वैक्यूम क्लीनर, फ्लिपर्स, ग्लास क्लीनर, वाटर जेट प्रेशर मशीन, ट्रॉली व बड़े साइज की डस्टबिन रखना है। लेकिन अभी तक ये सारी मशीनों का उपयोग यहां नहीं हो रहा है। 

डोरमैट्री में ठूंस दिए गए 50 बच्चे
ब्वॉयज हॉस्टल में बच्चों को रखने को लेकर किसी तरह की सावधानी नहीं बरती गई है। डोरमेट्री में 50-50 बच्चों को ठूंस-ठूंस कर रखा गया है। रूम के अंदर घुसते ही दुर्गंध से सामना होता है। कपड़ों को रूम में ही टांगकर सुखाया जाता है।

इधर, कालाबाजारी...
दुकानदार मास्क पर ग्राहकाें से 10 गुणा वसूल रहे हैं दा

देश में काेराेना वायरस से ग्रसित मरीजाें की संख्या में बढ़ाेतरी हाेने का असर झारखंड में भी दिखने लगा। हालांकि, अभी तक झारखंड में एक भी मरीज काेराेना के नहीं पाए गए हैं। रांची की अाम जनता मास्क अाैर सेनेटाइजर के लिए राेजाना मेडिकल स्टाेर का चक्कर लगा रही है। लेकिन, मार्केट में मास्क अाैर सेनेटाइजर न अाने के कारण उन्हें नहीं मिल पा रहा है। पहले से जिन दुकानाें पर है, वे माैजूदा समय का भरपूर लाभ उठा रहे हैं। मास्क काे दस गुणे अाैर सेनेटाइजर काे दुगुने दाम पर बेच रहे हैं। बाद में मिलेगा कि नहीं, इसके भय से लोग 10 गुणे दाम पर भी उसे खरीद रहे हैं। दुकानदार नाॅर्मल पाॅल्यूशन मास्क 4-5 गुणा, एन-95 मास्क नाै-दस गुणा, थ्री लेयर मास्क 3-4 गुणा अाैर सेनेटाइजर पर दुगुना दाम लाेगाें से वसूल रहे हैं।


फार्मासिस्ट अजय कुमार ने बताया कि काेराेना के डर से अाम लाेग इतने डरे हुए हैं कि वे पैसे का भी काेई माेल नहीं देख रहे हैं। बस, उन्हें मास्क अाैर सेनेटाइजर मिल जाए। कुछ दुकानदार इसका बखूबी फायदा उठा रहें हैं। लेकिन वे अब भी उचित मूल्य पर ही बेच रहे हैं। उन्हाेंने बताया मास्क अाैर सेनेटाइजर की खरीदारी के लिए राेजाना 500-600 लाेग उनके मेडिकल पर अाते हैं। मिलने से चेहरे पर खुशी होती है अाैर न मिलने पर उदासी। 


थ्री-लेयर मास्क का वास्तविक मूल्य : 130 रुपए.. बिक रहा-460, 500, 600 व 800 में
एन-95 मास्क का वास्तविक मूल्य : 110 रुपए... बिक रहा-850, 900, 950 व 1000 में
पाॅल्यूशन मास्क का वास्तविक मूल्य : 20 रुपए.. बिक रहा-40, 55, 60, 65, 80 व 95 में
साधारण मास्क का वास्तविक मूल्य : 5 रुपए.. बिक रहा -15, 20 और 25 में

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