रिम्स / दवा नहीं, एक हफ्ते में आयुष्मान के दो मरीजों की मौत



no medicine in Rims, two patients of Ayushman die in a week
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no medicine in Rims, two patients of Ayushman die in a week

  • मरीजों के लिए तत्काल दवा खरीदने की व्यवस्था नहीं, मांगपत्र देने के बाद होता टेंडर 
  • सबसे बड़ा सवाल, क्या नियमों की आड़ में मरीजों को मरने छोड़ देगा रिम्स

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 07:14 AM IST

रांची. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में आयुष्मान भारत याेजना के मरीजाें के लिए दवा नहीं है। इन मरीजाें से बाहर से भी दवा नहीं मंगाई जा सकती। और दवा के अभाव में आयुष्मान भारत के मरीज दम ताेड़ रहे हैं। बुधवार रात भी जमशेदपुर निवासी जीतू बाग (50) की दवा न मिलने से माैत हाे गई।


बाग की पत्नी बिमला ने बताया कि लीवर की बीमारी से पीड़ित जीतू बाग काे 8 जून काे रिम्स में भर्ती कराया गया था। डाॅक्टराें ने चार दिन पहले रिम्स प्रबंधन काे उसकी दवा के लिए मांग पत्र भेजा। लेकिन दवा नहीं मिली। रिम्स प्रबंधन ने यह कहते हुए मांग पत्र लाैटा दिया कि दवा नहीं है। अंतत: जीतू बाग की माैत हाे गई। इसी तरह पिछले शुक्रवार काे भी मेडिसिन आईसीयू में बेड नंबर 11 पर भर्ती हजारीबाग के टाटी झरिया निवासी अरुण कुमार महताे (39) की भी दवा न मिलने से माैत हाे गई थी। अरुण काे अायुष्मान भारत याेजना के तहत 25 मई काे यहां भर्ती कराया गया था। लेकिन 12 दिन बाद भी दवा नहीं मिली। 

नियम : आयुष्मान मरीजों से बाहरी दवाएं नहीं मंगवाई जा सकती 

आयुष्मान योजना के तहत भर्ती मरीजों से कोई भी दवा बाहर से नहीं मंगवाई जा सकती। सभी दवाएं व इम्प्लांट अस्पताल प्रबंधन को ही देने होते हैं। नियमत: सभी दवाआें का पर्याप्त स्टॉक रखना अस्पताल का काम है। 
 

सफाई : रिम्स निदेशक बोले-एचओडी को दवा खरीद का अधिकार 
रिम्स निदेशक डाॅ. दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि एचअाेडी काे दवा खरीदने के अधिकार दिए गए हैं। थाेड़ी परेशानी है, तत्काल दवा उपलब्ध नहीं हाे पा रही है। जहां तक मरीज की माैत की बात है ताे इस मामले काे देखेंगे। 
ये जीतू बाग की दवाओं के लिए डॉक्टर की ओर से भेजा गया मांगपत्र है, जिस पर प्रबंधन ने नॉट अवेलेबल लिखकर लौटा दिया। रिम्स में दवा और इंप्लांट पहले से नहीं खरीदा जा रहा है, बल्कि मांगपत्र आने पर टेंडर किया जाता है। इस प्रक्रिया में कई दिन लग जाते हैं। 

 

बैकुंठ को डायलिसिस की दवा का इंतजार 

रिम्स के मेडिसिन विभाग में आयुष्मान भारत के तहत एक और मरीज बैकुंठ राणा भर्ती है। बैकुंठ का डायलिसिस हाेना है। उसे आठ जून काे रिम्स में भर्ती कराया गया है। डाॅक्टराें ने रिम्स प्रबंधन काे दवा खरीद के लिए मांग पत्र भेजा, लेकिन प्रबंधन ने लिखा कि दवा है ही नहीं। 

जवाब : एचओडी बोले-दवा खरीदना हमारा नहीं प्रबंधन का काम
मेडिसिन एचओडी डाॅ. जेके मित्रा ने कहा कि एचओडी का काम दवा खरीदना नहीं, इलाज करना है। दवा खरीदने के चक्कर में ही मेडिसिन विभाग के एक प्रोफेसर पर कार्रवाई हुई थी। दवा खरीदना प्रबंधन का काम है।

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