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इसी दिन शिव को पाने के लिए पार्वती ने निर्जला व्रत किया था

हरितालिका तीज व्रत महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए और कुंवारी कन्या सुयोग्य वर पाने लिए करती हैं। इस बार हरितालिका...

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 04:15 AM IST
Ranchi - इसी दिन शिव को पाने के लिए पार्वती ने निर्जला व्रत किया था
हरितालिका तीज व्रत महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए और कुंवारी कन्या सुयोग्य वर पाने लिए करती हैं। इस बार हरितालिका तीज 12 सितंबर, बुधवार को है।

हरितालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव, माता गौरी और श्री गणेश की पूजा की जाती है। इस व्रत में निर्जला और निराहार रहकर महिलाएं रात भर जागकर भगवान के गीत गाती हैं और व्रत को संपूर्ण करती हैं। शिव और मां गौरी की मिट्टी की मूर्ति बनाकर उनकी पूजा होती है और उनसे अच्छे पति और संतान के सुख के लिए प्रार्थना की जाती है।

श्री शिवजी पार्वती से कहते हैं कि हे देवि मैं स्त्री जाति की भलाई के लिए यह उत्तम व्रत है। जो स्त्री अपने सौभाग्य की रक्षा करना चाहती है, वह य|पूर्वक यह व्रत करे। पहले कदली (केला) के खंभों आदि से सुशोभित एक सुंदर मंडप बनाएं, उसमें रंग-बिरंगे रेशमी कपड़ों के चंदवा लगाकर चंदन आदि सुगंधित द्रव्यों से वह मंडप लिपें, फिर शंख, भेरी, मृदंग आदि बजाते हुए बहुत से लोग एकत्रित होकर तरह-तरह के मंगलाचार करते हुए उस मंडप में पार्वती तथा शिवजी की प्रतिमा स्थापित करें। उस रोज दिनभर उपवास कर बहुत से सुगंधित फूल, गंध और मनोहर धूप, नाना प्रकार के नैवेद्य आदि एकत्र कर मेरी पूजा करें और रातभर जागरण करें। नारियल, सुपारी, जमीरी नींबू, लौंग, अनार, नारंगी आदि जो-जो फल प्राप्त हो सके उन्हें इकट्ठा कर लें। फिर धूप-दीपादी द्वारा पूजन करें। इसके बाद विधिपूर्वक कथा सुनें। जो स्त्री यह पूजन करती हैं उसे सात जन्म तक सुख तथा सौभाग्य प्राप्त होता है। दूसरे दिन दान दें और पारण करें।

कब मनाया जाएगा : काशी पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 11 सितंबर मंगलवार को सायं 7:54 से 12 सितंबर को सायं 6:38 बजे तक है। वहीं मिथिला पंचांग के अनुसार 11 सितंबर मंगलवार रात्रि 8:02 से 12 सितंबर को रात्रि 6:45 बजे तक रहेगा।

आस्था

डलिया में पकवान-फल आदि सजाकर सुहागिन व कुंवारी करेंगी व्रत, रातभर महिलाएं जागकर गाती हैं गीत

क्या है हरितालिका शब्द का अर्थ और कैसे पड़ा नाम : इस व्रत से एक पौराणिक कथा का संबंध है, जिसके अनुसार माता पार्वती भगवान शिव जी को पति रूप में पाना चाहती थीं जिसके लिए उन्होंने कठिन तपस्या की, लेकिन उस समय पार्वती की सहेलियों ने उन्हें अगवा कर लिया। हरत का अर्थ है अगवा करना एवं आलिका का अर्थ है सहेलियां। अर्थात सहेलियों द्वारा अपहरण करना हरितालिका कहलाता है। इसी कारण इस व्रत को हरितालिका कहा जाता है। यह व्रत शिव जी जैसा पति पाने के लिए भी कुंवारी कन्याएं श्रद्धा-पूर्वक करती हैं।

हरितालिका तीज व्रत से जुड़े नियम

इस व्रत को निर्जला और निराहार किया जाता है। सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाता। इस दिन रतजगा किया जाता है।

हरितालिका तीज पूजन विधि : हरितालिका तीज पूजन प्रदोष काल में किया जाता है। पूजन के लिए सबसे पहले मिट्टी और बालू रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की प्रतिमा बनाएं। फुलेरा बनाकर उसे सजाएं। रंगोली डालकर उस पर पट्टा या चौकी रखें। चौकी पर सातिया बनाएं और उस पर थाली रखें। अब उस थाल में केले के पत्ते रखें। तीनों प्रतिमाओं को केले के पत्तों पर आसीन करें। इसके बाद शिव का पूजन करें और फिर गौरी का शृंगार कर पूजन प्रारंभ करें।

हरितालिका तीज 12 को

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