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आत्महत्या का प्रयास / भाग दौड़ से परेशान होकर मरीज रिम्स के पहले तल्ले से कूदा, गंभीर



मरीज के साथ परिजन मरीज के साथ परिजन

रिम्स में एक और कारनामा | ओपीडी, डॉक्टर चैंबर और लैब में 3 घंटे खड़े होने के बाद होती है इलाज 

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 05:46 AM IST

रांची. रिम्स के मेडिसिन वार्ड में भरती एक मरीज जीतेश प्रसाद ने (35 वर्ष) ने अस्पताल के छज्जे से कूदकर जान देने की कोशिश की। हालांकि, कम ऊंचाई होने के कारण वह बच गया। उसके शरीर के कई हिस्सों में चोट आई है। जीतेश के परिजनों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से फीवर के कारण वह रिम्स का चक्कर काट रहा था।

 

रविवार को वह रिम्स आया था। डॉक्टरों ने उसे टेस्ट कराने को कहा। निजी अस्पताल में टेस्ट कराने के बाद भी रिम्स में उसे यहां-वहां दौड़ाया गया। सोमवार को वह फिर पहुंचा। पहले डॉक्टरों ने कहा कि उसे भरती होने की जरूरत नहीं है। सुबह से शाम तक वह रिम्स में ही रहा।

 

टीबी की है आंशका : करीब तीन बजे उसे भरती लिया गया। परिजनों के अनुसार, उसे टीबी की आशंका है। बीमारी और इलाज में हो रही परेशानी से तंग आकर वह रिम्स के छज्जे से कूद गया। देर शाम उसका इमरजेंसी में इलाज किया जा रहा था।

 

मरीज को भर्ती करने में ही लग गए 5 घंटे : जितेश प्रसाद के परिजनों ने बताया कि सोमवार को वह लोग 10:00 बजे हॉस्पिटल पहुंच गए थे। ओपीडी का पुर्जा लेकर उन्होंने मेडिसिन ओपीडी में मरीज को दिखाया। डॉक्टरों ने पहले भर्ती करने से इनकार कर दिया। कहा कि मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन, जब मरीज की स्थिति के बारे में बताया गया तो भर्ती लिया गया। लेकिन, भर्ती लेने नहीं 3:00 बज गए।  इससे मरीज़ काफी तनाव में आ गए और बता आज जान देने की कोशिश की।

 

रिम्स मरीज ऐसे होते हैं परेशान : यहां कहने को तो 7 से 8 काउंटर हैं, लेकिन मुश्किल से 2 या 3 काउंटर ही चालू रहते हैं। यहां स्लीप के लिए आधा घंटा से एक घंटा लगता है।

 

डॉक्टर चैंबर : ओपीडी का स्लिप मिलने के बाद मरीज डॉक्टर के चैंबर में पहुंचते हैं। यहां भी 1 घंटा लाइन लगते हैं। 

 

पैथोलॉजी जांच में भी लाइन : डॉक्टर से दिखाने के बाद उन्हें जांच के लिए भी लाइन लगानी पड़ती है। जांच के लिए स्लिप कटाने में उन्हें आधे घंटे लगते हैं, फिर सैंपल देने में 1 घंटा समय बीत जाता है। फिर रिपोर्ट मिलती है।    

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