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झारखंड / ओमान में 30 भारतीय मजदूरों को सात महीने से नहीं मिला वेतन, पीएम मोदी से मदद की अपील; भारतीय दूतावास बोला- हम सभी के संपर्क में

परिजन का आरोप- मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया है। परिजन का आरोप- मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया है।
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परिजन का आरोप- मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया है।परिजन का आरोप- मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया है।

  • राज्य के 30 मजदूर मस्कट में फंसे हैं, 2017 में कंपनी में काम का लालच देकर मजदूरों को ओमान ले जाया गया था
  • विदेश मंत्रालय ने मामले का संज्ञान लेकर ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास को आवश्यक कार्रवाई का आदेश दिया

दैनिक भास्कर

Feb 21, 2020, 06:49 PM IST

रांची. ओमान की राजधानी मस्कट में 30 भारतीय मजदूर फंसे हैं। ये सभी झारखंड, तमिलनाडु और केरल से बताए जा रहे हैं। शुक्रवार को एजेंसी के जरिए आई जानकारी के मुताबिक, मजदूरों ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुरक्षित देश वापसी की गुहार लगाई। विदेश मंत्रालय ने इसका संज्ञान लेकर ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास को आवश्यक कार्रवाई का आदेश दिया है।

मजदूरों के मुताबिक, उन्हें ठेकेदारों के जरिए ओमान लाया गया था। वहां एक कंपनी में नौकरी दिलवाई गई थी। कंपनी ने छह माह से वेतन नहीं दिया है। यह मामला सामने आते ही ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया कि हम सभी मजदूरों से लगातार संपर्क में हैं। ओमान के प्रशासन से भी इस बारे में बात की जा रही है। मजदूरों को सभी आवश्यक कानूनी मदद दी जाएगी। मजदूरों की समस्या के निराकरण के लिए हर संभव मदद दी जाएगी। 

मुख्यमंत्री सोरेन ने विदेश मंत्रालय से मदद मांगी थी

इससे पहले, गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्विटर के जरिए मजदूरों की भारत वापसी को लेकर विदेश मंत्री डॉ. एस.जयशंकर से मदद मांगी थी। मुख्यमंत्री ने विदेश मंत्रालय से झारखंड के मजदूरों का शोषण करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।

मजदूरों ने फोन करके परिजन को जानकारी दी
मजदूरों ने फोन पर उनके बंधन होने की जानकारी परिजन को दी। दरअसल, यह सभी रोजगार की तलाश में ओमान गए थे। इनके परिजन का आरोप है कि वे सभी जिस कंपनी में काम करते हैं, उसने सात महीने से वेतन नहीं दिया है। सभी मजदूरों को बंधक बनाया गया है। 24 घंटे में एक बार खाना दिया जा रहा है। जब भी वे लोग वेतन मांगते हैं, उन्हें धमकी दी जाती है। ये मजदूर झारखंड के हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह और बोकारो जिले के रहने वाले हैं।
 
2017 में गए थे ओमान
परिजन ने बताया कि ओमान में प्रवासी ग्रुप के जरिए भारत के विदेश मंत्रालय को संदेश भेजा गया। प्रवासी ग्रुप के सिकंदर अली ने बताया कि इन सभी का वीजा खत्म हो गया है। वे कैदी की तरह हैं। उनकी वतन वापसी की दिशा में ठोस कदम उठाया जाए। 2017 में एक कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन में काम करने का लालच देकर इन मजदूरों को ओमान ले जाया गया था। जून-2019 तक काम के बदले थोड़ा-बहुत वेतन मिला। जुलाई से वेतन बंद कर दिया गया।

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