दावा / 2017 में झारखंड में रद्द किए गए 90 फीसदी राशन कार्ड नहीं थे फर्जी

नाेबेल पुरस्कार विजेता अभिजित बनर्जी व इस्थर डुफ्लो की संस्था ने अध्ययन में दावा किया है। -फाइल फोटो। नाेबेल पुरस्कार विजेता अभिजित बनर्जी व इस्थर डुफ्लो की संस्था ने अध्ययन में दावा किया है। -फाइल फोटो।
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नाेबेल पुरस्कार विजेता अभिजित बनर्जी व इस्थर डुफ्लो की संस्था ने अध्ययन में दावा किया है। -फाइल फोटो।नाेबेल पुरस्कार विजेता अभिजित बनर्जी व इस्थर डुफ्लो की संस्था ने अध्ययन में दावा किया है। -फाइल फोटो।

  • नोबेल पुरस्कार विजेता की शोध संस्थान जे-पाल के अध्ययन में किया गया है दावा
  • झारखंड में 10 रैंडम तरीके से चुने जिलों में 2016-18 में रद्द हुए राशन कार्डों का किया शोध

दैनिक भास्कर

Feb 20, 2020, 07:05 PM IST

रांची.  नाेबेल पुरस्कार विजेता अभिजित बनर्जी व इस्थर डुफ्लो द्वारा स्थापित शोध संस्थान जे-पाल के अध्ययन में दावा किया गया है कि साल 2017 में संबंधित परिवाराें काे बताए बिना रद्द किए गए 90 फीसदी राशन कार्ड फर्जी नहीं थे। जबकि तत्कालीन रघुवर सरकार का दावा था कि रद किए गए ज्यादातर राशन कार्ड फर्जी थे। हालांकि जिस समय राशन कार्ड रद्द किए गए थे उस समय स्थानीय शोधकर्ताओं और कार्यकर्ताओं ने भी यही दावा किया था कि रद्द किए गए राशन कार्ड फर्जी नहीं थे। जे-पाल के अध्ययन कार्य में अर्थशास्त्री कार्तिक मुरलीधरन, पॉल नीहाउस और संदीप सुखटणकर शामिल हुए थे। 

अर्थशास्त्री कार्तिक मुरलीधरन, पॉल नीहाउस और संदीप सुखटणकर द्वारा इस अध्ययन के तहत झारखंड में 10 रैंडम तरीके से चुने जिलों में 2016-2018 में रद्द हुए राशन कार्डों का शोध किया गया है। अध्ययन में पाया गया कि 2016 और 2018 के बीच 10 जिलों में 1.44 लाख राशन कार्ड रद्द किये गए थे। इन 10 जिलों के कुल राशन कार्डों का लगभग 6 फीसदी रद्द किए गए। कुल रद्द किए गए कार्डों के 56 फीसदी एवं कुल कार्डों के 9 फीसदी आधार से जुड़े नहीं थे। रद्द किये गए राशन कार्डों में से 4,000 रैंडम ढंग से चुने गए राशन कार्डों के जांच में पाया गया कि लगभग 90 फीसदी रद्द किये गए राशन कार्ड फर्जी नहीं थे। लगभग 10 फीसदी राशन कार्ड फर्जी परिवारों के थे, यानी वह परिवार जिनका पता नहीं लगाया जा सका। इसी अध्ययन का अनुमान है कि राशन कार्डों को रद्द करने से पहले, कुल लाभुकों में ज्यादा-से-ज्यादा 3 फीसदी फर्जी थे। संगठन का कहना है कि राशन कार्डों को इतने बड़े पैमाने पर रद्द करना, एक चूहे को पकड़ने के लिए पूरा घर जला देने के बराबर था।

तीन लाख अवैध राशन कार्ड अवैध घोषित किए गए थे

जे-पाल अध्ययन में महत्वपूर्ण घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 27 मार्च 2017 को, झारखंड के मुख्य सचिव ने कहा था कि सभी राशन कार्ड जिन्हें आधार नंबर के साथ जोड़ा नहीं गया है, वे 5 अप्रैल को निरर्थक हो जाएंगे। लगभग 3 लाख राशन कार्ड अवैध घोषित किए गए हैं। 22 सितंबर 2017 को, झारखंड सरकार ने अपने एक हजार दिनों की सफलताओं पर एक पुस्तिका जारी की। उसमें उन्होंने ये कहा कि आधार नंबर के साथ राशन कार्ड को सीड करने का काम शुरू हो गया है। इस प्रक्रिया में 11 लाख, 64 हजार फर्जी राशन कार्ड पाए गए हैं। इसके माध्यम से, राज्य सरकार ने एक वर्ष में 225 करोड़ रुपए बचाये हैं, जिनका उपयोग अब गरीब लोगों के विकास के लिए किया जा सकता है। 99 फीसदी राशन कार्ड आधार के साथ सीड किए गए हैं। 10 नवंबर 2017 को खाद्य विभाग (झारखंड सरकार) ने स्पष्ट किया कि हटाए गए राशन कार्डों की संख्या असल में 6.96 लाख थी, न कि 11 लाख। रद्द किये गए कार्डों को फर्जी आदि कहा जाता रहा।

28 सितंबर 2017 को, संतोषी कुमारी (सिमडेगा जिले में एक बेसहारा परिवार की 11 वर्षीय लड़की) की भूख से मौत हो गई। संतोषी कुमारी के परिवार का राशन कार्ड, आधार से सीड न होने के कारण, पहले ही रद्द किया गया था। संतोषी कुमारी की दुखद मौत ने देश की अंतरात्मा को हिला दिया था। 2017-19 में झारखंड में भुखमरी से हुई मौतों की सिर्फ शुरुआत थी। इन भुखमरी से हुई मौतों में से लगभग आधी मौतें किसी ना किसी तरीके से आधार सम्बंधित समस्याओं से जुड़ी थीं। 

इनका है कहना
अहमदाबाद आईआईएम की प्रोफेसर, शोधकर्ता एवं अर्थशास्त्री प्रोफेसर रीतिका खेरा ने कहा कि पिछली बार असली लाेगाें के कार्ड रद कर दिए गए जिससे कुछ माैते भी हुईं। इनसब के बावजूद नई झारखंड सरकार एक बार फिर राशन कार्डों को बड़े पैमाने पर रद्द करने की तैयारी में जुटी हुई है। यह उचित नहीं है। 

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