राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने पीएम आवास की अर्जी दी

3 वर्ष पहले
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  • बोलीं- बुढ़ापे में बहू-बेटे ने निकाला तो कहां रहूंगी, कम से कम एक छत तो रहेगी
  • उन्होंने बताया कि 21 महीने से वेतन नहीं मिला, पति की पेंशन से महिलाओं की सेवा करती हूं   

जमशेदपुर (चंद्रशेखर सिंह). जमशेदपुर की कल्याणी शरण झारखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष हैं। जून 2017 से अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनकी सैलरी 75-80 हजार रुपए प्रतिमाह होगी। सैलरी कितनी है, उन्हें भी पता नहीं। क्योंकि जब से अध्यक्ष बनी हैं, उन्हें आज तक एक बार भी वेतन नहीं मिला।

 

उन्होंने पीएम आवास के लिए अर्जी दी है। इतने बड़े पद पर होने के बावजूद पीएम आवास के लिए अर्जी लगाने पर उन्होंने भास्कर से कहा- महिलाओं की पीड़ा के मैंने गंभीर केस देखे। बुढ़ापे में मेरे बहू-बेटा घर से निकाल देंगे तो क्या करेंगे,कहां रहेंगे, इसलिए अभी से अपने घर का इंतजाम कर रही हूं।


कल्याणी शरण ने बुधवार को जमशेदपुर अक्षेस कार्यालय में प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद से सवाल उठ रहे थे कि 75-80 हजार रुपए सैलरी पानेवाली राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को पीएम आवास के लिए आवेदन क्यों देना पड़ा?

 

उन्होंनेे कहा-मेरे पास न तो अपना घर है और न मुझे स्थायी वेतन मिलता है। एक दिन अध्यक्ष का पद भी चला जाएगा। फिर मैं भी एक साधारण महिला हो जाऊंगी। आयोग की अध्यक्ष होने के नाते मैंने महिलाओं की समस्या को करीब से देखा है। इसलिए अंदर एक डर रहता है कि बुढ़ापे में बेटा-बहू यदि नहीं पूछेंगे, तब क्या होगा। अपने नाम का एक प्रधानमंत्री आवास रहेगा, तो  भविष्य सुरक्षित रहेगा। कम से कम बुढ़ापे में सिर पर छत तो रहेगी।


कल्याणी कहती हैं-  जून 2017 से प्रभार संभालने के बाद से तकनीकी कारणों का हवाला देकर वेतन नहीं मिल रहा है। भाड़े की गाड़ी से राज्यभर का दौरा करती हूं। कई बार घर का पैसा लगाना पड़ता है। मेरे नाम से न घर है और न जमीन। टेल्को में भाड़े के मकान में रहती हूं। जीवनभर पति के पैसे से सामाजिक कार्य किया। अवैध कमाई नहीं की। पति भी बेटे-बहू की तरफदारी करने लगे, तो अकेले क्या कर सकूंगी। संभव है कि बेटा भी बहू के चंगुल में आकर मां को ही भूल जाए।


उन्होंने कहा- अभी आयोग की अध्यक्ष हूं, तो घर में भी रामराज्य लगता है। लेकिन यह स्थिति आगे भी रहेगी, ऐसा दावा नहीं कर सकती। बेटा-बहू पर भरोसा करना थोड़ा मुश्किल दिख रहा है। मैं इस स्थिति से डरी रहती हूं। भविष्य में भटकने से अच्छा है कि सरकार की मदद से एक छत ले लूं, ताकि शेष जीवन आराम से काट सकूं। सरकार की सुविधा का लाभ उठाने का अधिकार एक महिला के रूप में मुझे भी है, इसलिए पीएम आवास के लिए आवेदन दिया है।