रिम्स / 14 करोड़ से बनी मल्टीलेवल पार्किंग बिल्डिंग में सिर्फ एक कार



Only one car in multi-level parking building made of 14 crores
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Only one car in multi-level parking building made of 14 crores

  • 4 करोड़  से बना मल्टी लेवल पार्किंग धुल फांक रहा, नो पार्किंग जोन में डॉक्टर और मरीजों के वाहन
  • दूसरे राज्य के बेस्ट प्रैक्टिस से भी सीख नहीं लेता रिम्स प्रबंधन

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2019, 05:13 AM IST

रांची (संतोष चौधरी). झारखंड का पहला मल्टीलेवल कार पार्किंग राज्य के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज रिम्स में बना है। करीब 14 करोड़ रुपए की लागत से 4 मंजिला मल्टीलेवल पार्किंग बनने के बाद से धुल फांक रहा है। यहां करीब 350 कार एक साथ लगाने की व्यवस्था है।

 

यह पहला पार्किंग है, जहां बिना किसी समस्या के तीन मंजिल  उपर तक वाहन ले जाया जा सकता है। इसके बावजूद पिछले 8 माह से यहां सिर्फ एक कार की पार्किंग होती है। क्योंकि, रिम्स के कोई भी डॉक्टर और मरीज के परिजन यहां वाहन पार्क करने के लिए नहीं आते। रिम्स परिसर में निदेशक चैंबर के बाहर से लेकर इमरजेंसी के सामने रोड के चारों ओर बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े रहते हैं। जबकि, यह नो पार्किंग जोन है। नो पार्किंग जोन में रिम्स के डॉक्टरों के ही वाहन लगते हैं, इसलिए मरीज के परिजन भी मनमाने तरीके से जहां-तहां वाहन लगाकर छोड़ देते हैं। इससे रिम्स परिसर में अव्यवस्था की स्थिति बन गई है। 


बेसमेंट से लेकर टॉप फ्लोर तक खाली  
मल्टीलेवल पार्किंग का बेसमेंट से लेकर ग्राउंड और टॉप फ्लोर तक हमेशा खाली रहता है। यहां पिछले 6 माह से एक गार्ड वाहिद खान पार्किंग स्थल की निगरानी करता है। उसने बताया कि कोई भी यहां वाहन लगाने के लिए नहीं आता है। जब तक रिम्स के सभी डॉक्टर और स्टॉफ अपने वाहन पार्किंग में नहीं लगाएंगे, तब तक बाहरी व्यक्ति भी यहां वाहन लगाने नहीं आएगा।

 

निदेशक का निर्देश : पार्किंग में लगाएं एंबुलेंस, पर सभी रोड पर

रिम्स निदेशक ने रिम्स इमरजेंसी के सामने से निजी एंबुलेंस को हटाने का निर्देश दे दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि निजी एंबुलेंस चालक मल्टीलेवल पार्किंग में ही एंबुलेंस लगाएंगे। मरीज की सुविधा के अनुसार एंबुलेंस को इमरजेंसी के सामन लाएंगे। गुरुवार को कुछ एंबुलेंस तो पार्किंग में खड़ी हुई, लेकिन अधिकतर एंबुलेंस इमरजेंसी और गोलंबर के चारों ओर खड़ी रही। 
 

अस्पताल जाने के रास्ते में रहता है हमेशा जाम

पार्किंग की जगह नहीं होने के कारण अस्पताल के रास्ते में जाम लगा रहता है। गाड़ियां चारों ओर लगी रहती है। इमरजेंसी गेट से लेकर निदेशक कार्यालय तक गाड़ियां सड़क के दोनों ओर पार्क की जा रही है। आए दिन एंबुलेंस फंस जाती है। बाकी बची कसर निजी एंबुलेंस वाले पूरी कर रहे हैं। इन्हें परिसर से हटाने में भी प्रबंधन विफल रहा है।
 

िजम्मेदारों का जवाब

 

हमारा वक्त बर्बाद होगा

रिम्स पार्किंग स्थल से इमरजेंसी की दूरी 900 मीटर है। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें गाड़ी पार्क करने के लिए एक किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी। इससे उनका वक्त बर्बाद होगा। प्रबंधन को पार्किंग स्थल से इमरजेंसी तक आने के लिए किसी वाहन का इंतजाम करना चाहिए।

 

इमरजेंसी के पास बनाते तो लगाते

रिम्स के कई विभागाध्यक्षों ने बताया, पार्किंग स्थल तो काफी अच्छा है। लेकिन, वहां गाड़ी लगाने व लाने में होने वाली दिक्कतों के बारे में किसी का ध्यान ही नहीं है। उनका कहना है कि अगर यह इमरजेंसी के पास बनता तो सभी को राहत मिलती। आम लोगों के लिए नए पार्किंग स्थल में गाड़ियां लगाने पर पार्किंग शुल्क लेने की योजना भी है। 

 

इधर, सीएमसी वेल्लोर परिसर में नहीं दिखता वाहन, पार्किंग भी देखने लायक  
तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में प्रतिदिन करीब 8 हजार मरीज पहुंचते हैं। डॉक्टर और स्टॉफ 10 हजार से अधिक हैं। इसके बावजूद हॉस्पिटल परिसर में प्रवेश करने के बाद कैंपस में कहीं भी जहां-तहां वाहन खड़ा नहीं दिखता। हॉस्पिटल कैंपस में ही करीब 2 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था है। इसके अलावा हॉस्पिटल के सामने एक अलग पार्किंग है, जहां मरीज के परिजन अपने वाहनों की पार्किंग कर सकते हैं। यहां पूरी तरह मैकेनाइज्ड मल्टी लेवल कार पार्किंग बना है जो हाइड्रोलिक है।

 

पांच मंजिलें इस पार्किंग में एक साथ 200 कार की पार्किंग होती है। पार्किंग शुल्क भी ऐसा कि किसी को पैसे खर्च करने में कोई गुरेज न हो। पहले छह घंटे के लिए मात्र 50 रुपए और इसके बाद प्रत्येक घंटे के लिए अतिरिक्त 10 रुपए खर्च होते हैं। एक बार पार्किंग में वाहन खड़ा होने के बाद वाहन की सुरक्षा संचालक की जिम्मेवारी होती है। जबकि रिम्स में 13 करोड़ खर्च कर पार्किंग बनाया गया है, लेकिन रिम्स प्रबंधन दूसरे हॉस्पिटल के बेस्ट प्रैक्टिस को भी लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।

 

आंकड़ों पर नजर

  • 300 गाड़ियों की क्षमता है मल्टी स्टोरी पार्किंग में
  • 200 करीब बड़े वाहन और दो पहिया वाहन
  • 800 से ऊपर वाहन लगते हैं परिसर में  
  • 350 डॉक्टरों के वाहन 
  • 250 कर्मचारियों के वाहन
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